ताज़ा खबर
 

मोदी सरकार पर निशाना साध टॉप ट्रेंड में आए एनडीटीवी इंडिया के रवीश कुमार, लोगों ने ऐसे किया समर्थन

रवीश कुमार ने शुक्रवार (4 नवंबर) को अपने प्राइम टाइम में राजनेताओं कि जगह दो मूक कलाकारों को बुलवाकर उनसे अभिनय करवाया।
एनडीटीवी इंडिया के रवीश कुमार

रवीश कुमार ने शुक्रवार (4 नवंबर) को अपने प्राइम टाइम में राजनेताओं कि जगह दो मूक कलाकारों को बुलवाकर उनसे अभिनय करवाया। रवीश ने ऐसा एनडीटीवी हिंदी पर लगे बैन का विरोध करने के लिए किया था। शो में रवीश ही बोलते हैं और दोनों मूक कलाकार इशारों-इशारों में भारत के राजनेताओं पर निशाना साधते रहते हैं। इस शो के बाद से ही ट्विटर पर #RavishKumar ट्रेंड होने लगा। इस ट्रेंड पर लोग रवीश के शो के लिए अपने विचार व्यक्त किए। किसी ने शो को अच्छा बताया तो किसी ने इसे ड्रामा भी करार दिया। लेकिन ज्यादातर ट्वीट रवीश की तारीफ वाले और एनडीटीवी पर लगे बैन को गलत बताने वालों के रहे। रवीश की तारीफ करते हुए किसी ने, ‘एक बिहारी, सब पे भारी’ कहा तो कोई उन्हें सबसे अच्छा पत्रकार बता रहा था। कई लोगों ने कहां कि खामोशी कभी-कभी तेज शोर से भी ज्यादा आवाज करती है। वहीं कोई रवीश को इस प्राइम टाइम के लिए सलाम भी कर रहा था। किसी ने यह भी कहा कि एनडीटीवी के बहाने सरकार रवीश कुमार पर निशाना साधना चाहती है।

गौरतलब है कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा गठित एक अंतर-मंत्रालय समिति की सिफारिश के बाद गुरुवार को एनडीटीवी इंडिया न्यूज चैनल को आदेश दिया गया कि वह एक दिन (9 नवंबर) के लिए प्रसारण रोके। समिति ने पठानकोट वायुसेना अड्डे पर इस साल जनवरी में हुए आतंकी हमले की कवरेज के संदर्भ में चैनल पर कार्रवाई की सिफारिश की थी।

इसपर एनडीटीवी इंडिया ने अपने बयान में कहा, ‘सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का आदेश प्राप्‍त हुआ है। बेहद आश्चर्य की बात है कि NDTV को इस तरीके से चुना गया। सभी समाचार चैनलों और अखबारों की कवरेज एक जैसी ही थी। वास्‍तविकता में NDTV की कवरेज विशेष रूप से संतुलित थी। आपातकाल के काले दिनों के बाद जब प्रेस को बेड़ियों से जकड़ दिया गया था, उसके बाद से NDTV पर इस तरह की कार्रवाई अपने आप में असाधारण घटना है।’

 

