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वीडियो: रोहिंग्या हिंदू महिला ने सुनाई आपबीती- पति को मारकर मुझे जबरन मुसलमान बनाया

न्यूज चैनल को राहत कैंप में रह रही हिन्दु महिलाओं ने बताया कि कैसे रोहिंग्या चरमपंथी मसुलमानों के गुट ने लाइन में लगाकर पुरुषों की हत्या की और उन्हें मांस खिलाकर जबरल इस्लाम स्वीकार कराया।
Author September 25, 2017 23:50 pm
रोहिंग्या हिन्दू महिला अपनी आपबीती सुनाती हुई।

देश में रोहिंग्या मुसलमानों के शरण देने के लेकर विवाद अभी थमा नहीं है कि रोहिंग्या हिन्दुओं पर रोहिंग्या चरमपंथी मुसलमानों द्वारा कुए गए जुल्म धीरे धीरे सामने आ रहे हैं। म्यांमार आर्मी द्वारा करीब 28 हिन्दुओं की सामूहिक कब्र मिलने की बात कहने के एक दिन बाद हिन्दी न्यूज चैनल आजतक ने बांग्लादेश के रोहिंग्या राहत कैंप में पहुंचकर वहां रह रहे लोगों से बात की। कैंप में रह रहे हिन्दू समुदाय के लोगों से भी चैनल ने बात की है। विस्थापित हिन्दुओं ने एक एक करके चैनल को अपनी आपबीती सुनाई। किस तरह रोहिंग्या चरमपंथी मुसलमानों के गुटों द्वारा ने ना सिर्फ हिन्दुओं का नरसंहार किया गया बल्कि महिलाओं का बलात्कार कर उनका जबरदस्ती धर्मांतरण भी किया गया। एक हिन्दू महिला जो म्यांमार से भागकर शर्णार्थी कैंप में पहुंची है उसने चैनल को बताया है कि उसके पास पहनने के लिए सिर्फ एक जोड़ी साड़ी है लेकिन उसकी तीन साल की बच्ची के पास पहनने के लिए कपड़े तक नहीं है।

जबरदस्ती मुसलमान बनाई गई रिका उर्फ सादिया ने चैनल को बताया कि, ” अगस्त के आखिरी हफ्ते में उन्होंने हिन्दुओं के घर में घुसपैठ की और हमले किए। हमारे आदमियों के मोबाइल फोन छीन लिए गए और बांधकर बुरी तरह पीटा गया मेरे पति लोहार थे। मेरे सारे गहने ले लिए मुझे पीटने लगे सभी हिन्दुओं को पकड़कर एक पहाड़ी पर ले जाया गया और लाइन में लगाकर मार डाला गया। सिर्फ 8 महिलाओं को जिंदा रखा गया उन्होंने कहा तुम अब हमारे साथ रहोगी हमसे शादी हमारे पास उनके सामने सरेंडर करने के अलावा कोई उपाय नहीं था। धर्म परिवर्तन की बात माानने के अलावा हमारे पास कोई चारा नहीं बचा थी। वहीं से हमें बांग्लादेश के एक कैंप में ले जाया गया और धर्म परिवर्तन के नाम पर मीट खिलाया गया। इसकी जानकारी हमारे एक हिन्दू जानकार को लगी तो हम रोहिंग्या हिन्दुओं के कैंप में आज सके।”

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  1. S
    Shams Goolrez
    Sep 26, 2017 at 1:48 am
    क्यों भाई साम्प्रदायिकता फ़ैलाने का ठेका ले लिया है क्या ? प्रभाष जोशी साहब के ज़माने में जनसत्ता अच्छा अखबार हुआ करता था. अब क्या हुआ ?
    (1)(0)
    Reply
    सबरंग