air pollution in delhi

संपादकीयः प्रदूषण की चादर

पिछले कुछ दिनों से दिल्ली में तेज हवा की वजह से पारा में तेज गिरावट तो आई और उससे ठंड की तस्वीर और बिगड़ी, मगर उससे हवा के साफ होने की भी गुंजाइश बनी थी।

पहाड़ों में बर्फबारी से ठिठुरेंगे मैदान, दिल्ली में लगातार तीसरे दिन पांच डिग्री सेल्सियस से कम रहा तापमान

उत्तर प्रदेश में भी शीतलहर चलने से ठंड का प्रकोप बढ़ा, कश्मीर घाटी, हिमाचल और उत्तराखंड के कई इलाकों में तापमान शून्य से नीचे हो गया है।

दिल्ली की समस्याओं का हल साझा प्रयास से

देश की राजधानी दिल्ली कोरोना और प्रदूषण से जूझ रही है। कोरोना की तीसरी लहर ने दिल्ली को झटका दिया है। कई दूसरे राज्यों की देखा-देखी स्कूल कॉलेज खोलने के फैसले से दिल्ली सरकार को पीछे हटना पड़ा। फिर से मार्च-अप्रैल वाली सख्ती भी करनी पड़ी।

चौपाल: जलवायु के आयाम

वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन और वातावरण के तापमान में हो रही वृद्धि मानवीय सभ्यता के इतिहास की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। पेरिस जलवायु समझौता इस समस्या के कारकों की पहचान करने और उससे निपटने के लिए एक व्यापक रूपरेखा प्रस्तुत करता है।

संपादकीय: प्रदूषण की आग

दिल्ली में गाजीपुर, ओखला और भलस्वा सहित कुछ जगहों पर शहर का अवशिष्ट डालने की जगहें निर्धारित की गई है। किसी भी कचरे के ढेर से प्रदूषण होना आम बात है। सवाल है कि अगर सरकार ने अवशिष्ट डालने की जगहें निर्धारित की हैं, तो उसके प्रदूषित होने या आग लगने जैसी स्थितियों का सामना करने के लिए क्या उपाय किए गए हैं! निश्चित रूप से दस्तावेजों में इससे संबंधित नियम-कायदे तय किए गए होंगे।

राजनीति: प्रदूषण और सुशासन

देश में प्रदूषण को रोकने को लेकर नियमों की कमी नहीं है, पर अमल में ला पाना तब संभव होगा जब सहभागी दृष्टिकोण और प्राकृतिक पर्यावरण के साथ दो तरफा भूमिका निभाई जाएगी और ऐसा करना और करवाना सुशासन भरा कदम कहा जाएगा। सुशासन एक गंभीर चेतना और चिंता है जो नागरिक को न केवल विकास देता है, बल्कि समस्याओं के प्रति समावेषी दृष्टिकोण भी बांटता है।

चौपाल: प्रदूषण पर्व

कुछ समय पहले यह खबर चर्चा में थी कि इस बार रिकॉर्ड तोड़ दोपहिया और चारपहिया वाहनों की बिक्री हुई। अब ये वाहन कोई घर में सजा कर रखने के तो हैं नहीं, सड़कों पर दौड़ेंगे, प्रदूषण बढ़ाएंगे। फिर प्रदूषण बढ़ेगा तो हम पराली का रोना-धोना शुरू कर देंगे, जो पराली निर्धारित समय पर केवल महीने या पंद्रह दिन ही धुआं फैलाती है। ये वाहन तो रोज ही अपना धुआं उगल कर प्रदूषण बढ़ाएंगे।

प्रदूषण से लेकर कोरोना तक, लापरवाही के लिए कौन है जिम्मेदार?

Fire Crackers Ban: पटाखे हों या अन्य पाबंदियां, इन पर अमल जनता को ही सुनिश्चित करना होगा। ऐसा न होने पर पूरे समाज को बड़े कष्ट व संकटों के लिए तैयार रहना होगा

चौपाल: प्रदूषण का कठघरा

सरकारें किसानों को उनकी फसलों की उत्पादन लागत के अनुसार कीमत न देकर प्रतिदिन किसानों की खुदकुशी के अलावा अब अपने पालित डाटा सर्वेक्षण कार्यालयों के मिथ्या सर्वेक्षणों और किसानों के खिलाफ मनमाफिक फैसलों के जरिए प्रदूषण का मुख्य कारण परालीजनित प्रदूषण को बताने में लगी हैं। प्रदूषण के असली कारकों को नजरअंदाज कर सारा दोष किसानों के सिर पर मढ़ कर क्या हासिल कर लिया जाएगा? सवाल यह भी है कि देश में साठ फीसद तक रोजगार देनेवाला कृषि क्षेत्र और अन्नदाता किसानों को पराली को मुद्दा बना कर प्रदूषण का खलनायक बनाने का खेल किसके हित में चल रहा है!

