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शशि थरूर से ट्वीट करने में हुई स्पेलिंग मिस्टेक, डिक्शनरी लेकर मतलब ढूंढने जुट गए यूजर्स, बाद में किया ट्रोल

'पद्मावती' को लेकर मचे बवाल पर अपनी राय जाहीर करते हुए शशि थरूर ने ट्वीट किया था, जिसमें उनसे टाइपिंग मिस्टेक हो गई थी।
कांग्रेस नेता शशि थरूर (Source: File Photo)

कांग्रेस नेता शशि थरूर की अंग्रेजी के हाई लेवल के बारे में हर कोई जानता है। थरूर अपने ट्वीट में अंग्रेजी के एक फ्रेज (Exasperating farrago of distortions) के इस्तेमाल को लेकर मई में चर्चा में आए थे। उनके इस फ्रेज का मतलब जानने के लिए कई लोगों को डिक्शनरी का सहारा लेना पड़ा था। दरअसल इस फ्रेज के द्वारा थरूर का कहने का मतलब था- ‘ये दावे तोड़-मरोड़ कर पेश किए गए हैं’, लेकिन कठिन शब्दों के इस्तेमाल की वजह से लोग उनके मतलब को समझ नहीं पाए थे। अब एक बार फिर थरूर अपनी अंग्रेजी को लेकर चर्चा में हैं।

दरअसल उन्होंने फिल्म ‘पद्मावती’ को लेकर मचे बवाल पर अपनी राय जाहीर करते हुए ट्वीट किया था, जिसमें उनसे टाइपिंग मिस्टेक हो गई थी। इस वजह से एक शब्द गलत लिखा गया था। थरूर ने अपने ट्वीट के आखिर में ‘thang Hoot hats’ लिखा था, जिसे देखने के बाद ट्विटर यूजर्स एक बार फिर चकरा गए। लोगों के मन में इस नए शब्द को लेकर सवाल खड़ा होने लगा था। हालांकि बाद में थरूर ने इसे सुधारते हुए दूसरा ट्वीट कर जानकारी दी कि वे घूंघट (than goonghats) लिखना चाह रहे थे लेकिन ऑटो करेक्ट के कारण Hoot hats लिखा गया।

थरूर के स्पेलिंग मिस्टेक वाले ट्वीट को लेकर उन्हें सोशल मीडिया के एक धड़े द्वारा काफी ट्रोल किया गया। लोगों ने कहा कि जब उन्होंने थरूर के ट्वीट में Hoot hats पढ़ा तो डिक्शनरी में इस शब्द का मतलब खोजने लगे। कुछ लोगों ने कहा, ‘मैं thang का मतलब खोजने लगा सिर्फ इसलिए क्योंकि ये ट्वीट आपने किया था।

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आपको बता दें कि फिल्मकार संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावती’ की आलोचना करने वाले लोगों पर निशाना साधते हुए कांग्रेस नेता शशि थरूर ने सोमवार को कहा था कि फिल्म पर विवाद राजस्थानी महिलाओं की स्थिति पर ध्यान देने का एक मौका है और शिक्षा ‘घूंघट’ या सिर पर पर्दे से ज्यादा महत्वपूर्ण है। थरूर ने ट्वीट कर कहा, “‘पद्मावती’ विवाद आज राजस्थानी महिलाओं की स्थिति पर ध्यान केंद्रित करने का एक मौका है, न कि छह शताब्दी पुरानी महारानियों पर ध्यान केंद्रित करने का। राजस्थान की महिला साक्षरता दर सबसे कम है। शिक्षा ‘घूंघट’ से ज्यादा जरूरी है।”

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