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बेबाक बोलः संकल्प सिद्धि

न कहीं गोली चली न कहीं विस्फोट हुआ और अनुच्छेद 370 को इतिहास बना दिया गया। यह काम वहीं से हुआ जहां से होना चाहिए था, और वह है संसद। जनता के प्रतिनिधियों ने मिलकर पूरे देश को जश्न के माहौल में डुबो दिया। किसी के लिए होली थी, किसी के लिए दिवाली, किसी के लिए गुरुपर्व तो किसी के लिए ईद।

बेबाक बोल: गुरु हो गए शुरू!

2014 के लोकसभा चुनावों के बाद से ही कांग्रेस के लिए करो या मरो का नारा दिया जा रहा है। कांग्रेस की इन चुनौतियों पर विश्लेषण की भरमार है। लेकिन कांग्रेस नेता हर उस पैरोकार को शर्मिंदा कर रहे हैं जो भारतीय लोकतंत्र के लिए इस ऐतिहासिक राजनीतिक पार्टी को जरूरी मान रहे हैं। पंजाब एकमात्र ऐसा राज्य है जहां कांग्रेस मजबूती से शासन में है। लेकिन वहां के नेता तू-तू मैं-मैं कर पार्टी की पूरी फजीहत कराने पर तुले हैं। दिल्ली में शीला दीक्षित और पीसी चाको का टकराव देख कर लगता है कि इन्होंने तय कर लिया है कि हम स्वार्थों के लिए मरेंगे लेकिन पार्टी को जिंदा करने के लिए कुछ नहीं करेंगे। सेवा दल तो कांग्रेस में रहा नहीं, अब मेवा खाने वालों के मेले पर बेबाक बोल।

बेबाक बोल: जय हिंद (2019 : पाठ सात)

जब भारत में आम चुनाव घोषित होने वाले हैं, पक्ष-विपक्ष अपना दमखम दिखाने में जुटा है तभी दहशतगर्द सेना के काफिले पर हमला कर देते हैं। सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए। आतंकवादियों का मकसद ही होता है ऐसे खौफनाक तरीकों से देश को बेपटरी करना। महाशोक की इस घड़ी में पूरे देश ने एकजुट होकर दहशतगर्दों को जवाब दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आतंकी संगठन और उनके सरपरस्त बहुत बड़ी गलती कर गए हैं, इसके गुनाहगारों को उनके किए की सजा जरूर मिलेगी। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि वे सरकार के साथ हैं। हिंदुस्तान में किसानी की जमीन पर पैदा हुआ जवान जब सरहद पर जाता है तो उसका पूरे देश से नाता जुड़ जाता है। अपने बेटे की चिता को आग देने की तैयारी कर रहा हिंदुस्तानी पिता कहता है कि वह अपने दूसरे बेटे को भी सेना में भेजना चाहता है। शहीदों ने इस समय का पाठ यही दिया है कि हम एक साथ कहें- जय हिंद।

बेबाक बोल: 2019 : पाठ छह

2014 का छवि बोध बनाया गया था कि भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन का नतीजा है केंद्रीय सत्ता से यूपीए-2 की बेदखली। यह बेदखली इतनी बुरी थी कि संसद में कांग्रेस विपक्षी दल का दर्जा पाने लायक भी नहीं रही थी। आज पांच साल पूरे होते वक्त प्रियंका गांधी वाड्रा कांग्रेस महासचिव का पदभार ग्रहण करने के पहले अपने लाव-लश्कर के साथ भ्रष्टाचार के आरोपी पति को प्रवर्तन निदेशालय के दफ्तर छोड़ती हैं। वहीं मां, माटी और मानुष का नारा देने वालीं ममता बनर्जी को सारदा घोटाले के पीड़ितों से ज्यादा रॉबर्ट वाड्रा को इंसाफ दिलाने की चिंता होती है। भ्रष्टाचार के आरोपों पर पीड़ा के पत्ते खेल रही कांग्रेस की प्रवक्ता बेधड़क बोलती हैं कि सत्ता में आए तो तीन तलाक को अवैध बनाया गया कानून बदल दिया जाएगा। दिल्ली से लेकर कोलकाता तक लोकतंत्र और संविधान की परिभाषा बदल दी जाती है। वे लोग भी कोलकाता पुलिस अधिकारी से पूछताछ की अदालती इजाजत को नैतिक जीत बता रहे हैं जिनके पाले में सारदा घोटाले के आरोपी हैं। दोनों पक्षों के बदले पाठ पर बेबाक बोल।

बेबाक बोल- संविधान एक खोज, सत्ता का सत्य

फेडरिक नीत्शे ने लिखा है कि सत्य नहीं होते, सिर्फ व्याख्याएं होती हैं। वे एक जगह यह भी कहते हैं कि सभी चीजों की व्याख्या संभव है। किसी खास समय में जो व्याख्या प्रचलित होगी, उसका संबंध सत्ता से है, सत्य से नहीं।