चौपाल: दिल्ली की दशा

राज्य सरकारें और केंद्र सरकार एक दूसरे पर सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप लगा रही हैं। कभी आॅड-इवन, कभी रेड लाइट पर गाड़ी बंद और कभी पानी के छिड़काव की बातें करके सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं जिससे हालात सुधरें। यथा राजा, तथा प्रजा की कहावत भी यहां लागू होती है।

दुनिया मेरे आगे: धुआं-धुआं अंतर्दृष्टि

पिछले दिनों देश की राजधानी दिल्ली दुनिया की सबसे दूषित राजधानी के तौर पर घोषित हो चुकी है। चारों ओर धुएं और धुंध के गुबार ने सांस लेना भी मुश्किल कर दिया है। यही हाल हमारे दूसरे बड़े शहरों का भी हो गया है। अफसोस यह है कि यह हालत स्वच्छता के नारे के बरक्स खड़ी होती जा रही है।

संपादकीय: प्रदूषण के विरुद्ध

कभी जरूरत के नाम पर तो कभी परंपरा के नाम पर कुछ ऐसी गतिविधियों के प्रति नरमी बरती जाती है, जो हवा को सांस लेने तक के लिहाज से खतरनाक बनाने के लिए जिम्मेदार होती हैं। यही वजह है कि इस बार राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण यानी एनजीटी ने देश के अठारह राज्यों की सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी करके पूछा है कि सिर पर खड़ी प्रदूषण की गहराती चुनौती का सामना करने के लिए वे क्या कर रही हैं।

राजनीति: जहरीली हवा से बढ़ते संकट

यह दुर्भाग्य ही है कि हम अब तक ऐसी ठोस रणनीति बनाने और कदम उठा पाने में नाकाम रहे हैं जो प्रदूषण से मुक्ति दिला सकें। इसीलिए प्रदूषण से निपटने की सरकार की फौरी योजनाओं का कोई सकारात्मक नतीजा सामने नहीं आता। प्रदूषण की समस्या को लेकर लोगों के भीतर जागरूकता
की भी भारी कमी है।

दिल्ली-NCR प्रदूषणः केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से किया कानून का वादा, लोकुर कमिटी सस्पेंड

सुप्रीम कोर्ट ने पराली की घटनाओं पर निगरानी रखने के लिए बनाई गई लोकुर कमिटी को निरस्त कर दिया है। सरकार की तरफ से पेश तुषार मेहता ने कहा था कि इस मामले में एक दूसरी कमिटी बनाने का प्लान है। चीफ जस्टिस ने इस फैसले का स्वागत किया।

‘सफर’ ने दी चेतावनी: अगले दो दिन तक राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की हवा रहेगी जहरीली: पराली के कारण बिगड़ेगी हालत

दिल्ली में सोमवार सुबह के समय वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआइ) 232 दर्ज किया गया। इस दिन शाम तक चांदनी चौक में हवा बहुत (342) खराब दर्ज की गई। नोएडा का भी यही हाल था, जहां एक्यूआइ 300 के पार रहा।

‘पराली जलाने से 4% प्रदूषण ही होता है, तो दिल्ली में 15 दिन में क्यों खराब हुई हवा’, जावड़ेकर के दावे पर केजरीवाल का पलटवार

दिल्ली में आज सुबह 11.10 बजे एक्यूआई 321 पहुंच गया। इसके बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने लोगों से प्रदूषण कम करने में सरकार का साथ देने की अपील की है।

दिल्ली में तापमान गिरने और प्रदूषण बढ़ने से लौट सकता है कोरोना का खतरा, लंबे समय तक दूषित हवा में रहने वालों को सबसे ज्यादा नुकसान

इससे पहले कुछ स्टडी में भी खुलासा हुआ है कि प्रदूषण के माहौल में रहने वाले लोगों पर कोरोना से मौत का खतरा सबसे ज्यादा है।

दिल्ली में प्रदूषण पर AAP सरकार सख्त, अब NDMC पर लगाएगी 20 लाख का जुर्माना- बोले मंत्री गोपाल राय

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की वायु गुणवत्ता प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के अनुसार, पंजाब, हरियाणा और पाकिस्तान के नजदीकी क्षेत्रों में खेतों में पराली जलाने की घटना में वृद्धि भी दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता को प्रभावित करने वाली है।

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