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बाखबरः मालहरण लीला

अंत में सब लोग एनजीटी को कोसते दिखे कि पांच करोड़ का जुर्माना ही क्यों लगाया? चैनलों में होती आलोचना आलोच्य वस्तु की महिमा ही स्थापित करती है इसीलिए उसकी आलोचना को कोई सीरयसली नहीं लेता! वह जिसकी निंदा करती है उसकी ही स्तुति बन जाती है!

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