March 23, 2017

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बीएसएनएल दोगुनी करेगा अपनी डाटा क्षमता, यूजर्स कर सकेंगे 600 टेराबाइट इंटरनेट का इस्‍तेमाल

बीएसएनएल नेटवर्क पर डाटा की बढ़ती डिमांड के पीछे 1,099 रुपए में अनलिमिटेड 3जी देने की योजना प्रमुख वजह रही है।

चित्र का इस्‍तेमाल केवल प्रस्‍तुतिकरण के लिए किया गया है।

निजी ऑपरेटरों से लोहा लेने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की फर्म बीएसएनएल ने अपने मोबाइल ब्रॉडबैंड क्षमता को बढ़ाकर 600 टेराबाइट तक ले जाने का फैसला किया है। बीएसएनएल के चेयरमैन और एमडी अनुपम श्रीवास्‍तव ने पीटीआई को बताया कि ”हम अपने नेटवर्क में मोबाइल डाटा के इस्‍तेमाल में जबर्दस्‍त बढ़ोत्‍तरी देख रहे हैं। हम अपना डाटा नेटवर्क बढ़ाने जा रहे हैं ताकि तेज रफ्तार 3जी और अन्‍य सेवाएं दे सकें। नवंबर तक हम दक्षिण में, हम क्षमता को दोगुना कर 600 टीबी और बाकी अन्‍य जोनों में 450 टीबी तक क्षमता बढ़ाएंगे।” घाटे में चल रही बीएसएनएल ने स्‍पेक्‍ट्रम नीलामी में हिस्‍सा नहीं लिया था और पहले से मौजूद मोबाइल एयरवेव्‍स को पूंजीगत बनाने की कोशिश कर रहा है। श्रीवास्‍तव ने हाल ही में कहा था कि बीएसएनएल नेटवर्क पर डाटा की बढ़ती डिमांड के पीछे 1,099 रुपए में अनलिमिटेड 3जी देने की योजना प्रमुख वजह रही है। इस प्‍लान में यूजर्स को 30 दिनों तक बिनी किसी स्‍पीड लिमिट के अनलिमिटेड 3जी एक्‍सेस मिलता है।

श्रीवास्‍तव ने कहा, ”2012 में, बीएसएनएल नेटवर्क करीब 80 टीबी था। अनलिमिटेड 3जी इंटरनेट योजना लॉन्‍च करने के बाद डाटा यूसेज में अचानक बढ़ाेत्‍तरी हुई। जुलाई में, यह (यूसेज) लगभग 279 टीबी रहा जो बढ़कर अब 353 टीबी हो गया है।’उन्होंने कहा कि इस प्लान में प्रति ग्राहक औसत डेटा डाउनलोड 292 जीबी या 66जीबी प्रति माह है। यह एक तरह से स्मार्टफोन पर एक महीने में बालीवुड की लगभग 100 फिल्में डाउनलोड करने के बराबर है। दूरसंचार क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बारे में उन्होंने कहा कि बीएसएनएल किसी भी अन्य कंपनी से मुकाबला करने को तैयार है।

रिलायंस जियो समेत अन्य प्राइवेट मोबाइल कंपनियों को 4G कवरेज में टक्कर देने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की दूरसंचार कंपनी बीएसएनएल 700 मेगाहर्ट्ज बैंड में से 5 मेगाहर्ट्ज बैंड स्पेक्ट्रम खरीदने का प्लान बना रही है। बीएसएनएल ने इस संबंध में सरकार को पत्र लिखकर 700 मेगाहर्ट्ज बैंड में अपनी रुचि के बारे में अवगत कराया है। श्रीवास्तव का कहना है कि “हमें 700 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम खरीदना ही पड़ेगा क्योंकि हमारे पास इसके आलावा दूसरा कोई ऑप्शन नहीं है। इसके लिए सरकार की तरफ से वित्तीय सहायता की जरूरत पड़ेगी।”

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First Published on October 9, 2016 1:18 pm

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