March 24, 2017

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टूटते-बिखरते बंधन

फिल्मी बंधन टिकाऊ भी होते हैं। लेकिन कुछेक अपवाद छोड़ कर ऐसे मामलों में यह पत्नी के त्याग और सहन शक्ति की वजह से ही संभव हो पाता है। फिल्म उद्योग में दो तरह के वैवाहिक बंधन जुड़ते हैं। एक में पत्नी का फिल्मों से कोई नाता नहीं होता। ज्यादातर मामलों में ऐसी शादियां तभी हो जाती हैं जब हीरो का करिअर शुरू हुआ होता है। अक्सर ऐसी पत्नियां घर की चारदीवारी तक सीमित रहती है। उनका सामाजिक दायरा कुछ मित्रों तक ही सिमटा रहता है। फिल्मी गतिविधियों में उनकी सक्रियता लगभग नहीं के बराबर होती है।

Author October 16, 2016 00:56 am

श्रीशचंद्र मिश्र

हिं दी समेत दक्षिण की सभी भाषाओं में करीब डेढ़ सौ फिल्में निर्देशित कर चुके प्रियदर्शन ने शादी के छब्बीस साल बाद अपनी अभिनेत्री पत्नी लिस्सी को तलाक दे दिया है। चेन्नई की पारिवारिक अदालत में आपसी सहमति से दोनों के तलाक पर रजामंदी होने से पहले अदालत में और घर में दोनों के बीच लंबी लड़ाई चली जिसे लिस्सी बेहद दुर्भाग्यपूर्ण मानती हैं। इससे उन्हें समझ में आ गया कि उनके बंधन में ऐसा कुछ बचा नहीं है जिसे सहेज कर रखने की कोशिश की जा सके। तमिल फिल्मों के सुपरस्टार रजनीकांत की बेटी सौंदर्या अपने उद्योगपति पति अश्विन राम कुमार से अलग हो गई हैं। छह साल पहले दोनों की शादी हुई थी। एक साल से उनमें बोलचाल बंद थी और अब उन्होंने अधिकृत रूप से तलाक लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
पिछले कुछ सालों में फिल्मी बंधन के टूटने-बिखरने का चलन कुछ ज्यादा ही बढ़ गया है। दक्षिण में दिलीप व मंजू और अमला व विजय ने वैवाहिक बंधन रास न आने पर अलग-अलग राह पकड़ ली। मुंबई में ऋतिक रोशन-सुजैन के बाद अरबाज खान-मलाइका अरोड़ा का अलगाव सबको चौंका गया। आए दिन किसी न किसी आदर्श फिल्म दंपति का बंधन टूटने की खबर सवाल उठाती है कि आखिर फिल्मी हस्तियां कुछ बरस भी अपने जीवन साथी के साथ क्यों नहीं रह पातीं? कुछ मामलों में तो दस-बारह या पंद्रह साल साथ रहने के बाद रिश्ते का अचानक बिखर जाना अजीब लगता है। पिछले साल तक ‘भाग मिल्खा भाग’ में अभिनय के लिए मिले पुरस्कारों को अपनी पंद्रह साल पुरानी पत्नी अधुना को समर्पित कर अपनी सफलता का श्रेय उन्हें देते हुए फरहान अख्तर भावुक हो जाते थे। प्रेम और रिश्तों की प्रगाढ़ता के लगातार सार्वजनिक प्रदर्शन के बाद अचानक रिश्तों की डोर ऐसी टूट गई कि दोनों को साझा बयान जारी कर एलान करना पड़ा कि वे अपने वैवाहिक जीवन को खत्म कर रहे हैं।

बहरहाल, फिल्मी लोगों को क्योंकि आम दुनिया से परे का माना जाता है इसलिए उनके रिश्तों के बनने बिगड़ने की ज्यादा चर्चा हो जाती है। लेकिन यह जिज्ञासा तो होती ही है कि फिल्मी दुनिया में बंधन टूटने का चलन अचानक क्यों बढ़ गया है? फिल्मकार और अभिनेत्री अपर्णा सेन की बेटी कोंकणा सेन और रणबीर शौरी की शादी को सबसे आदर्श माना गया था। दोनों ने साथ-साथ ‘ट्रैफिक सिग्नल’ व ‘आजा नचले’ में काम किया। फिल्मों और अभिनय को लेकर उनकी रुचि बेहद परिष्कृत है। जाहिर है कि उनके रिश्ते में ज्यादा समझदारी होनी चाहिए थी लेकिन नहीं बन पाई। चार साल के बेटे रोहन का साथ भी उनके वैवाहिक रिश्ते को स्थायित्व नहीं दे पाया। कभी-कभी दूसरी औरत का रिश्ते के बीच आ जाना बंधन टूट जाने की वजह बना है। इसकी कई मिसाल है। ऐसे बंधन अक्सर दस बारह सालबाद टूटे। सैफ अली खान ने तेरह साल बाद पहली पत्नी अमृता सिंह को छोड़ दिया। निर्माता बोनी कपूर को पंद्रह साल पुरानी और लाइलाज बीमारी से ग्रस्त पत्नी से नाता तोड़ने में एक मिनट का भी समय नहीं लगा। आमिर खान करीब इतने ही समय में यह अहसास कर पाए कि कालेज के समय की दोस्त रही पत्नी सुनीता से उनकी कंपेटिबिलिटी खत्म हो गई है।

