bad loans

देश के आर्थि‍क माहौल पर अब दो निजी बैंकों ने जताई चिंता, कहा- मंदी से बढ़ी हमारी मुश्‍क‍िल

निजी क्षेत्र के तीसरे ‘कोटक महिंद्रा बैंक लिमिटेड’ और छठे बड़े बैंक ‘एक्सिस बैंक लिमिटेड’ आर्थिक मंदी के बीच बैड लोन के चलते दबाव में हैं।

SBI ने ठंडे बस्ते में डाला 76000 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज! RTI में हुआ खुलासा

आमतौर पर बैंक की तरफ से जो लोन वसूल नहीं किया जा सकता है उसे राइट ऑफ कर दिया जाता है। इसका उद्देश्य बैलेंसशीट को दुरुस्त करना होता है। राइट ऑफ करने से लोन वसूली की प्रक्रिया रुकती नहीं है।

नरेंद्र मोदी की महत्‍वाकांक्षी Mudra स्कीम से बढ़ रहा NPA! वित्त मंत्रालय ने बैंकों को दिया रिव्यू का आदेश

एक सूत्र ने बताया- सरकारी बैंक मुद्रा योजना के हर पहलुओं की समीक्षा कर रहे हैं, जिसमें भौगोलिक पहुंच, बैड लोन और बेहतर फीचर्स की जरूरत के साथ लाभार्थियों को और अच्छी एक्सेस सरीखी चीजें शामिल हैं।

Indian Economy को फिर लगेगा तगड़ा झटका, लौट सकता है लोन डूबने का दौर?

बैंकों का एनपीए (Non Performing Asset) बीते साल मार्च, 2018 में 11.7 प्रतिशत था, जो कि मौजूदा वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में घटकर 9.6 प्रतिशत रह गया था।

कृषि लोन से बदहाल हुआ यह सरकारी बैंक, एक ही साल में 4,784 करोड़ रुपये का घाटा

बीओएम कृषि लोन की वजह से लगभग बदहाल हो चुका है। बैंक ने एक ही साल में 4,784 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज किया है।

बैड लोन: 10 साल में 7 लाख करोड़ का कर्ज ठंडे बस्ते में, 80% मोदी सरकार में राइट ऑफ हुए

आरबीआई के आंकड़ों से खुलासा हुआ है कि बीते 10 साल में राइट ऑफ किए गए अधिकतर लोन का 80 फीसदी हिस्सा आखिरी 5 साल यानी अप्रैल 2014 के बाद किया गया है।

10 बड़ी आर्थिक शक्तियों में खराब हुआ भारत का नाम, बैड लोन्‍स के मामले में सबसे घटिया देश बना

बैड लोन के मामले में भारत ने इटली को भी पीछे छोड़ दिया है। 10 आर्थिक महाशक्तियों में भारत बैड लोन को लेकर सबसे घटिया देश बन चुका है।

रिपोर्टः बैंकों ने 3.5 लाख करोड़ के कॉरपोरेट लोन को अब तक घोषित नहीं किया NPA

करीब 3.5 लाख करोड़ रुपये या 3.9 प्रतिशत दबाव वाले कॉरपोरेट कर्ज को बैंकों के खातों में अभी तक ‘पहचान’ नहीं दी गई है और इसमें से 40 प्रतिशत के सितंबर, 2020 तक डूबा कर्ज बनने की संभावना है।

बैंकों की हालत सुधारने के लिए पैनल बनाएगी मोदी सरकार

भारत 121 बिलियन डॉलर के कर्ज पर बैठा है जिसमें से 100 बिलियन तो बैंकों के जरिए दिया गया है।

बैंकों का 4 लाख करोड़ रुपए का कर्ज डूबा

निवेशकों की ओर से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के शेयरों में लगाए गए हर सौ रुपए पर 150 रुपए के डूबे कर्ज या गैर निष्पादित आस्तियों (एनपीए) का बोझ है।