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अपनी कार से करें प्यार

कार चलाना सबको पसंद है। सब चाहते हैं कि उनके पास अत्याधुनिक तकनीक वाली, तेज रफ्तार कार हो।
Author September 17, 2017 01:08 am
हर कोई अपनी कार को धो-पोंछ कर चमकाए रखता है, समय-समय पर सर्विसिंग वगैरह भी कराता रहता है। मगर फिर भी कम लोग ऐसे हैं, जो कार का सही तरीके से रखरखाव कर पाते हैं। कम लोग सही तरीके से गाड़ी चला पाते हैं। कार का सही रखरखाव और उसका सही संचालन न हो पाने के कारण उसके इंजन पर बुरा प्रभाव पड़ता है और वह जल्दी ही अपनी ताकत खो बैठती है। ऐसे में कार के रखरखाव और सही संचालन को लेकर पेश हैं रवि डे के सुझाव।

कौन नहीं चाहता कि उसके पास कार हो। शहरों में कार रोजमर्रा की जरूरतों में शामिल हो गई है। इसलिए ज्यादातर लोग कार खरीदते हैं। हर कोई अपनी कार को धो-पोंछ कर चमकाए रखता है, समय-समय पर सर्विसिंग वगैरह भी कराता रहता है। मगर फिर भी कम लोग ऐसे हैं, जो कार का सही तरीके से रखरखाव कर पाते हैं। कम लोग सही तरीके से गाड़ी चला पाते हैं। कार का सही रखरखाव और उसका सही संचालन न हो पाने के कारण उसके इंजन पर बुरा प्रभाव पड़ता है और वह जल्दी ही अपनी ताकत खो बैठती है। ऐसे में कार के रखरखाव और सही संचालन को लेकर पेश हैं रवि डे के सुझाव।

कार चलाना सबको पसंद है। सब चाहते हैं कि उनके पास अत्याधुनिक तकनीक वाली, तेज रफ्तार कार हो। हर कोई अपनी गाड़ी को चमचमाती रखना और देखना चाहता है। इसके लिए रोज उसे पोंछते और पॉलिश वगैरह लगाते रहते हैं। अगर थोड़ी भी खरोंच लग जाए तो तुरंत उसे ठीक कराते हैं। समय-समय पर सर्विस वगैरह भी कराते हैं। इस तरह मान लेते हैं कि वे अपनी गाड़ी का खयाल रखते हैं, उससे प्यार करते हैं। मगर क्या आप अपनी गाड़ी के मन और मिजाज को कभी समझने की कोशिश करते हैं? जब तक गाड़ी की भाषा नहीं समझेंगे, तब तक उसका ठीक से ध्यान नहीं रख पाएंगे
हमारे देश में गाड़ियां तो लोग खरीद लेते हैं, उसे धोते-पोंछते, चमकाते भी रहते हैं, पर हकीकत यह है कि उन्हें गाड़ी चलाने का सही तरीका नहीं पता। गाड़ी का सबसे अहम हिस्सा उसका इंजन होता है। अगर सही तरीके से गाड़ी न चलाई जाए, तो इंजन जल्दी कमजोर हो जाता है, उसका दम निकल जाता है और बार-बार उसकी मरम्मत करानी पड़ती है। गाड़ी के बाहरी हिस्से को ठीक-ठाक करके तो उसे नए जैसा रंग-रूप दिया जा सकता है, पर इंजन कमजोर हो जाए तो उसमें नए जैसा दम दे पाना संभव नहीं हो पाता। यह उसी प्रकार है जैसे एक बार आदमी के दिल का आॅपरेशन हो जाए तो उसे लेकर जीवन भर सावधान रहना पड़ता है। इसलिए अपनी कार को प्यार करते हैं तो कुछ बातों का ध्यान रखें।

