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राहुल गांधी ने दी रामनवमी की बधाई तो लोगों ने पूछा- 2019 करीब है, इसलिए राम की याद आई?

बहुत सारे लोगों ने राहुल को यूपीए सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दिए गए हलफनामे की याद दिलाई, जिसमें कहा गया था कि राम एक 'काल्‍पनिक चरित्र' हैं।
राम सेतु के मुद्दे पर तत्‍कालीन यूपीए सरकार ने सुप्रीम कोर्ट ने हलफनामा देकर रामायण के पात्रों के असल में होने पर शंका जताई थी।

कांग्रेस उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी ने नवरात्रि के अंतिम दिन देशवासियों को रामनवमी की बधाई दी है। गांधी के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट ट्वीट में लिखा गया, ”आप सभी को रामनवमी के अवसर पर हार्दिक शुभकामनायें।” राहुल की माता व कांग्रेस अध्‍यक्षा सोनिया गांधी ने भी रामनवमी की बधाई देते हुए कहा कि भगवान राम ने मर्यादाओं का निर्वहन करते हुए एक आदर्श जीवन जीने की पद्धति को हमारे सामने रखा। सोनिया ने अपने शुभकामना संदेश में कहा, ”भगवान श्रीराम ने मर्यादाओं का निर्वहन करते हुए हम सबके सामने एक आदर्श जीवन जीने की पद्धति को रखा जिसका प्रत्येक भारतीय को पालन करना चाहिए।” उन्होंने कहा कि आज ही के दिन देवी के नौ रूपों की पूजा भी सम्पन्न होती है, देवी के नौ व्रतों से हमें मन वृत्तियों पर संयम करने की शक्ति मिलती है। सोनिया ने कहा कि कन्या पूजन सम्पन्न करके नारी शक्ति की आराधना करने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने इस अवसर पर पूरे देश में सुख समृद्धि की कामना की।

राहुल गांधी के इस ट्वीट पर यूजर्स चुटकी लेने से नहीं चूके। बहुत सारे लोगों ने राहुल को यूपीए सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दिए गए हलफनामे की याद दिलाई, जिसमें कहा गया था कि राम एक ‘काल्‍पनिक चरित्र’ हैं। यूजर्स ने इसे राहुल के  ‘दोहरे मापदंड’ का प्रतीक बताया। रुहान ने लिखा, ”राम मन्दिर के खिलाफ जो स्पीच दिया था आपने, उसके बाद आप राम नवमी मनाने का हक खो चुके हैं! आप बस बाबरी मस्जिद वालों का ही ख्याल रखिए।” लव शर्मा ने तंज कसते हुए कहा, ”2019 के लिए राम याद आ ही गया, खैर अभी राम आपसे नाराज है, 2029 तक सत्ता भूल जाओ।” राज तिवारी ने लिखा, ”रामनवमी की शुभकामनाएं तो दे दी लेकिन राम मंदिर पर कांग्रेस सबूत मांगती है। शर्म करो।”

देखें राहुल के ट्वीट पर लोगों ने क्‍या कहा:

राम नवमी भारत में मनाया जाने वाला बहुत ही प्राचीन त्योहार है। यह केवल भारत में ही विदेशों में रह रहे भारतीयों द्वारा भी मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि जब देश में वर्ण व्‍यवस्‍था लागू थी, तब रामनवमी ही ऐसा त्योहार था जिसे सारे वर्ण सबके साथ मिलकर मनाते थे।

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  1. M
    manish agrawal
    Apr 5, 2017 at 12:10 am
    Rahul Baba! apke guru Diggi Raja ne Hindu Atankbaad ka fasaana pesh karke Hindus ko aapse door kar hi chuke hain, ab aap Ramnavmi ki badhaayi denge to Hindus to apke karib aane waale nahi hain, haan iss koshish main, apki party se jude bache khuche minorities bhi kahin apka saath na chhod de. aap to JNU main Rashtravirodhi master lagaane walon ke sath hi better lagte ho ! Hindus sirf ek shart par apke paas aa sakte hain, ki aap Modiji ke sath milkar Loksabha aur Rajyasabha main, tatkaal Ramjanmbhumi par bhavya Mandir banaane ke liye ACT p karaayen ! apke pita Swargiya Rajiv hi ko ye sachchi shraddhnjali hogi kyuki aakhir Ramjanmbhumi ka taala unhi ne khulwaaya thaa !
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