Mukesh Bhardwaj Bebak Bol: SIR विवाद के बीच मतदाता अधिकारों की लड़ाई तेज, दिल्ली में जनता का प्रदर्शन लोकतंत्र, चुनाव…
आज भारत में दो तरह के राजनीतिक दल हैं। जो सत्ता पक्ष के साथ हैं उन्हें किसी तरह की कोई…
पुरस्कार वापसी, साहित्यिक प्रतिरोध, 21 लाख के पुरस्कार और अखलाक-कलबुर्गी की याद के बहाने साहित्य, सत्ता और सार्वजनिक नैतिकता पर…
जीडीपी के आंकड़े पर बहस कोई नई बात नहीं है। जब तक आंकड़ों के गुलाबी रंग के बरक्स बढ़ती महंगाई…
सरकारी स्कूल, शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और रोजगार को लेकर बच्चों और अभिभावकों के सवाल अब राजनीति के केंद्र में…
‘राग दरबारी’ के रंगनाथ में पाठक प्रत्यक्ष प्रतिरोध नहीं पाते हैं। लेकिन उसकी नजर व्यवस्था के खोखलेपन को उजागर करती…
जंतर मंतर पर जुटे बच्चों और युवाओं ने शिक्षा, नागरिक अधिकार और व्यवस्था से जुड़े सवाल उठाए। 15 अगस्त के…
आज जब जेन-जी पीढ़ी भाजपा को चुनौती दे चुकी है तो सवाल है कि उसके सहयोगी दल क्यों चुप हैं?…
हर चीज का एक प्रतीकात्मक महत्त्व होता है। आखिर प्रधान का नायक की तरह स्वागत कर किस तरह का प्रतीक…
युवाओं के भविष्य के लिए कई युवा भूख हड़ताल पर बैठ गए। भूख हड़ताल पर बैठे आंदोलनकारियों का शरीर जैसे-जैसे…
जब ज्ञान के प्रतीक बुलडोजर से बदल दिए जाएं, तो जवाबदेही किसकी बचती है – नाकाम मंत्री की, या ध्वस्त…
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सादगी से संपन्नता की ओर जो गति थी, उसमें राम मंदिर का चढ़ावा चोरी का मामला…