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धरती पर ही स्टूडियो में कराया एेसा अनुभव लगा जैसे धरती से 402 किलोमीटर ऊपर हों

इसके लिए उन्हें HTC Vive का इस्तेमाल करना होगा।
होम ने लंदन के एक रिवाइंड नाम के स्टू़डियो के साथ मिलकर धरती पर ही 15 मिनट के लिए ऐसा अनुभव कराया था जैसा कि स्पेस में लगता है। (PHOTO: Rewind)

दुनिया में ज्यादातर लोग इसका अनुभव करना चाहते हैं कि धरती से उपर जाने पर कैसा लगात है। मतलब अगर धरती से 250 किलोमीटर आकाश की तरफ जाया जाए तो कैसा लगेगा। लेकिन ऐसा करना आसान नहीं है। क्योंकि जब किसी को स्पेस में भेजा जाता है तो उसके लिए बहुत खर्चा होता है। मतलब किसी आम आदमी का जाना मुमकिन ही नहीं है। होम ने लंदन के एक रिवाइंड नाम के स्टू़डियो के साथ मिलकर धरती पर ही 15 मिनट के लिए ऐसा अनुभव कराया था जैसा कि स्पेस में लगता है। इसमे धरती से 402 किलोमीटर उपर जाने का अनुभव कराया था।  नासा और एक यूरोपियन स्पेस एजेंसी के ट्रेनिंग प्रोग्राम के आधार पर रिवाइंड ने नासा के काम करने के तरीके को मनोरंजन के इरादे से स्टूडियो में पेश किया।

स्टूडियो में ऐसे अनुभव दिलाने के लिए, स्टूडियो ने नासा और ईएसए के साथ मिलकर काम किया। रिवाइंड के सीटीओ ने बताया कि नासा के 3डी मॉडल्स और प्लेन्स की एक ओपन सोर्स लाइब्रेरी है। जिसे हमने सदर्भ के तौर पर इस्तेमाल किया। हमें आईएसएस मॉडल के साथ एयरलॉक और सूट बिल्कुल वैसे ही चाहिए होते हैं जैसे कि स्पेस में जाने वाले वैज्ञानिक पहनकर जाते हैं। साथ ही विजुअल बनाने के लिए कंपनी 3डी मैक्स स्टूडियो और अनरियल इंजन 4 का इस्तेमाल करती है। इस स्टोरी को बीबीसी की एक टीम ने तैयार किया है।

सबसे पहले एयरलॉक खोलने के बाद प्लेयर्स को स्पेस स्टेशन के बाहर जाना होगा। एक रेडिएटर पैनल पर पूर धरती को देखना होगा। इसके लिए उन्हें HTC Vive का इस्तेमाल करना होगा। अगर टाइमिंग सही नहीं होगी तो यह परेशान यह कर सकता है। एलन की टीम के अनुभव के मुताबिक VR से उंचाई पर परेशानी हो सकती है। आईएसएस के बाहर जाकर घूमने की कुछ ही डिग्री की फ्रीडम होगी। साथ ही एलन ने बताया कि यह वीआर में भयानक लग सकता है। होम ने 2016 में शेफील्ड फिल्म समारोह में ऑडिएंस अवार्ड जीता था और यह HTC Vive और अोक्लूअस पर अब उपलब्ध है। एलन ने कहा कि वीआर एक बड़ी चीज है। हमें सदैव भविष्य का ध्यान रखना चाहिए। अाकाश की कोई सीमा नहीं होती।

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