रखरखाव

आमतौर पर लोग समझते हैं कि गाड़ी की नियमित सर्विस कराते रहने, उसे धोते-पोंछते रहने से उसका रखरखाव सही रहता है। मगर इतने भर से गाड़ी का रखरखाव नहीं हो जाता। इसके लिए कुछ और बातों का ध्यान रखना जरूरी है। ’जहां तक हो सके, गाड़ी को छांव में पार्क करें। हालांकि ऐसा करना अपने वश में नहीं होता। महानगरों में सोसाइटियों, दफ्तरों या फिर बाजारों की पार्किंग में ऐसी कम ही जगहें होती हैं, जहां गाड़ी पार्क करने की जगहों पर छाया हो। ऐसे में जब भी गाड़ी पार्क करें, खिड़कियों के कांच को हल्का-सा नीचे उतार दें, ताकि भीतर की गरमी और वाष्प बाहर निकलती रहे और बाहर की हवा भीतर प्रवेश कर सके। बहुत से लोग ऐसा इसलिए नहीं करते, क्योंकि उन्हें गाड़ी के अंदर धूल-धक्कड़ जमा होने का भय रहता है। मगर धूल से बचने के चक्कर में वे इस बात का ध्यान नहीं रख पाते कि तेज धूप में देर तक गाड़ी खड़ी रहती है और उसके कांच ऊपर चढ़े रहते हैं तो गाड़ी के अंदर गरमी का दबाव बनता है और उसके चलते आगे-पीछे के कांच और दूसरी जगहों की पैकिंग और सीलिंग खुलनी शुरू हो जाती है। इस तरह जब आप एसी चलाते हैं तो तेज धूप में उसका असर कम होता है।

’जब भी धूप में गाड़ी खड़ी करें, तो आगे और पीछे के कांच पर भीतर से परदा जरूर लगाएं। फोल्डिंग परदे बाजार में बहुत आसानी से और सस्ते मिल जाते हैं। डैश बोर्ड पर पड़ने वाली धूप न सिर्फ गाड़ी के इंटीरियर को धीरे-धीरे बदरंग कर देती है, बल्कि सबसे बुरा असर गाड़ी के एअर कंडीशनर पर डालती है।
’वाइपर का रबड़ हर साल या कम से कम दो साल में एक बार जरूर बदलवाएं। हमारे देश के ज्यादातर इलाकों में गरमी के मौसम में बहुत तेज गरमी और सर्दी के मौसम में बहुत तेज सर्दी पड़ती है। इसके चलते वाइपर का रबड़ सख्त हो जाता है और चलाने से कांच पर खरोंच डालने लगता है। ध्यान रखें कि कभी बगैर पानी के वाइपर न चलाएं।

’आजकल ज्यादातर गाड़ियों में कंप्यूटराइज्ड प्रणाली लगी है, जिससे आपको गाड़ी के इंजन आदि के बारे में, जैसे कूलेंट या इंजन आयल वगैरह कम होने पर संकेत मिलने लगते हैं। इन संकेतों को नजरअंदाज न करें। ’गाड़ी के टायरों का ध्यान रखें। बहुत-से लोग तब तक टायरों को घिसटते रहते हैं जब तक कि वे पूरी तरह घिस कर चिकने नहीं हो जाते। टायरों में पकड़ सही न होने से अक्सर उनके संतुलन खोने का खतरा बना रहता है, इसलिए टायरों को बदलने में कंजूसी न करें। यह भी जरूरी है कि हर छह महीने में एक बार व्हील बैलेसिंग जरूर करवा लिया करें।
’बहुत से लोग गाड़ी के भीतर सजावट के लिए कई चीजें लगवाते हैं। जैसे डैश बोर्ड पर किसी देवता की मूर्ति में बत्ती जलाने की व्यवस्था या फिर अतिरिक्त स्पीकर, अलग से हॉर्न, पहियों में और गाड़ी के नीचे नियॉन लाइटें वगैरह। इन सबके लिए स्थानीय मैकेनिक गाड़ी की बैट्री से जुड़े तारों में से कहीं जोड़ लगा कर इन सजावटी सामान को चलाने का जुगाड़ करते हैं। ध्यान रखें कि कभी भी गाड़ी की कंपनी फिटेड वायरिंग से छेड़-छाड़ न करें, यह खतरनाक हो सकता है।

