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सुषमा स्वराज के पति ने मैरिटल रेप पर किया ट्वीट, कविता कृष्णन ने दिया ये जवाब

स्वराज कौशल ने कुछ ट्वीट में वैवाहिक बलात्कार के खिलाफ विचार रखे हैं। उन्होंने ट्वीट करके लिखा है वैवाहिक बलात्कार जैसी कोई चीज नहीं है। हमारे घर पुलिस स्टेशन नहीं बनने चाहिए।
Author August 31, 2017 10:56 am
कविता कृष्णन CPIML पोलित ब्यूरो की सदस्य हैं। (Source-Express photo)

दिल्ली हाई कोर्ट ने वैवाहिक बलात्कार को अपराध की श्रेणी में रखने से संबंधित संगठन की याचिका पर सुनवाई करने के लिए बुधवार को सहमति जता दी।वैवाहिक बलात्कार पहले भी नारीवादियों के लिए प्रमुख मुद्दा रहा है। इधर कम्युनिस्ट लीडर कविता कृष्णन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के पति स्वराज कौशल के खिलाफ ट्विटर पर भड़क गई है। स्वराज कौशल ने कुछ ट्वीट में वैवाहिक बलात्कार के खिलाफ विचार रखे हैं। उन्होंने ट्वीट करके लिखा है वैवाहिक बलात्कार जैसी कोई चीज नहीं है। हमारे घर पुलिस स्टेशन नहीं बनने चाहिए। अगर ऐसा होता है तो घरों से ज्यादा पति जेलों में मिलेंगे। साथ ही एक ट्वीट में स्वराज कौशल ने राम रहीम पर हाई प्रोफाइल होने के कारण फंसाए जाने की तरफ इशारा भी किया है। इन सभी ट्वीट को शेयर करते हुए कविता कृष्णन ने लिखा है कि सीनियर सुप्रीम कोर्ट के वकील स्वराज कौशल वैवाहिक बलात्कार का बचाव करते हुए साथ ही राम रहीम के हाई प्रोफाइल होने के नाते फंसाए जाने की तरफ इशारा करते हुए।

 

इससे पहले कोर्ट ने उन याचिकाओं पर उसे पक्ष बनाया जिनमें आइपीसी की धारा 375 (बलात्कार का अपराध) को इस आधार पर असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है कि यह पतियों द्वारा यौन उत्पीड़न का शिकार हो रही विवाहिताओं के खिलाफ भेदभावपूर्ण है। वैवाहिक बलात्कार या जीवनसाथी से बलात्कार वह कृत्य है जिसमें शादीशुदा जोड़े में से एक जीवनसाथी दूसरे की बिना सहमति के यौन संबंध बनाता है।

दालत ने गैर सरकारी संगठनों आरआइटी फाउंडेशन, आॅल इंडिया डेमोक्रेटिक वुमन्स एसोसिएशन की जनहित याचिकाओं में उठाए गए मुद्दे का अध्ययन करने पर सहमति जता दी है। एक महिला और एक पुरुष ने भी जनहित याचिकाएं दाखिल कीं जिन्होंने भारतीय दंड संहिता में इस अपवाद को समाप्त करने की मांग की है जिसमें 15 वर्ष से बड़ी पत्नी के साथ बिना सहमति के यौन संबंध बनाने को बलात्कार नहीं माना जाता है। इसी तरह की एक घटना की शिकार एक याचिकाकर्ता महिला की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कोलिन गोंजाल्विस ने दलील दी थी कि विवाह को ऐसे नहीं देखा जा सकता कि यह मर्जी से पतियों को जबरन संबंध बनाने का अधिकार दे देता है।

उन्होंने कहा कि वैवाहिक लाइसेंस को पति को छूट के साथ अपनी पत्नी का जबरन बलात्कार करने का लाइसेंस दिए जाने के तौर पर नहीं देखा जा सकता और एक विवाहित महिला को अविवाहित महिला की तरह ही अपने शरीर पर पूरे नियंत्रण का समान अधिकार है। हालांकि केंद्र ने याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा कि वैवाहिक बलात्कार को अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता क्योंकि ऐसा होने से विवाह की संस्था की बुनियाद ही हिल सकती है और यह पतियों के उत्पीड़न का आसान उपाय बन सकता है।

 

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