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महेश भट्ट बोले- खूंरेजी के इस आलम में मुसलमानों को मुसलमानों से डर लगता है

अन्य ट्वीट में महेश भट्ट ने लिखा कि अब दरिंदों से ना हैवानों से डर लगता है। क्या जमाना है कि इंसानों से डर लगता है।
बॉलीवुड के मशहूर निर्माता-निर्देशक महेश भटट् ने इशारों-इशारों में देशभर में जारी हिंसा, तनाव के बीच अपनी चिंता जाहिर की है। (फोटो सोर्स फेसबुक)

बॉलीवुड के मशहूर निर्माता-निर्देशक महेश भटट् ने इशारों-इशारों में देशभर में जारी हिंसा, तनाव के बीच अपनी चिंता जाहिर की है। सोशल नेटवर्किंग साइट ट्यूटर पर ट्वीट करते हुए उन्होंने लिखा, ‘खूंरेजी का ये आलम हैं खुदा खैर करे। अब मुसलमानों को मुसलमानों से डर लगता है।’ उन्होंने अन्य ट्वीट में लिखा, ‘इज्जत-ए-नफ्स किसी शख्स की महफूज नहीं। अब तो अपने निगाहबानों से डर लगता है।’ अपने तीसरे ट्वीट में उन्होंने लिखा, ‘अब दरिंदों से ना हैवानों से डर लगता है। क्या जमाना है कि इंसानों से डर लगता है।’ महेश भट्ट के इन ट्वीट्स पर कई यूजरों ने अपनी प्रतिक्रिया भी दी है। सुलतान नाम के ट्विटर यूजर लिखते हैं, ‘क्या खूब लिखा है सर आपने सही है।’ नदीम खान रिजवी महेश भट्ट के ही अंदाज में लिखते हैं, ‘वो जिनकी होती हैं खुर्शीद आस्तीनों में, उन्हें कहीं से बुलाओ बहुत अंधेरा है।’

समीर लिखते हैं, ‘ना पता था हमें अपने जहां का। वरना दूसरों के घर ओ आशियां कहां जलाने निकलते हम।’ कमाल आ खान लिखते हैं, ‘बहुत अच्छा, बहुत खूब, बहुत जोर दार। वाह क्या बात है। कमाल है। छा गए मेरे बड़े भाई।’ समीर लिखते हैं, ‘ना कर भरोसा कर अपनी खुदी पर साहब, यहां अपने आप बनी बस्तियां तक उजड़ जाती हैं।’ शोभना सिंह लिखती हैं, ‘इंसान भी कौवे से आगे निकल गया। कौवे कम से कम जानवरों को खाते हैं। यहां तो इंसान ही इंसान को नोंच नोंचकर खा रहा है।’ वहीं राजेंद्र ट्वीट कर लिखते हैं, ‘कुल मिलाकर यह समझ में आया कि आपको मुसलमानों और ईसाइयों से डर नहीं लगता है।’

 

 

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  1. A
    Ajit Rajput
    May 31, 2017 at 3:51 pm
    परिवर्तन ही संसार का नियम है, और ये हर जीवित प्राणी जानता है. जब तक आप अपने में परिवर्तन नहीं लाते आप विक्सित नहीं हो सकते. फिर चाहे वो अच्छे के लिए हो या े के लिए. मुसलमानो की विडम्बना ये है की ये लोग परिवर्तन में भरोसा बहुत काम रखते है. जिस वजह से ये लोग पिछड़ रहे है दुनिया भर में. ये लोग अभी तक एक संकुचित सोच और उसके दायरे में जी रहे है. जो ये दायरे से निकलता है या निकलने की कोशिश करता है उसको इनके कौम के लोग ही पीछे खींच लेते है. जब तक आप सच को नहीं समझ लेते तब तक आप दुःख में ही रहेंगे. और सच को कहना और सुन पाना सबसे मुश्किल होता है. जो ये लोग नहीं कर पते और हिंसा पे उतर जाते है.
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