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जंगल में बंदर ने ली सेल्फी, तो फोटो से पैसा कमा फोटोग्राफर क्यों उड़ाए मौज, अब करेगा वापस

मकॉक प्रजाति के नारूतो बंदर ने डेविड का कैमरा छीन लिया और खुद की सेल्फी लेना शुरू कर दिया था।
मकॉक प्रजाति के नारूतो बंदर।(फोटो सोर्स- यूट्यूब)

वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी की वजह से अक्सर हम जंगल के कुछ बेहद खूबसूरत पलों को कैमरे के जरिए देख पाते हैं। जंगल की यही फोटोज वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर्स की कमाई का साधन है। लेकिन सोचिए अगर जंगल के जानवर खुद की फोटो खींचे तो उस फोटो की कमाई किसे मिलनी चाहिए। आप भी इस सवाल को अजीब सोच रहे होंगे। लेकिन आपको बता दें कि ये सवाल इन दिनों अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बंटौर रहा है। जो एक बंदर की खुद की सेल्फी लेने के बाद से शुरू था। चलिए बताते हैं आखिर क्या है पूरा माजरा।

साल 2011 में वाइल्ड फोटोग्राफर डेविड स्लेटर के साथ इंडोनेशिया के जंगल में कुछ ऐसा हुआ कि आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पशुओं के अधिकारों को लेकर चर्चा हो रही है। मामला इस सवाल से शुरू हुआ कि जंगल में बंदर ही सेल्फी ले तो उसका कॉपीराइट किसके पास होगा? दरअसल 6 साल पहले इंडोनेशिया के जंगलों में वाइल्ड फोटोग्राफर डेविड स्लेटर बाकी दिन की तरह जंगल में जानवरों की फोटो खींचने में मशगुल थे। तभी अचानक उनके पास एक बंदर आ धमका। मकॉक प्रजाति के नारूतो बंदर ने डेविड का कैमरा छीन लिया। लेकिन उस दिन हैरानी वाली बात ये हुई कि बंदर ने कैमरे से खुद की सेल्फी लेना शुरू कर दिया।

डेविड स्लेटर ने किसी तरह अपना कैमरा बंदर से हासिल किया और बाद में बंदर की सेल्फी सोशल मीडिया पर पोस्ट की। बंदर की सेल्फी ने लोगों को अपनी तरफ अट्रैक्ट किया और ये सेल्फी हिट हो गई। सोशल मीडिया पर बंदर की सेल्फी को सैंकड़ों लोगों ने लाइक और शेयर किया। बाद में इन्हीं तस्वीरों पर कॉपीराइट को लेकर विवाद हुआ। तस्वीर खींचने के दो साल बाद पेटा के कार्यकर्ता ने स्लेटर पर इस बात को लेकर मुकदमा दायर किया कि उन्हें बंदर के किए गए काम से पैसा कमाने का कोई अधिकार नहीं है। इस मुकदमें मे कहा गया था कि नारूतो को ही कॉपीराइट से लाभ का अधिकार है।

खैर आखिर में वन्य जीवों के संरक्षण के लिए काम करने वाली संस्था पेटा और स्टेलर के वकीलों ने सैन फ्रैंसिस्को स्थित कोर्ट को मामला खारिज करने के लिए कहा और बताया कि उन्होंने इस मामले को आपसी सहमति से सुलझा लिया है। इस मामले में दायर की गई पेटा की याचिका को रद्द कर दिया गया लेकिन स्लेटर भविष्य में इस तस्वीर से होने वाली कमाई का 25 प्रतिशत दान करने के लिए तैयार हो गए हैं।

एक न्यूज वेबसाइट को दिए इंटरव्यू के दौरान इस पूरे मामले पर वकील जेफ कर्र ने कहा कि पेटा के इस मुकदमे के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पशुओं के अधिकारों को लेकर चर्चा हुई। वहीं स्लेटर का कहना था कि उन्होंने भी काफी मेहनत की थी और यह तस्वीर पर उनके कॉपीराइट के दावे के लिए काफी थी।

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