December 04, 2016

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जानिए कैसे-कैसे फ्रॉड कर कमाई करते हैं ओला-उबर के टैक्‍सी ड्राइवर्स, लाख से ऊपर पहुंच जाती है महीने की कमाई​

एक पूर्व ओला कर्मचारी ने कई ऐसे जुगाड़ बताए हैं जिनका इस्‍तेमाल कर ड्राइवर्स अच्‍छा पैसा बनाते हैं।​

उबर अमेरिका के सान फ्रांसिस्‍को की कंपनी है, जबकि ओला बेंगलुरु का स्‍टार्ट-अप है।

भारत में कैब का चलन तेजी से बढ़ रहा है। किफायती कीमत में आरामदायक सफर आैर प्राइवेसी ने लाखों लोगों का आकर्षित किया है। ऐसे में इसमें कमाई का स्‍कोप भी बढ़ा है। अगर एक पूर्व कर्मचारी के दावों पर यकीन करें तो ज्‍यादातर ओला और उबर ड्राइवर्स ने अच्‍छी-खासी कमाई का रास्‍ता निकाल लि है। रेडिफ न्‍यूज से बातचीत में ओला और उबर, दोनों की कैब चलाने वाले ड्राइवर ने कहा, ”कभी-कभी पैसेंजर के आने का इंतजार करना सही नहीं होता और अगर यह पीक ट्रैफिक का वक्‍त हो तो हम राइड कैंसिल कर देते हैं और ये देखते हैं कि कस्‍टमर पेमेंट करे। इस तरह, हम अपना इंसेंटिव बचा पाते हैं।” यह एक आम ट्रिक है, इसे ‘नो शो फ्रॉड’ के नाम से जाना जाता है। कई बार ऐसा होता है कि कस्‍टमर कैब बुक करता है और राइड के लिए पैसा चुकाता है, मगर ड्राइवर नहीं आता। कैब ड्राइवर्स द्वारा इस्‍तेमाल की जाने वाली ट्रिक्‍स में से यह भी एक है। नाम न छापने की शर्त पर, एक पूर्व ओला कर्मचारी ने कई ऐसे जुगाड़ बताए हैं जिनका इस्‍तेमाल कर ड्राइवर्स अच्‍छा पैसा बनाते हैं।

कमीशन या इंसेंटिव आधारित फ्रॉड: एक ओला ड्राइवर के मुताबिक, ”मैंने इससे पहले कहीं काम नहीं किया था। मुझे घूमना अच्‍छा लगता है इसलिए मैंने सोचा ओला से बेहतर क्‍या होगा। मेरे द्वारा बनाई गई राइड्स की संख्‍या केआधार पर इंसेंटिव्‍स और पेमेंट से मैं दिनभर में करीब 8 से 10,000 रुपए कमा लेता हूं। शुरू में जब ओला शुरू हुआ, ड्राइवर्स ने कई लाख रुपए कमाए। तो, राइड्स की संख्‍या जितनी ज्‍यादा होगी, ड्राइवर उतना ही पैसा बनाएगा। इसीलिए ड्राइवर्स ज्‍यादा राइड्स दिखाने के लिए कई तरकीब लगाते हैं। ”ड्राइवर्स के पास दो फोन होते हैं। एक ओला-ड्राइवर पार्टनर एप्‍प और दूसरी कंज्‍यूमर एप्‍प। वे एक से राइड बुक करते हैं और दूसरे से फौरन एक्‍सेप्‍ट कर लेते हैं। सिस्‍टम यह दिखाएगा कि ड्राइवर ने दिन भर में करीब 30 ट्रिप पूरी की हैं।

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किसी दोस्‍त को रेफर करने का फ्रॉड: सोचिए कि कोई ड्राइवर एक्‍स अपने दोस्‍त वाई के साथ नोएडा के किसी मॉल में दोपहर के वक्‍त है, जब डिमांड कम है। ओला के पास रियल-टाइम ट्रैकिंग की सुविधा है जिसे कस्‍टमर की मदद के लिए शुरू किया गया था, लेकिन सिस्‍टम को इस तरह मोड़ा जा सकता है कि ड्राइवर्स को फायदा होगा। एक्‍स अपने दोस्‍त को वह दिशा बताता है जिस दिशा में वह बढ़ रहा होता है। उसका दोस्‍त रियल टाइम मूवमेंट देखकर कैब पर पिन करता है, तब सिस्‍टम सबसे नजदीकी उपलब्‍ध कैब को तलाशेगा, मतलब एक्‍स की कैब बुक हो जाएगी।

घर जाओ फ्रॉड: ड्राइविंग कभी-कभी मुश्किल हो जाती है। ड्राइवर की ड्यूटी खत्‍म होने का कोई तय वक्‍त नहीं होता। कई बार ड्राइवर जल्‍दी घर चला जाता है इससे उसके इंसेंटिव में कमी आती है। इसलिए अपना इंसेंटिव पाने के लिए, ड्राइवर अपने दोस्‍त या साथी कैब ड्राइवर से उसके घर के लिए कैब बुक करने को कहता है। एक पूर्व ओला कर्मचारी के अनुसार, ”इससे ड्राइवर को न सिर्फ अतिरिक्‍त इंसेंटिव मिलता है, बल्कि पेट्रोल की लागत भी एक ट्रिप के तहत आएगी और उसकी जेब से कुछ नहीं जाता।”

