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असम: उग्रवादियों ने सशस्त्र सीमा बल पर किया हमला

एनडीएफबी-सोंगबिजित उग्रवादियों ने सशस्त्र सीमा बल के कर्मियों पर हथगोलों से हमला किया और भारत-भूटान सीमा के निकट स्थित असम के चिरांग जिले में शुक्रवार को दोनों के बीच मुठभेड़ हुई। पुलिस ने बताया कि शुक्रवार को हुई इन घटनाओं में कोई घायल नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि बिजनी सब-डिविजन के फोइसाना बाजार इलाके […]
Author December 27, 2014 10:08 am
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी चिरांग ने आरोप लगाया कि ‘असम सरकार की असफलता के कारण हिंसा हो रही है।’ (फ़ोटो-पीटीआई)

एनडीएफबी-सोंगबिजित उग्रवादियों ने सशस्त्र सीमा बल के कर्मियों पर हथगोलों से हमला किया और भारत-भूटान सीमा के निकट स्थित असम के चिरांग जिले में शुक्रवार को दोनों के बीच मुठभेड़ हुई। पुलिस ने बताया कि शुक्रवार को हुई इन घटनाओं में कोई घायल नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि बिजनी सब-डिविजन के फोइसाना बाजार इलाके में उग्रवादियों ने सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी)के गश्ती दल पर हथगोले फेंके और पास के घने जंगलों में भागने से पहले उनपर गोलियां भी चलाईं।

पास स्थित पनबारी शिविर से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के कर्मियों ने वहां तुरंत पहुंचकर एसएसबी के साथ उग्रवादियों की संयुक्त तलाशी अभियान शुरू कर दिया है।
इस बीच झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी चिरांग और पड़ोसी क्योंझर जिले में एनडीएफबी-एस की हत्याओं से प्रभावित लोगों से मिलने शुक्रवार को यहां पहुंचे।
संवाददाताओं से बातचीत में मरांडी ने आरोप लगाया कि ‘असम सरकार की असफलता के कारण हिंसा हो रही है।’ लोगों की सुरक्षा और सेना द्वारा एनडीएफबी-एस की गतिविधियों पर लगाम लगाने की मांग करते हुए उन्होंने राहत शिविरों में शरण लिए हुए हिंसा पीड़ितों को भोजन, कपड़े, दवाएं और अन्य आवश्यक वस्तुएं मुहैया कराने को कहा।

राज्य कल्याण मंत्री एकोल बोरोआ ने भी शुक्रवार को जिले का दौरा किया और राहत शिविरों में रह रहे लोगों को समुचित भोजन और अन्य आवश्यक वस्तुएं मुहैया कराने का आश्वासन दिया। असम के क्योंझर, सोनीतपुर और चिरांग जिलों में 23 दिसंबर से अभी तक एनडीएफबी-एस के हमलों व जवाबी कार्रवाई में कम से कम 81 लोगों की जान गई है।

उधर, सेना असम के हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में गहन निगरानी अभियान चला रही है । एक रक्षा प्रवक्ता ने बताया,‘सभी हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति सामान्य बनाने के लिए हमने उग्रवाद-विरोधी अभियान और गहन निगरानी अभियान शुरू कर दिया है।’ प्रवक्ता ने कहा कि सेना ने अभी ‘आपरेशन आल आउट’ के कूट नाम से कोई ताजा अभियान शुरू नहीं किया है जैसा इलेक्ट्रानिक मीडिया के एक वर्ग द्वारा कहा जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘कमांडर्स जमीनी स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं और स्थिति से निपटने के लिए गहन समीक्षा की जा रही हैं।’ उन्होंने बताया कि सेना के विमानों द्वारा पूरे क्षेत्र की हवाई निगरानी भी की जा रही है। सेना असैन्य प्रशासन को पूरा समर्थन दे रही है ताकि प्रभावित लोगों के बीच विश्वास बहाली की जा सके और शांति स्थापित किया जा सके।

इस बीच असम के चार जिलों में हो रही हिंसा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 81 हो गई है । आज सोनितपुर और चिरांग में हमलों में घायल हुए दो और लोगों की मौत हो गई जबकि क्योंझर से एक शव मिला है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकार के सीइओ पीके तिवारी ने बताया कि क्योंझर, चिरांग, सोनितपुर और उदलगिरी-इन चारोंं हिंसा प्रभावित जिलों में करीब 72,675 लोगों ने 61 राहत शिविरों में शरण ली है। क्योंझर जिले के 36 राहत शिविरों में करीब 40,000 लोग रह रहे हैं जबकि चिरांग के 11 शिविरों में 14,920 लोगों ने शरण ली है। इसी तरह सोनितपुर के नौ राहत शिविरों में 9,650 और उदलगिरी के पांच शिविरों में 8,105 लोग रह रहे हैं। विभिन्न संगठनों की ओर से आज आयोजित 12 घंटे के असम बंद से सामान्य दिनचर्या प्रभावित हुई । हालांकि राज्य में कहीं से किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है ।

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