देखिए रवीश के शो के बाद कैसे-कैसे ट्वीट आए-

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. A
    Amit
    Nov 5, 2016 at 2:16 pm
    We love you Ravish Kumar.
    Reply
  2. D
    deepak pahlwan
    Nov 5, 2016 at 6:49 am
    तुम्हारे जैसे झूटों को ही बंद करना शुरू किया हैं , हो सकता हैं अगला नंबर हो .
    Reply
  3. A
    ashok kumar
    Nov 5, 2016 at 12:04 pm
    NDTV OOR BARKHADATT DESH VIRODHI
    Reply
  4. A
    azam
    Nov 5, 2016 at 6:32 am
    ravish kumar is great...
    Reply
  5. C
    Chaitanya Singh
    Nov 5, 2016 at 8:28 am
    काश ये बैन आप पर पाकिस्तान के आतंकवादियो की ायता के लिए न लगा होता .........तो हमें भी आप पर गर्व होता .....ऐसा क्यों है की आप का चैनल ज्यादातर देश द्रोहियो की वकालत करता दिखता है !या तो बचपन से देशद्रोह की परिभासा हमने गलत पड़ी या आपने नई बना ली !जो भी हो सोचिये गा....
    Reply
  6. K
    karan
    Nov 5, 2016 at 5:26 am
    अबी ो सिर्फ १० सूप्पोर्टर का कमेंट दिखाया है ? ऐसे जलील लोगो के साथ १ दिन नही पूरा लाइफ टाइम के लिए यह चैनल को बंद क्र देना chahie......हिम्मत है तू पूरा ट्विटर का कम्मेंट दिखा ..कुछ चमचो का nhi
    Reply
  7. गिरधारी लाल
    Nov 6, 2016 at 11:21 pm
    पठानकोट एयरबेस मै आई एस आई को जिस दिन बुलाया था सारा बंटा धार उसी दिन हो गया था।
    Reply
  8. S
    sufyan
    Nov 6, 2016 at 10:56 am
    i really appreciate Mr.Ravish kumar, he has guts to express what is right and what is wrong to the people of our country, we are ONLY COUNTRY IN THE WORLD where we have a diversity and different religion, we have been leaving peaceful and very few people who try to divide the people of our country in the name of religion,talaq,etc.. and it will never happen, in the end.... SAARE JAHAN SE ACHA HINDUSTAN HAMARA, HAM BUL BULE HAIN ISKE YE GULSITAN HAMARA,THANK YOU,,
    Reply
  9. N
    Narendra Barnwal
    Nov 5, 2016 at 10:18 pm
    chanakya se bada samajhdar to ravish kumar ho nahi sakta jinhone aaj se saikdo wars pehle kaha tha, dost ka dost dost hota, dost ka dusman dusman aur dusman ka dusman dost hota h, jiska saf udharan chin aur stan h aur desh ke andar cong and sare secular dal aur kalabajari patrakar aur journalist jo khul ke modi raj me nange ho chuke h. jo modi ke dusmani me itne andhe ho chuke h ki desh se dusmani karne se bhi nahi chuk rahe isliye dusman desh ki pyari media ndtv ke liye aasu baha rahe hai
    Reply
  10. N
    ns
    Nov 5, 2016 at 6:47 am
    इसे कहते हैं अंधों मैं काना राजा
    Reply
  11. S
    shivshankar
    Nov 5, 2016 at 11:29 pm
    जब तक राज रहेगा ,मोदी नाम रहेगा मगर उसके बाद न राज न नाम
    Reply
  12. शोम रतूड़ी
    Nov 5, 2016 at 6:52 pm
    ndtv और रवीश कुमार उसी गैंग का हिस्सा हैं जो हमेशा अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर देशद्रोहियों को बढ़ावा देता.लोगों की स्मृति कम होती है इसीलिए लोग भूल गये मुंबई आतंकी अटैक में ndtv ने ही लाइव टेलीकास्ट कर पाकिस्तान मैं बैठे आतंकियों के सरगनाओं को सुविधा दी कि वे आतंकियों को गाइड कर सकें.ऐसा ही इस टीवी ने पठानकोट हे का लाइव टेलीकास्ट कर आतंवादियों को मदद पहुंचाई.ndtv के मालिकों पर नजर डालें तो सब पता चल जायेगा,रवीश तो एक मोहरा भर हैं जो नौकरी बचा रहे हैं पत्रकारिता की आड में.
    Reply
  13. D
    Dharmender
    Nov 6, 2016 at 12:57 pm
    After watching Ravish kumar's prime time, I too became as speechless as the mime actors, but I was thinking about the BJPians who might not have been able to bear this show, and now I feel they may not want to bear the existence of Mr Ravish Kumar. Though my comment is too late, my reaction toward the show was immediately shared with my friends, siblings and with my wife. This was an awesome show that demean the creativity of other anchors on TV shows. Kudos to the creativity, mime actors,
    Reply
  14. U
    umakant
    Nov 5, 2016 at 5:57 am
    I am with ravish kumar..best anchor.Proud of u
    Reply
  15. विनोद मल्होत्रा
    Nov 5, 2016 at 9:37 am
    इसको कहते हैं अच्छेदिन , जब आपकी आज़ादी खत्म हो जायगी
    Reply
  16. विनोद मल्होत्रा
    Nov 5, 2016 at 9:39 am
    क्या हम वर्ष १९७१ कि और अग्रसर हैं ?????
    Reply
  17. विनोद मल्होत्रा
    Nov 5, 2016 at 9:41 am
    लगता है कि सत्ता पक्ष अपने दूसरे दौर मैं आ गई है जहां काम से ज्यादा अपनी सत्ता बचाने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।
    Reply
  18. विनोद मल्होत्रा
    Nov 5, 2016 at 9:44 am
    हम क्यों भूल जाते हैं कि लोकतंत्र मैं हर पाँच वर्ष बाद चुनाव जरूर होते हैं और जनता न्याय करती है। और सब्र का फल हमेशा मीठा होता है।
    Reply
  19. V
    vivekanand ray
    Nov 6, 2016 at 8:17 am
    logo ko ek jut hona hoga saval RAVISH ka nahi LOKTANTRA bachane ka hai
    Reply
  20. Load More Comments
सबरंग