फिल्मी बंधन टिकाऊ भी होते हैं। लेकिन कुछेक अपवाद छोड़ कर ऐसे मामलों में यह पत्नी के त्याग और सहन शक्ति की वजह से ही संभव हो पाता है। फिल्म उद्योग में दो तरह के वैवाहिक बंधन जुड़ते हैं। एक में पत्नी का फिल्मों से कोई नाता नहीं होता। ज्यादातर मामलों में ऐसी शादियां तभी हो जाती हैं जब हीरो का करिअर शुरू हुआ होता है। अक्सर ऐसी पत्नियां घर की चारदीवारी तक सीमित रहती है। उनका सामाजिक दायरा कुछ मित्रों तक ही सिमटा रहता है। फिल्मी गतिविधियों में उनकी सक्रियता लगभग नहीं के बराबर होती है। वे सहेलियों के साथ क्लब जाती हैं, ताश खेलती है। महंगे कपड़े और आभूषण पहनने का शौक पूरा करती हैं। स्टार पति के क्रिया कलापों से वे आंख मूंदे रखती हैं। दूसरी शादी में पत्नी फिल्म से जुड़ी होती है। अक्सर ऐसे मामलों में पति अपनी होरोइन पत्नी को अभिनय जारी रखने के लिए कम ही प्रोत्साहित करते हैं।
फिल्मी लोगों के वैवाहिक बंधन में दरार आने का सिलसिला हाल फिलहाल कुछ ज्यादा बढ़ा है। पहले के सितारे ऐसी स्थिति को पनपने ही नहीं देते थे। निजी और व्यावसायिक जीवन को उन्होंने पूरी तरह अलग रखा था। हालांकि, उनके रोमांस के किस्सों के छींटे उनके घर को लगातार भिगोते रहे। लेकिन घरेलू पत्नियों के लिए उसका प्रतिरोध करना संभव नहीं हो पाया। गनीमत यह रही कि धर्मेंद्र को छोड़ कर बाकी घर-परिवार के प्रति इतने निष्ठावान जरूर रहे कि कई तरह की चर्चाओं में घिरने के बाद भी उन्होंने पारिवारिक मर्यादाओं को नहीं लांघा। धर्मेंद्र ने भी धर्म परिवर्तन कर हेमा मालिनी से दूसरी शादी की तो अपने आर्य समाजी पिता के निधन के बाद। हीरोइनें भी आमतौर पर फिल्मी लोगों खास कर हीरो से शादी करने का खतरा कम ही उठाती हैं। निर्देशक, लेखक उन्हें स्वीकार्य है, हीरो नहीं। दोनों अगर प्रतिष्ठित हों तो अहं का टकराव होने की आशंका रहती है। उनकी महत्त्वाकांक्षाएं टकरा जाती हैं। जिन हीरोइनों ने फिल्मी हीरो से शादी की उनमें से कुछ ने करिअर को खूंटी पर टांग कर अपने दिलफेंक पतियों की कारगुजारी की तरफ से आंखें मूंद लीं। शशि कपूर और अभिनेत्री जेनिफर की शादी टिकी जरूर रही लेकिन उसमें उथल-पुथल मचती रही। कहा जाता है कि शबाना आजमी से शशि कपूर की बढ़ती करीबी से त्रस्त होकर एक बार जेनिफर ने आत्महत्या तक की कोशिश की। ‘मदर इंडिया’ की शूटिंग के दौरान नरगिस को आग से बचाने वाले सुनील दत्त जब उनके पति बन गए तो नरगिस ने पहला काम यह किया कि करिअर को ताला लगा दिया और घर गृहस्थी में रम गर्इं। वहीदा रहमान से सुनील दत्त के रिश्ते की खबरों पर उन्होंने कान नहीं दिया। फिल्मी सक्रियता खत्म होने की भरपाई नरगिस ने सामाजिक सक्रियता बढ़ा कर की।

