Agriculture Bills

भारत को US सांसदों की सलाह- लोकतंत्र के मानक बनाए रखें, इंटरनेट बंद किए बिना शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने दें

वैसे, किसान प्रदर्शन स्थलों पर इंटरनेट कटौती के मसले पर चार फरवरी को अमेरिकी प्रशासन ने टिप्पणी की थी। कहा था, सूचना की निर्लिप्त पहुंच (इंटरनेट शामिल) अभिव्यक्ति की आजादी का मूल अधिकार है और संपन्न लोकतंत्र की बानगी है।

लंबा खिंचेगा आंदोलन? 48वें दिन बोले किसान- न मानी सरकार, तो लोहड़ी क्या होली भी यहीं मनाएंगे

वहीं, भारतीय किसान यूनियन (BKU) के राजवीर सिंह जादौन ने कहा, “हम कोर्ट से अपेक्षा करेंगे कि कानूनों को खत्म करने का आदेश दे और MSP पर कानून बने।”

बीजेपी विधायक ने भी किया मोदी सरकार के कृषि क़ानूनों को ख़ारिज करने के प्रस्ताव का समर्थन, केरल विधानसभा में सर्वसम्मति से पास

बीजेपी विधायक राजगोपाल ने कहा, “मैंने प्रस्ताव का समर्थन किया और केंद्र सरकार को तीनों कृषि कानूनों को वापस लेना चाहिए।” उन्होंने कहा कि “वह सदन की आम राय से सहमत हैं।”

किसान अड़े, केंद्र ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर समिति का प्रस्ताव दोहराया

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, रेलवे, वाणिज्य और खाद्य मंत्री पीयूष गोयल एवं वाणिज्य राज्य मंत्री सोमप्रकाश ने दिल्ली के विज्ञान भवन में 41 किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ सातवें दौर की वार्ता की।

भोज: केंद्रीय मंत्रियों ने खाया किसानों का नमक, विज्ञान भवन में पड़ा रहा सरकारी भोजन; हर वार्ता में अपना भोजन लेकर पहुंचते रहे किसान नेता

किसान नेताओं के मुताबिक, इससे पहले भी लंगर में मंत्रियों को आमंत्रित किया जाता रहा। बुधवार को पहली बार मंत्रियों ने निमंत्रण स्वीकार किया। विज्ञान भवन में वार्ता आरंभ होने के करीब दो घंटे बाद बैठक स्थल के पास एक वैन से किसानों के लिए लंगर पहुंचाया गया।

किसानों ने 1500 मोबाइल टावर क्षतिग्रस्त किए, 12000 वर्ग किमी से अधिक क्षेत्र में दूरसंचार सेवा बाधित

किसानों ने जलंधर सहित राज्य के अन्य शहरों में स्थापित जियो के 90 मोबाइल टावर को निशाना बनाया। मुख्यमंत्री ने पंजाब पुलिस को टावरों को क्षतिग्रस्त करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

आज वार्ता : दो मांगों पर अड़े किसान; कानून हों रद्द, मिले न्यूनतम समर्थन मूल्य

प्रदर्शनकारी किसान संगठनों ने मंगलवार को केंद्र सरकार को पत्र भेज बातचीत के लिए अपना एजंडा स्पष्ट किया। साथ ही बुधवार को सरकार के साथ होने वाली बातचीत के मद्देनजर अपना प्रस्तावित ट्रैक्टर मार्च गुरुवार तक स्थगित कर दिया है।

मोदी जी की नीति किसान विरोधी नहीं हो सकती, मेरे पास तो एक इंच जमीन भी नहीं- बोले बाबा रामदेव

किसानों ने सरकार के साथ बातचीत से पहले एमएसपी को कानूनी गारंटी देने, खेत कानूनों को निरस्त करने, किसानों के खिलाफ सभी मामले रद्द करने और बिजली क्षेत्र में सब्सिडी में कटौती के लिए कोई अध्यादेश नहीं लाने की मांग रखी हैं।

आजतक डिबेट में कांग्रेस नेता बोले – हनुमान बेनीवाल ने विरोध किया तो उन्हें भी देशद्रोही की राह पर बता दिया, मिला ये जवाब

