bebak bol

बेपर्दा मुर्दा

कोरोना की दूसरी लहर में सबसे बड़ा संकट यह है कि कैसे विश्वास कायम हो। अब फिर से वही स्थिति आ गई है। सड़कें...

दंडवत

भारतीय जनतंत्र महज 75 साल का है। हमारे लोकतंत्र के इतने छोटे अनुभव के बरक्स अन्य गैरलोकतांत्रिक व्यवस्थाएं अब भी हमारी चेतना का हिस्सा...

अमाननीय

भारत में लोकतंत्र की जड़ें बहुत गहरी हैं। मगर यहां सामंती सत्ता की भी लंबे समय तक पैठ रही है। जनता की चुनी हुई...

जन-संघ

दत्तात्रेय की पहचान बनी थी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता के रूप में। अभाविप का मतलब है जनमोर्चा। संघ के इतिहास में पहली...

क्षय का भय

किसान नेताओं की रणनीति है कि बिना किसी राजनीतिक नुकसान के केंद्र सरकार को संवाद की मेज पर नहीं बैठाया जा सकता है। दो...

भाजपालोक

मिठुन दादा के नागलोक और ममता दीदी के चंडीपाठ के बाद दिल्ली के सीएम विधानसभा में एलान कर रहे थे कि राम मंदिर बनने...

एक अनार 23 बीमार

कांग्रेस का भारतीय राजनीति में बहुत लंबे समय तक सत्ता में रहना ही उसके वर्तमान की त्रासदी है। केंद्रीय सत्ता से लेकर राज्यों में...

बेबाक बोल: यौन हिंसा : मौन हिंसा

उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के असोहा इलाके के बबुरहा गांव के बाहर संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाई गई दो किशोरियों की अंत्येष्टि शुक्रवार...

राजकाज-बेबाक बोल: कीलकर्म

एक बात तो साफ है कि यह आंदोलन एक-दो जगह और किसी खास कौम या जाति का मामला नहीं रह गया है। यह पूरे...

राजकाज-बेबाक बोल: लाल निशान

वाम आंदोलनों का लोकप्रिय नारा रहा है- ‘लालकिले पर लाल निशान मांग रहा है हिंदुस्तान’। इस नारे से लालकिले के प्रतीकात्मक महत्व को समझ...

राजकाज-कांग्रेस कथा-बेबाक बोल: विरोध और विरोधाभास

कभी सत्ता के खिलाफ बगावत का झंडा उठाने वाला बाद में सबसे पहले अपने खिलाफ उठी हर बागी आवाज को खत्म करना चाहता है।...

बेबाक बोल-राजकाज-कांग्रेस कथा: सत्ता और संत

जयप्रकाश नारायण की अगुआई में जनता के प्रतिरोध की आंधी इंदिरा गांधी महसूस कर रही थीं। उस समय चंद्रशेखर ने उन्हें जेपी की ताकत...

राजकाज-बेबाक बोल-कांग्रेस कथा: इसलिए सुनो ये कहानी

2014 में कांग्रेस एक ऐसी कथा बन गई जिससे हर तरह की प्रेरणा तसल्लीबख्श ली जा सकती है। राजनीति में क्या करना चाहिए और...

राजकाज-बेबाक बोल-कांग्रेस कथा 11: गरचे दकन में...

राष्ट्रीयता और हिंदुत्व के आधार पर भाजपा अपनी जिस राष्ट्रीय पहचान को बनाने में जुटी थी उसमें वह लगातार कामयाब होती दिख रही है।...

बेबाक बोल-राजकाज: किसानिस्तान

आज के समय में सबसे बड़ा निजी क्षेत्र कृषि ही है। नब्बे के दशक में जो निजीकरण का दौर चला उसने इस सबसे बड़े...

बेबाक बोल-कांग्रेस कथा: वाम से राम तक

बंगाल अपनी राजनीतिक हिंसा के कारण भी जाना जाता रहा है। आम चुनावों के मसले के साथ यहां राजनीतिक पहचान की लड़ाई भी अहम...

बेबाक बोल कांग्रेस कथा: मौका-ए-मात

कांग्रेस के साथ दो बड़ी दिक्कत दिख रही है। सवर्णों का वोट बैंक पूरी तरह से भाजपा में हस्तांतरित हो चुका है। ऐसे में...

कांग्रेस कथा: बिहार से बहिष्कार

केंद्र की सत्ता का ताला आज भी उत्तर प्रदेश और बिहार की चाबी से खुलता है। इन दोनों राज्यों की सीटें उस जादुई आंकड़े...

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