चलते-चलते

अपनी कार से आपका असली लगाव इससे पता चलता है कि आप उसे चलाते कैसे हैं। बहुत सारे लोग गाड़ी चलाते समय सही तरीका नहीं अपनाते। खासकर युवा वर्ग गाड़ी को चमकती-दमकती, सजी-धजी तो रखने पर पूरा ध्यान रखते हैं, पर उसे चलाते समय इस बात का ध्यान नहीं रखते कि कब कितनी रफ्तार पर गियर बदलना है, ब्रेक लगाते समय क्लच का कैसे इस्तेमाल करना है। उनके चलाने में तारतम्यता नहीं होती। तेज रफ्तार गाड़ी भगाना बहादुरी समझते हैं। तेज चलती गाड़ी में एकदम से ब्रेक लगा कर रोकना और दूर तक घसीटते हुए ले जाना कौशल मानते हैं। इस तरह न सिर्फ टायर जल्दी घिसते हैं, बल्कि इंजन पर भी बुरा असर पड़ता है।

इसके अलावा जो लोग बहुत संभल-संभल कर गाड़ी चलाते हैं, उनमें से भी बहुत से लोग क्लच, गियर और ब्रेक का सही तालमेल नहीं बिठा पाते।
गाड़ी चलाते समय कुछ बातों का ध्यान रखें, तो इंजन की सेहत को लंबे समय तक बरकरार रहती है।
’अक्सर गाड़ी चलाते समय बहुत-सारे लोग अपने बाएं पैर को फुट रेस्ट पर रखने के बजाय क्लच पर रखे रहते हैं। वे समझते हैं कि उनके पांवों का दबाव क्लच पर नहीं पड़ रहा है, जबकि दबाव बनता रहता है, चाहे हल्का ही सही। इस तरह क्लच प्लेट जल्दी घिस जाती है और गाड़ी कहीं भी खड़ी हो सकती है। इसलिए क्लच पर तभी पांव रखें, जब गियर बदलना हो।

’इसी तरह ब्रेक का इस्तेमाल करते समय एक्सीलरेटर पर से पांव हटाएं और ब्रेक दबाएं। जहां तक हो सके तेज रफ्तार चलती गाड़ी में अचानक ब्रेक न लगाएं। एक कुशल चालक को पता होता है कि कितनी दूर पहले ब्रेक लगाना चाहिए, इसलिए वह एक्सीलरेटर से पांव हटा कर धीरे-धीरे ब्रेक पर दबाव बनाते हुए गाड़ी रोकता है। इससे गाड़ी की स्वाभाविक गति एकदम से बाधित नहीं होती और इंजन स्वस्थ बना रहता है।

’कई लोग एकदम से ब्रेक लगाते हैं और फिर एकदम से एक्सीलरेटर पर दबाव बना कर गाड़ी को तेज रफ्तार में भगाने की कोशिश करते हैं। यह गलत है। जब भी ब्रेक दबाएं उसके साथ ही गियर को निचले स्तर पर ले आएं। फिर गाड़ी की गति के अनुसार गियर बढ़ाएं। गाड़ी की भाषा को समझें। वह खुद बताती है कि कब गियर कम करना या बढ़ाना है। छोटे गियर पर तेज रफ्तार रखने पर इंजन की ताकत प्रभावित होती है।

कई लोग गाड़ी चालू करने के साथ ही एसी भी चला लेते हैं। यह ठीक नहीं है। गाड़ी को चालू करने के बाद सारे शीशे नीचे कर दें। कुछ देर सिर्फ पंखा चलने दें, ताकि गाड़ी के भीतर की गरमी बाहर निकल जाए। फिर जब गाड़ी को रफ्तार दें, कम से कम दूसरे गियर में चलाना शुरू करें, तब एसी चलाएं और खिड़कियों के कांच ऊपर कर दें। यानी गाड़ी के पांच मिनट चल लेने के बाद ही एसी चलाएं। इससे इंजन और एसी दोनों स्वस्थ रहेंगे।
’हर साल गरमी शुरू होने से पहले एसी की सर्विस जरूर कराएं।

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