रा ज्यसभा की वे सदस्य रहीं। यह नरगिस की ही पहल थी जिसकी वजह से उनका वैवाहिक जीवन किसी बड़े विवाद में नहीं उलझा। लेकिन इसके लिए अपनी सबसे बड़ी पूंजी अभिनय को तिलांजलि देनी पड़ी। ऐसी ही परिपक्वता जया भादुड़ी ने दिखाई जिसकी वजह से करीब तीन दशक से ज्यादा का उनका वैवाहिक जीवन आज भी स्थिर है। इसके बावजूद रेखा रूपी भूचाल ने उसकी नींव झिंझोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। ‘अभिमान’ वाली कहानी घर में न दोहराई जाने लगे, इसके लिए जया ने अपना अभिनय दायरा समेट लिया। ऋषि कपूर-नीतू सिंह का पच्चीस साल से ज्यादा का वैवाहिक सफर कभी विवादों में नहीं रहा तो नीतू सिंह के संयम की वजह से। वैवाहिक रिश्ते को लगातार आॅक्सीजन मिलते रहने की व्यवस्था करने की खातिर कमाई व शोहरत का मोह उन्होंने एक झटके में छोड़ दिया।
फिल्मी बंधन में स्थायित्व के लिए अक्सर पत्नी बनी हीरोइन को त्याग करना पड़ा है। ऐसी एक भी मिसाल नहीं है कि किसी हीरो ने हीरोइन पत्नी के करिअर को संवारने के लिए खुद घर बैठना मंजूर किया हो। करिअर के आखिरी मुहाने पर हीरो-हीरोइन का रिश्ता निभ जाता है क्योंकि तब दोनों के लिए खोने को कुछ नहीं होता। दिलीप कुमार-सायरा बानो का वैवाहिक जीवन इसकी मिसाल है। डिंपल कपाड़िया और राजेश खन्ना के रिश्तों में लगातार बनी रही खटास से उनकी बेटी ट्विंकल ने खासा सबक सीखा। अक्षय कुमार से शादी के बाद उन्होंने अभिनय का मोह तो त्याग दिया लेकिन और फिल्मी पत्नियों की तरह सजने संवरने में व्यस्त रहने की बजाय उन्होंने अपनी क्षमता व ऊर्जा का इस्तेमाल लेखन में किया।
फिल्मी दुनिया में क्योंकि ग्लैमर की चकाचौंध है इसलिए फिल्मी सितारों का वैवाहिक बंधन हमेशा सुर्खियों में रहता रहा है। कुछेक के रिश्ते मिसाल बन गए तो कुछ रिश्तों के बनने-बिगड़ने की उधेड़बुन में उलझते रहे। किराए की कोख से तीसरा बच्चा करने की वजह से चर्चा में रहे और बच्चे का जन्मपूर्ण लिंग परीक्षण कराने के आरोप की वजह से विवादों में घिरे शाहरुख खान आदर्शपति की मिसाल माने जाते हैं। संघर्ष के दिनों की अपनी प्रेमिका गौरी के साथ उनका रिश्ता स्थाई रहना संभव हो पाया है तो इसलिए कि बीस साल से ज्यादा के फिल्मी सफर और उसमें अपार लोकप्रियता पा लेने के बावजूद काफी समय तक उनका नाम किसी हीरोइन के साथ नहीं जुड़ा। अपनी खास रोमांटिक शैली की वजह से खासतौर पर महिला वर्ग के ज्यादा चहेते रहे शाहरुख का विवाह जैसी व्यवस्था के प्रति निष्ठावान रहना सुखद लगता है। बंधन में दरार किसी भी वजह से आ सकती है और इसके लिए किसी एक पक्ष को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। ‘फर्स्ट लेडी आफ द इंडियन स्क्रीन’ देविका रानी की मिसाल तो सबसे दिलचस्प है। पति हिमांशु राय के साथ उन्होंने ‘बांबे टाकीज’ की स्थापना की। कई फिल्मों में अभिनय भी किया। पता नहीं क्यों सह कलाकार नजमुल से उन्हें इतना लगाव हो गया कि एक दिन किसी को बताए बिना वे उनके साथ भाग गर्इं। हिमांशु राय को ऐसा सदमा लगा कि उन्होंने बिस्तर पकड़ लिया। शशधर मुखर्जी, अशोक कुमार वगैरह काफी समझा बुझा कर देविका रानी को वापस लाए।
उन्नीस सौ चालीस के दशक तक फिल्म इंडस्ट्री में वैवाहिक रिश्ते उथल-पुथल वाले ही रहे। बाद में स्थिति थोड़ी सुधरी और रिश्तों में स्थायित्व आने लगा। और अब फिर बिखराव का दौर आ गया है। शायद समय का यह तकाजा है।१

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First Published on October 16, 2016 12:56 am

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