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दाना-पानीः अरबी पत्ते की सब्जी

अरबी बहुत प्राचीन काल से उगाया जाने वाला कंद है। कच्चे रूप में इसका पेड़ जहरीला हो सकता है। ऐसा इसमें मौजूद कैल्शियम आॅक्जेलेट के कारण होता है। हालांकि यह लवण पकने पर नष्ट हो जाता है।
Author July 30, 2017 00:45 am

मानस मनोहर

अरबी बहुत प्राचीन काल से उगाया जाने वाला कंद है। कच्चे रूप में इसका पेड़ जहरीला हो सकता है। ऐसा इसमें मौजूद कैल्शियम आॅक्जेलेट के कारण होता है। हालांकि यह लवण पकने पर नष्ट हो जाता है। अरबी की प्रकृति ठंडी होती है। अरबी के पत्तों से पत्तखेलिया नामक सब्जी बनती है। अरबी की किस्म हैं- राजाल, धावालु, काली-अलु, मंडले-अलु, गिमालु और रामालु। इन सबमें काली अरबी उत्तम है। अरबी रक्तपित्त को मिटाने और दस्त रोकने वाली है। इसे घुइयां, अरबी, अरुई नाम से जाना-पहचाना जाता है।
अरबी शीतल, भूख को बढ़ाने वाली, बल की वृद्धि करने वाली और स्त्रियों के स्तन में दूध बढ़ाने वाली है। अरबी सेवन से पेशाब अधिक मात्रा में होता है एंव कफ और वायु की वृद्धि होती है। अरबी कंद में धातुवृद्धि की भी शक्ति है। अरबी के पत्तों का साग वायु तथा कफ बढ़ाता है। पत्तबेलिया बेसन के कारण स्वादिष्ट और रुचिकर लगता है। उसका अधिक मात्रा में सेवन उचित नहीं है। अरबी की किसी भी किस्म को कच्ची न रखें। जिन लोगों को गैस बनती हो, घुटनों के दर्द की शिकायत और खांसी हो, उनके लिए अरबी का अधिक मात्रा में उपयोग हानिकारक हो सकता है।

पत्तखेलिया

यह अरबी के पत्तों को बेसन में लपेट कर बनाया जाता है। इसे बनाने के लिए अमचूर या खटाई का उपयोग बहुत जरूरी है। इसके अलावा गरम मसाला, हींग, हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, अजवाइन और नमक ले लें। एक कप बेसन में इन चीजों को डालें और दो बड़े चम्मच अमचूर पाउडर मिला लें। अमचूर इसलिए इसमें ज्यादा मिलाने की जरूरत होती है, क्योंकि अरबी खाने पर गले में खुजली पैदा करती है। अमचूर या खटाई उसमें मौजूद खुजली पैदा करने वाले लवण को समाप्त कर देती है। सारी चीजों को मिला कर थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए गाढ़ा घोल तैयार करें। ध्यान रहे, घोल ऐसा हो कि पत्तों पर आसानी से चिपक जाए। इतना पतला भी न हो कि बाहर निकलने लगे। पकौड़े बनाने के लिए जैसा घोल तैयार करते हैं, उससे थोड़ा गाढ़ा घोल रखें।

अरबी के पत्तों को नमक के पानी से धोकर साफ कर लें। एक चौड़ी प्लेट में पहले एक पत्ता बिछाएं। उस पर चम्मच से बेसन के घोल की परत चढ़ाएं। उसके ऊपर एक पत्ता और बिछाएं और उस पर भी बेसन की परत चढ़ाएं। इस तरह तीन-चार पत्ते रखते हुए परत चढ़ाएं और फिर उन्हें गोल करते हुए लपेट लें। इसी तरह जरूरत भर के पत्तों का रोल बना लें। अब इन रोल्स को इडली स्टैंड या स्टीमर में रख कर भाप से पकाएं। रोल पक जाएं तो उन्हें चार-छह घंटे के लिए फ्रिज में रख दें। जब रोल कड़े हो जाएं तो उन्हें गोल-गोल छोटे टुकड़ों में काट लें और फ्राइंग पैन या कड़ाही में हल्का सरसों तेल डाल कर कुरकुरा तल लें। उन्हें आप पकौड़े की तरह भी चाय के साथ खा सकते हैं और चावल-दाल-रोटी के साथ सूखी सब्जी के तौर पर भी। इन्हें तरी बना कर कोफ्ते की तरह भी इस्तेमाल किया जा सकता है। पत्तखेलिया की तरी वाली सब्जी बनाने के लिए टमाटर-प्याज की जगह राई पाउडर, दही और हल्के सौंफ पाउडर का इस्तेमाल करें तो इसका स्वाद उत्तम होगा। कच्चे नारियल के दूध में भी इसकी तरी स्वादिष्ट बनती है। तरी बनाने के लिए पहले एक कड़ाही में तेल गरम करें। राई, जीरा, हींग, साबुत धनिया, दालचीनी का छोटा टुकड़ा और कुछ दाने सौंफ का तड़का लगाएं। उसमें दही के घोल या कच्चे नारियल का दूध डालें। ऊपर से गरम मसाला, अमचूर, थोड़ा लाल मिर्च पाउडर और सरसों पाउडर डालें। इस घोल को चलाते हुए पकाएं, जैसे कढ़ी पकाते हैं। घोल तैयार हो जाए तो तले हुए पत्तखेलिया पर डालें और उसे हरा धनिया, अदरक और हरी मिर्च के टुकड़ों से सजाएं। रोटी या चावल के साथ गरमागरम खाएं।

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