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खाकी रही भावना जैसी

दिल्ली में ही हुए एक कार्यक्रम में पिछले साल फरवरी में सांप्रदायिक दंगे की शिकार महिला ने कहा-दंगाइयों ने मेरे सामने मेरे पति को मार कर खत्म कर दिया। वो डर के मारे घर में छिपा था, उन लोगों ने उसे मेरी आंखों के सामने मारा। दिल्ली पुलिस एक साल बाद भी मेरा बयान नहीं ले पाई है। मैं चश्मदीद हूं…।

बेबाक बोल- राजकाज- कांग्रेस कथाः एक समय की बात है

अब तक इंदिरा गांधी को निज के परिवार से मिली लोक की सत्ता पर अहंकार होने लगा था। उनका यह अहंकार टूटा 1972 में शिमला में हुए कांग्रेस कार्यसमित के चुनाव में।

बेबाक बोल-राजकाज-कांग्रेस कथा: शक और मात

दिल्ली की सीमाओं पर एक से दो डिग्री की कड़कड़ाती ठंड में जवान से लेकर बुजुर्ग किसान हौसले का अलाव तेज कर रहे थे तो कांग्रेस के खेमे की तरफ ‘राहुल कहां हैं’ का आलाप शुरू हो गया।

बेबाक बोल- कांग्रेस कथा: आगे बंगाल की खाड़ी

ममता बनर्जी जुझारू नेता हैं और वो अपनी जमीन बचाए रखने की पूरी कोशिश करेंगी और भाजपा वहां के हिंदी भाषी प्रदेशों में अपनी पैठ बना चुकी है। ममता बनर्जी ने जिस परिवर्तन को वाम की ओर मोड़ा था आज भाजपा ‘खोए गौरव’ के नारे से उसे तृणमूल की ओर मोड़ चुकी है।

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