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पीओके को पाकिस्तान का बताने पर फारुख अब्दुल्ला पर भड़का ट्विटर, लोगों ने कहा- इन्हें पाकिस्तान भेजो

फारुख अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू कश्मीर का जो हिस्सा पाकिस्तान के साथ है वह पाकिस्तान का है और जो हिस्सा भारत के साथ है, वह भारत का है। यह नहीं बदलेगा।
जम्मू एवं कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला। (File Photo)

कश्मीरी नेता फारूक अब्दुल्ला का पीओके को लेकर दिया गया विवादास्पद बयान ट्विटर पर लोगों के गुस्से का कारण बन गया।  फारूक अब्दुल्ला ने कहा था कि स्वतंत्र कश्मीर की बात ‘गलत’ है क्योंकि घाटी चारों ओर से भूआबद्ध है और तीन परमाणु शक्तियों – चीन, पाकिस्तान और भारत से घिरी है।  अब्दुल्ला ने यह दावा भी किया कि पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (पीओके) पाकिस्तान का है और यह चीज नहीं बदलेगी, चाहे भारत और पाकिस्तान एक दूसरे के खिलाफ कितने ही युद्ध क्यों ना लड़ लें।  फारुख ने पार्टी मुख्यालय में एक कार्यक्रम से इतर संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैं यह कह रहा हूं कि यहां आजादी (आजाद कश्मीर) जैसा कोई मुद्दा नहीं है। हम चारों ओर से जमीन से घिरे हुए हैं। इसके अलावा, एक ओर चीन है, दूसरी ओर पाकिस्तान है जबकि तीसरी ओर भारत है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इन तीनों के पास परमाणु बम हैं।

हमारे पास अल्लाह के नाम के अलावा और कुछ नहीं है। आजादी के बारे में बात करने वाले ये (अलगाववादी) गलत बात कर रहे हैं।’’ स्वायतत्ता की मांग पर उन्होंने कहा कि राज्य ने भारत में शामिल होने का फैसला किया, लेकिन देश ने कश्मीर के अवाम से विश्वासघात किया और उनसे अच्छा सलूक नहीं किया। ‘हमें यह समझना चाहिए कि एक फैसला हुआ था (विलय का), लेकिन भारत ने हमसे अच्छा सलूक नहीं किया। भारत ने विश्वासघात किया। उन्होंने उस प्यार को नहीं समझा, जिसके साथ हमने उनके साथ जाने का विकल्प चुना था। कश्मीर की मौजूदा स्थिति की यही वजह है।  मैं सीधे शब्दों में कहता हूं – न सिर्फ भारत के लोगों को, बल्कि दुनिया से भी – जम्मू कश्मीर का जो हिस्सा पाकिस्तान के साथ है वह पाकिस्तान का है और जो हिस्सा भारत के साथ है, वह भारत का है। यह नहीं बदलेगा। उन्हें लड़ने दीजिए, जितनी लड़ाइयां लड़ना चाहते हैं। यह नहीं बदलेगा।

फारुख अब्दुल्ला का ये बयान ट्विटर पर लोगों को पसंद नहीं आया। ट्वविटर पर लोगों ने उन्हें पाकिस्तान परस्त करार दे दिया। कुछ ने उन्हें पाकिस्तान भेजने की मांग कर दी। वहीं एक यूजर्स ने फारुख अब्दुल्ला के बयान को खतरे की घंटी बताते हुए भारत को 2019 से पहले हिन्दुराष्ट्र घोषित करने की मांग तक कर डाली।

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