रोहन गुप्ता बोले,’ अब जैसे हनुमान बेनीवाल जी ने विरोध किया तो उनको देशद्रोही की राह पर चला दिया सुधांशु जी ने।’

वक्त की नब्जः असलियत को समझिए

किसानों में इतना आक्रोश और विरोध करने के लिए इतना उत्साह कहां से आया कि वे कड़ाके की ठंड में खुले आसमान के नीचे अपना विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं एक पूरे महीने से? यह सवाल अगर प्रधानमंत्री और उनके सलाहकार पूछते अपने आप से तो शायद समझ में आती उनको असलियत।

संपादकीयः आंदोलन और अड़चन

दरअसल, इस मसले पर दोनों तरफ से अपनी-अपनी लक्ष्मण रेखाएं खींच ली गई हैं, जिनके पार वे जाना नहीं चाहते। किसानों की शर्त है कि सरकार पहले कानून समाप्त करने की घोषणा करे, तभी आगे की बातचीत का सिलसिला शुरू होगा। सरकार कह रही है कि किसान इस जिद को छोड़ कर बातचीत करना चाहें, तो वह किसी भी समय बात करने को तैयार है।

अन्नदाताओं का संघर्ष: किसानों को ठंड से बचा रहे खास तरह के तंबू

फिलहाल 20 तंबू खरीदे गए हैं। जरूरत के हिसाब से और खरीदे जाएंगे। अलाव की व्यवस्था के साथ-साथ गद्दे और रजाई की व्यवस्था ठंड को देखते हुए पहले की गई थी, लेकिन ओस से बचाव नहीं हो पा रहा था।

हरियाणा के डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला का विरोध, किसानों ने खोद डाला हेलिपैड

किसानों के विरोध के मद्देनजर हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला का उनके निर्वाचन क्षेत्र उचाना का दौरा रद्द कर दिया गया।

वार्ता में शामिल हो कृषि कानूनों को रद्द करना, सरकार के न्योते के जवाब में किसान नेताओं ने कहा

संयुक्त किसान मोर्चे के वरिष्ठ नेता शिवकुमार कक्का ने चिट्ठी पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि सरकार हमारी मांगों को लेकर गंभीर नहीं है और वह रोज पत्र लिख रही है।

दुनिया मेरे आगे: सहयोग का समाज

यह किस्सा किसी एक किसान का नहीं, पूरे देश भर के किसानों का है। आए दिन यहां अलग-अलग कारणों से कई अर्थियां उठती हैं। अंतर केवल इतना होता है कि हर कोई उस किसान की तरह पूर्व तैयारी नहीं कर पाता, जो जाते-जाते अपनी अर्थी का सामान खुद खरीद कर अपने परिवार को दे जाए।

संघर्ष: चिकित्सा शिविरों से मिल रही किसान आंदोलन को राहत

गाजीपुर बॉर्डर पर उत्तर प्रदेश मेडिकल एसोसिएशन की ओर से शिविर लगाया गया है, जहां पर चार डॉक्टर पूरे दिन भर मरीजों को इलाज करते हैं।

किसानों का आंदोलन: दिल्ली की सीमाओं पर यातायात में परिवर्तन

यातायात पुलिस ने कहा कि दिल्ली आने वाले लोग आनंद विहार, डीएनडी, अप्सरा और भोपुरा बॉर्डर का वैकल्पिक मार्ग अपना सकते हैं। यातायात पुलिस ने ट्वीट किया कि टिकरी और धनसा बॉर्डर यातायात के लिए बंद है।

बाखबर: जुमलों के बीच आंदोलन

ये किसान कुछ अलग हैं। वे अपने आंदोलन की हर खबर और अपने धरने के असर के प्रति भी बाखबर हैं। ये न प्रेमचंद के किसान हैं और न राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त के किसान हैं। ये नए ‘उत्तर हरित क्रांति’ के खाते-पीते और राजनीतिक रूप से जागरूक किसान हैं, जिनके पास सरकारी प्रवक्ताओं की हर बात का एक ही जवाब है : पहले कानून रद्द करो, फिर बात करेंगे!

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