December 11, 2016

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जगदीश चंद्र बोस 158 बर्थडे: दुनिया के महान वैज्ञानिक के बारे में ये पांच बातें आपको जाननी चाहिए

Jagadish Chandra Bose Google doodle: इसमें एक लीजेंडरी वैज्ञानिक को दिखाया गया है जिसने पूरी दुनिया में अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने सिस्मोग्राफ नाम का एक यंत्र बनाया था जिसकी मदद से पेड़ों में हो रही बढ़ोत्तरी को मापा जाता है।

जगदीश चंद्र बोस को समर्पित गूगल ने बनाया अपना डूडल।

बांग्लादेशी वैज्ञानिक सर जगदीश चंद्र बसु का जन्म आज से 158 साल पहले हुआ था। वो दूरसंचार के क्षेत्र में दुनिया के लीडर बनकर उभरे। अपने नाम के साथ उन्होंने बहुत सारी उपल्बिधों को जोड़ा। अमेरिका, ऑस्ट्रलिया, भारत और फ्रांस में पॉलिमैथ एक सब्जेक्ट के तौर पर गूगल डूडल ने लिया और उनके योगदान को ध्यान में रखते हुए इसे सेलिब्रेट करने के लिए एक डूडल बनाया है। इसमें एक लीजेंडरी वैज्ञानिक को दिखाया गया है जिसने पूरी दुनिया में अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने सिस्मोग्राफ नाम का एक यंत्र बनाया था जिसकी मदद से पेड़ों में हो रही बढ़ोत्तरी को मापा जाता है। वातावरण से इनपर पड़ने वाले प्रभाव को भी इस यंत्र की मदद से देखा जा सकता है। आज हम वो पांच चीजें बताएंगे जो कि आपको जाननी चाहिए।

बांग्लादेशी सीखने के दौरान हुआ प्रकृति से प्यार- बोस के पिता ने युवा उम्र में उन्हें मुनीशगंज के वर्नाकुलर स्कूल भेज दिया था क्योंकि वो चाहते थे कि उनका बेटा अग्रेंजी भाषा सीखने से पहले अपनी भाषा को सीखें। 1915 में बिक्रमपुर में हुई कॉन्फ्रेंस में बोस ने कहा था- मैंने चिड़ियों, जानवरों और जलीय पौधों के बारे में कहानिया सुनी थी। इसी वजह से मेरे दिमाग में प्रकृति के बारे में खोजबीन करने की बात उत्पन्न हुई। गरीब परिवार से होने के बावजूद उनके पिता ने उन्हें स्कॉलर बनने के लिए प्रेरित किया।

भारतीय होने की वजह से झेलना पड़ा भेदभाव- प्रोफेसर ऑफ फिजिक्स के तौर पर यूनिवर्सिटी ऑफ कलकत्ता को ज्वाइन करने के बाद उन्हें भारतीय नस्ल का होने की वजह से लैबोरेटरीज से दूर रखा जाता था। अपने 24 स्कवायर फीट के कमरे में वो एक्सपेरिमेंट किया करते थे। प्रोफेसर के दौरान उन्हें नस्लीय भेदभाव के साथ गालियों का सामना करना पड़ता था।

रेडिसो साइंस के जनक- सभी मशहूर बायोफिसिस्ट कहीं ना कहीं बोस से जुड़े हुए हैं। अपनी सालों की रिसर्च के बलबूते बोस ने रिमोट वायरलेस सिग्नल को जीवित करने की कोशिश की थी। उन्हें बेसिक दूरसंचार के सिग्नल की खोज करने में कामयाबी मिली थी। अपनी इस खोज के लिए उन्हें पैसा दिया गया लेकिन उन्होंने मना कर दिया और इसे सार्वजनिक कर दिया। जिससे दूसरे लोग इसपर शोध करके इसे बेहतर बना सकें। 1997 में इंस्टिट्यूट ऑफ इलेक्ट्रिकल एंड एलेक्ट्रॉनिक्स इंजिनियर ने बोस को रेडिया साइंस का जनक करार दिया था।

पौधों को होता है दर्द- बोस की सबसे बड़ी उपलब्धि थी क्रेस्कोग्राफ जिसकी मदद से विज्ञान को यह समझने में मजद मिली कि मौसम की वजह से पेड़-पौधों पर क्या प्रभाव पड़ता है। उन्होंने बताया कि किस तरह केमिकल निरोध, तापमान और रोशनी के बदलाव का पेड़ों की बढ़ोतरी पर किस तरह प्रभाव पड़ता है और बताया कि इंसानों को उनकी किस बेहतर तरीके से केयर करनी चाहिए। वो पहले ऐसे शख्स थे जिनका कहना था कि पोड़ों को  भी दर्द होता है।

चांद पर मौजूद है बोस नाम का ज्वालामुखी- चांद पर मौजूद एक ज्वालामुखी का नाम बोस रखा गया है। यह ज्वालामुखी भाभा और एडलर के पास स्थित है। उनके योगदान को महत्व देते हुए ऐसा किया गया है।

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First Published on November 30, 2016 8:32 am

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