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एक दायरे में ही घूमना: कुछ कार और ड्राइवर्स ऐसे थे जो प्‍लेटफॉर्म पर रजिस्‍टर तो थे, मगर सिस्‍टम पर नहीं थे। एक सूत्र ने बताया कि सामान्‍य कार कई एरियाज से होकर गुजरती है और किसी एक लोकेशन तक सीमित नहीं रहती। ऐसी कैब्‍स के मामलों में कार सिर्फ एक लाेकेशन पर ही कई ट्रिप्‍स में जाती है, वह भी पांच से दस किलोमीटर के दायरे में।

क्‍या आप दूसरी राइड बुक करना चाहेंगे? ओला की तरफ से इंसेंटिव पाने के लिए एक ड्राइवर को दिन भर में 18 राइड्स पूरी करनी होती हैं। कई बार ड्राइवर ऐसा नहीं कर पाते, तब वे राइड पूरी होने पर आपसे गाड़ी से बाहर निकलकर एक और राइड बुक करने को कहते हैं। अगर आपके पास ‘ओला मनी’ है तो वह अापने पैसे वापस करता है। लेकिन अगर आप उबर पर हैं तो वह आपको कैश का विकल्‍प चुनने को कहता है। एक बार आप राइड बुक करते हैं, वह सर्विस पिक अप करता है और कुछ दूर जाने के बाद ट्रिप खत्‍म कर देता है। इसे रोकने के लिए अब बुकिंंग्‍स को रैंडम कर दिया गया है। इसके अलावा कुछ नियम बनाए गए हैं जो यह तय करने में मदद करते हैं कि कस्‍टमर असली है या नहीं।

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टेक्निकल हैकर: चूंकि ओला और उबर एग्रीगेटर मॉडल पर काम करती हैं, जो कि व्‍यक्तिगत से लेकर आॅपरेटर्स तक फैला हुआ है जिनके पास ड्राइवर्स हैं, वह उनके प्‍लेटफॉर्म पर रजिस्‍टर कर सकता है। जिनके पास 15 से 20 ड्राइवर्स हैं वे ड्राइवर की एपीआई डिकंपाइल करेंगे और फिर बुकिंग कंप्‍यूटर के जरिए की जा सकेगी। ऐसे फ्रॉड को रोकने के लिए सबकुछ एनक्रिप्‍टेड कर दिया गया है।

सर्ज प्राइसिंग फ्रॉड: वर्तमान में सर्ज प्राइसिंग के खिलाफ सख्‍त नियम हैं। जब यह लागू था तो ड्राइवर कीमत बढ़ाने के लिए जुगाड़ लगाने थे। कई ड्राइवर्स एक जगह इकट्ठा होते। उनमें से ज्‍यादातर अपनी डिवाइसेज बंद कर देते और कुछ चालू रखते। इससे सर्ज प्राइसिंग बढ़ जाती है क्‍योंकि डिमांउ ज्‍यादा और सप्‍लाई कम होती। जैसे ही सर्ज प्राइसिंग लागू होती, ड्राइवर्स अपने डिवाइस ऑन कर लेते। इससे बचने के लिए ओला ने एक अल्‍गोरिद्म बनाया जिससे यह हुआ कि 10 से ज्‍यादा ड्राइवर एक साथ अपना फोन नहीं ऑफ कर सकते। उन्‍होंने डिवाइसेज के ऑन-ऑफ होने के समय को भी ट्रैक करना शुरू कर दिया।

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आउटस्‍टेशन फ्रॉड: ओला ने कुछ महीनों पहले इसे शुरू किया है, मगर ड्राइवर्स ने जुगाड़ लगाना शुरू कर दिया है। अगर कस्‍टमर आउटस्‍टेशन राइड बुक करता है और उसकी कीमत 2,500 है, तो ड्राइवर को 800 रुपए (ओला का कमीशन) निकालकर बाकी रुपया मिलता है। कई मामलेां में ड्राइवर कस्‍टमर से बुकिंग कैंसिल कर कस्‍टमर को खुद ही अपने पर 2,000 रुपए में ले जाने का ऑफर देता है, इस तरह से ड्राइवर ओला को कमीशन के लिए धोखा देता है। इसे रोकने के लिए डिवाइसेज को ट्रैफ किया जाता है। अगर किसी कस्‍टमर ने आउटस्‍टेशन बु‍क किया, फिर कैंसिल किया और उसके बाद वहीं कैब आउटस्‍टेशन के रास्‍ते पर मिली तो संभावना यही होती है कि ड्राइवर ने ट्रिक का इस्‍तेमाल किया है।

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ओला और उबर की जोड़ी: भले ही ओला और उबर की बिलकुल न बनती हो, मगर ड्राइवर्स को इसकी क्‍या परवाह। वे दोनों प्‍लेटफॉर्म्‍स पर मौजूद हैं और दोनों से फायदा उठाते हैं। कई बार जब आप ओला बुक करते हैं तो ड्राइवर आपसे उबर बुक करने को भी पूछ सकता है, वे ऐसा इंसेंटिव पाने के लिए करते हैं।

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First Published on October 20, 2016 8:06 am

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