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‘पिताजी की माफी’ देने वाला राम रहीम इसे मानता था ‘पाप’, कसम खिलवाकर लोगों को रखता था दूर

रेप के गुनहगार राम रहीम ने इस शपथ पत्र में अपने अनुयायियों के हवाले से लिखवाया है कि, 'मैं यह मानता हूं कि समलैंगिकता को धर्म, नैतिकता और आध्यात्मिकता से मान्यता नहीं दी गई है, नयी खोजों के मुताबिक समलैंगिकता कई बीमारियों की वजह है।'
बलात्कार केस के दोषी राम रहीम सिंह।

जैसे-जैसे राम रहीम के गुनाहों की लिस्ट सामने आ रही है, उसके सारे राज दुनिया के सामने खुलते जा रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक पता चला है कि राम रहीम को समलैंगिकता से कथित रुप से सख्त नफरत थी। वो इसे पाप मानता था और इससे डेरा अनुयायियों को दूर रखने के लिए शपथ पत्र भरवाता था। इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक राम रहीम ने एक शपथ पत्र छपवा रखा था इस शपथ पत्र में उसने डेरा अनुयायियों को समलैंगिकता से दूर रहने के आदेश दिये थे। इस शपथ पत्र के मुताबिक डेरा अनुयायियों को ये लिखकर देना पड़ता था कि वो बाबा राम रहीम के पवित्र दिशा निर्देशों का पालन करते हुए समलैंगिक व्यवहार को त्यागने की शपथ लेता है। रेप के गुनहगार राम रहीम ने इस शपथ पत्र में अपने अनुयायियों के हवाले से लिखवाया है कि, ‘मैं यह मानता हूं कि समलैंगिकता को धर्म, नैतिकता और आध्यात्मिकता से मान्यता नहीं दी गई है, नयी खोजों के मुताबिक समलैंगिकता कई बीमारियों की वजह है।’

समलैंगिकता के खिलाफ भरवाया जाने वाला शपथ पत्र
(फोटो-dera website)

बता दें कि पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट ने प्राइवेसी को मौलिक अधिकार माना है। इससे समलैंगिकता और एलजीबीटी को अपराध मुक्त करने की कोशिशों को बल मिला है। बता दें कि सिरसा स्थित बाबा राम रहीम का डेरा सच्चा सौदा कई, सालों तक गुनाहों का अड्डा बना रहा। राम रहीम के इस अड्डे में लड़कियों के साथ बलात्कार को ‘पिताजी की माफी’ कोड वर्ड नाम दिया गया था। राम रहीम के गुनाहों का पर्दाफाश तब हुआ, जब 15 साल पहले एक साध्वी अपने साथ हुए रेप की वारदात की जानकारी पत्र के जरिये पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी को दी।

हरियाणा के सिरसा में अधिकारियों ने डेरा सच्चा सौदा मुख्यालय से 18 नाबालिग लड़कियों को भी बाहर निकाला। सिरसा के उपायुक्त प्रभजोत सिंह के मुताबिक सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद 18 वर्ष तक की उम्र की 18 लड़कियों को डेरा मुख्यालय से बाहर निकाला गया। अभी ये लड़कियां बाल संरक्षण अधिकारी की निगरानी में हैं और बाद में उन्हें विभिन्न जगहों पर स्थित बाल संरक्षण संस्थाओं में भेज दिया जाएगा।

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