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“शहीद पत्रकारों” की श्रद्धांजलि सभा में एंकर ने दिया गलत तथ्य, यह भी कहा- हम फुंक गए हैं

हम गौरी लंकेश के लिए खड़े होते हैं, अच्छी बात है, हमें सबकों एक नजरिए से देखना चाहिए, न कोई छोटा न कोई बड़ा सब पत्रकार हैं।
Author नई दिल्ली | September 16, 2017 14:59 pm
सुमित ने राइटिस्ट, लेफ्टिस्ट और एक्टिविस्ट के बीच में जर्नलिस्ट के खोने की बात कही। (Photo Source: Video Grab)

देश में पत्रकारों के खिलाफ हो रही हिंसा को लेकर हाल ही में दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में एक श्रद्धांजलि सभा आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में नामी पत्रकारों और संपादकों ने हिस्सा लिया और साथी पत्रकारों को संबोधित किया। इस कार्यक्रम में न्यूज 18 इंडिया में ‘हम तो पूछेंगे” को हॉस्ट करने वाले सुमित अवस्थी भी पहुंचे थे। सुमित ने यहां पत्रकारों को संबोधित करते हुए इतनी बड़ी गलती की जिसके बाद उनकी काफी आलोचना की जा रही है। सुमित ने ‘राइटिस्ट, लेफ्टिस्ट और एक्टिविस्ट के बीच में जर्नलिस्ट के खो जाने’ की बात कही। इसके बाद उन्होंने कहा कि मैं अभी गूगल कर देख रहा था कि किन पत्रकारों को मारा गया है तो उनमें एक नाम शाहजहांपुर में मारे गए पत्रकार जगेंद्र सिंह का भी नाम शामिल था।

सुमित ने कहा, ”मैंने तमाम शो किए अपने चैनल पर। जगेंद्र सिंह को जिंदा जलाया गया। जगेंद्र ने मरते समय तत्कालीन अखिलेश सरकार में रहे एक मंत्री का नाम लिया था लेकिन उसपर कोई कार्रवाई नहीं की गई। पुलिस हमेशा उसे फरार बताती रही जबकि वह अखिलेश यादव के साथ कार्यक्रमों में नजर आता था। हम सबने एक बार यहां इकट्ठा होकर कोशिश नहीं की कि जगेंद्र के परिवार को मदद पहुंचाएं और उसकी हत्या के खिलाफ विरोध करें क्योंकि वह छोटे अखबार का छोटा पत्रकार था जो कि केवल एक फ्रीलांसर था। हम गौरी लंकेश के लिए खड़े होते हैं, अच्छी बात है, हमें सबको एक नजरिए से देखना चाहिए, न कोई छोटा न कोई बड़ा, सब पत्रकार हैं। शायद सुमित भूल गए हैं कि जब जगेंद्र की हत्या हुई थी तब भी प्रेस क्लब में श्रद्धांजलि सभा के साथ-साथ एक विरोध मार्च भी निकाला गया था।

जगेंद्र की हत्या के विरोध में 20 जून, 2015 को प्रेस क्लब में तमाम पत्रकार इकट्ठा हुए थे और वे हाथ में अखिलेश सरकार के मंत्री के खिलाफ मार्च करते हुए मुलायम सिंह यादव के बंगले तक गए थे। इस मार्च की खबर कई बड़े अखबारों में भी छपी थी लेकिन शायद सुमित घर से अपना होमवर्क करके नहीं आए थे क्योंकि अगर वे दिल्ली में 22 साल से पत्रकारिता कर रहे हैं तो उन्हें दो साल पहले हुई इस घटना के बारे में जरुर जानकारी होती।

इतना ही नहीं प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में 13 मई, 2016 को राजदेव रंजन, अखिलेश प्रताप सिंह जैसे पत्रकारों की हत्या को लेकर एक बयान दिया था जिसमें आरोपियों को सख्त से सख्त सजा देने की मांग रखी गई थी। सुमित अवस्थी ये तो जानते हैं कि कहां पर किस पत्रकार को मारा गया लेकिन वे ये नहीं जानते कि इन लोगों के लिए भी कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। सुमित ने बहुत ही आसानी से कह दिया कि गौरी लंकेश के मरने पर सभा का आयोजन किया गया लेकिन बाकी पत्रकारों के मरने पर नहीं।

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