March 25, 2017

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गांधी-शास्‍त्री जयंती: इन संदेशों, तस्‍वीरों से दीजिए महान नेताओं को श्रद्धांजलि, पढ़ि‍ए उनके मशहूर कथन

आज राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्‍त्री की जयंती है।

रविवार को विभिन्‍न कार्यक्रमों में दोनों नेताओं को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई और उनके द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलने का प्रण लिया गया।

आज (2 अक्‍टूबर) को राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्‍त्री की जयंती है। 2 अक्‍टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में जन्‍मे मोहनदास करमचंद गांधी आगे चलकर भारतवासियों के लिए ‘बापू’ बन गए। वहीं ठीक 35 साल बाद, मुगलसराय में शास्‍त्री ने जन्‍म लिया जिन्‍हें देश ‘गुदड़ी का लाल’ कहकर याद करता है। देश की दो महान विभूतियों की जयंती पर देश भावविभोर है। रविवार को विभिन्‍न कार्यक्रमों में दोनों शीर्ष नेताओं को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई और उनके द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलने का प्रण लिया गया। राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने गांधी-शास्‍त्री को याद करते हुए उन्‍हें श्रद्धासुमन अर्पित किए हैं। रविवार सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजघाट पहुंचे और बापू को श्रद्धासुमन अर्पित किए। गांधी के समाधि स्‍थल ‘राजघाट’ पर उप राष्‍ट्रपति हामिद अंसारी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, वरिष्‍ठ भाजपा नेता लालकृष्‍ण आडवाणी, केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू, दि ल्‍ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और डिप्‍टी सीएम मनीष सिसोदिया तथा कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने श्रद्धासुमन अर्पित किए। वहीं लाल बहादुर शास्‍त्री को उन्‍हें श्रद्धांजलि देने के लिए केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू, दिल्‍ली के सीएम व डिप्‍टी सीएम विजयघाट पहुंचे।

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महात्‍मा गांधी का पूरा जीवन प्रेरणादायी है। उनके सिद्धांत विश्‍व के सभी देशों के नेताओं के आदर्श हैं, उन्‍होंने वैश्विक स्‍तर पर अहिंसक छवि वाले ऐसे नेता का तमगा हासिल किया जिसके भीतर गजब की सहनशीलता थी। देश के आजादी हासिल करने के अगले ही साल, 30 जनवरी, 1948 को नाथूराम गोडसे ने बिडला मंदिर में गांधीजी की गोली मारकर हत्‍या कर दी थी।

एक किसान के घर जन्‍मे शास्‍त्री देश के दूसरे प्रधानमंत्री बने। उन्‍हें मृदुभाषी, मितव्‍ययी और किसानों का हितैषी होने के लिए सदैव सम्‍मान की दृष्टि से देखा जाता है। उन्‍होंने ही नारा दिया था- ‘जय जवान, जय किसान’। दुर्भाग्‍य से पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब ख़ान के साथ युद्धविराम के समझौते पर हस्ताक्षर करने के कुछ घण्टे बाद 11 जनवरी 1966 की रात में ही उनकी मृत्यु हो गयी।

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इन दो महापुरुषों की जयंती पर हम लाएं हैं उनके कुछ कथन व तस्‍वीरें, जिन्‍हें याद कर आप भारत की इन विभूतियों को श्रद्धांजलि अर्पित कर सकते हैं।

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First Published on October 2, 2016 9:56 am

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