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विकलांग दोस्त को अपने कंधे पर बिठा कर ले जाती है स्कूल, साथ देने के लिए छोड़ा अपना घर

Happy Friendship Day: कभी-कभी कुछ बातों के कारण दोस्तों में गंभीर गलतफहमियां भी पैदा हो जाती है, जो इस प्यार भरे रिश्ते में दरार डाल देती है। लेकिन सच्चा दोस्त वहीं होता है जो हर परिस्थति में अपने दोस्त का साथ दें।
ये कहानी है रीना हेंब्रम और मीना मिंज की। (फोटो सोर्स- यू-ट्यूब)

कहते हैं जीवन में दोस्ती करना जितना आसाना है उसे लंबे समय तक बरकरार रखना उतना ही मुश्किल। वैसे तो दोस्ती का कोई दिन नहीं होता क्योंकि ये तो ऐसी खुशी है जो इंसान के जीवन में आती तो एक बार है लेकिन वह उसका साथ जीवन भर निभाती है। फिर भी लोग आज के दिन इसे सेलिब्रेट करते हैं। इसके साथ ही वह एक-दूसरे को इस बात का अहसास भी कराते हैं कि वह उसके लिए कितने खास हैं। कभी-कभी कुछ बातों के कारण दोस्तों में गंभीर गलतफहमियां भी पैदा हो जाती है, जो इस प्यार भरे रिश्ते में दरार डाल देती है। लेकिन सच्चा दोस्त वहीं होता है जो हर परिस्थति में अपने दोस्त का साथ दें। आज फ्रेंडशिप के मौके पर हम आपके सामने एक ऐसी ही कहानी लेकर आए हैं जिसे जान आप भी इनकी दोस्ती को सलाम करने पर मजबूर हो जाएंगे।

ये कहानी है रीना हेंब्रम और मीना मिंज की। झारखंड के उरूगुटु गांव की रहने वाली इन लड़कियाों की दोस्ती पूरे गांव के लिए एक मिसाल बन गई है। दरअसल, मीना जन्म से ही विकलांग है और अकेली भी। वहीं उसकी दोस्त रीना पास के गांव ओरमांझी की रहने वाली है। लेकिन अपनी दोस्त का साथ देने के लिए वह अपने घर से दूर मीना के साथ आकर ही रहने लगी। दोनों पिछले 14 साल से एक-दूसरे के दोस्त हैं। लेकिन इनकी दोस्ती में आजतक पहले की तरह ही बरकरार है।
दोनों ने रामगढ़ से नर्सरी से मैट्रिक तक की पढ़ाई पूरी की। रांची में इंटर की पढ़ाई की और ग्रेजुएशन एसएस मेमोरियल कॉलेज से कर रही हैं। मीना के हर काम में रीना उसका पूरा देती है। इतना ही नहीं वह उसे रोज गांव से 30 किलोमीटर दूर पीठ पर लादकर स्कूल ले जाती हैं। और फिर साथ ही घर लौटती है।

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