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जितेश कुमार की कहानी : प्रेरणा

संजू आज बड़े ही मन से अपने काम में लग गया। दोपहर होते-होते उसे अपने ‘सपनों के घर’ को बनने का आभास हो चुका था। वह खुश था कि उसे कक्षा में डांट नहीं मिलेगी।
Author नई दिल्ली | July 17, 2016 01:50 am
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गर्मी की छुट्टी हो गई थी। इस बार भी संजू को ढेर सारा गृहकार्य मिला था। इसके अलावा कई परियोजना कार्य, जिसे वह प्रोजेक्ट कहता था, भी उसकी गर्मी की छुट्टी के मजा को किरकिरा कर रहा था। समाज विज्ञान की शिक्षिका रूना चौधरी ने सभी को ‘सुंदर-सा, प्यारा-सा सपनों का घर’ बनाकर लाने को कहा था। संजू तीन दिनों से परेशान था। घर बनाने के लिए उसने सबसे पहले एक स्केच बनाया। फिर उसी स्केच के अनुसार वह गत्तों पर गत्तों चिपकाते हुए घर बनाने की कोशिश करता। मगर अफसोस की बात यह थी कि शाम होने तक भी संजू घर तैयार नहीं कर पाता था। और अंत में खीझकर उसे छोड़ देता। घर बनाने की यह कोशिश आज दसवें दिन भी जारी रही। संजू घर बनाने में असफल रहा। मारे थकावट के कारण शाम को वह जल्दी सो जाता था।

आज सुबह वह एक चिड़िया की चहचहाहट से जल्दी जग गया था। बाहर आया तो देखा कि एक चिड़िया बड़ी ही तन्मयता से घर के सामने के पार्क के नीम के पेड़ पर घोंसला बनाने में व्यस्त है। यह दृश्य संजू को इतना सुंदर लगा कि वह उसे देखने में खो गया। एक-दो सूखी पत्तियां तो कभी दो-एक घासफूस को अपनी चोंच में दबाकर चिड़िया घर बनाने में लगी पड़ी थी। देखते-ही-देखते घोंसले ने अपना आकार ले लिया था।

संजू बड़े ही कौतूहल से यह सब देखता रहा। अगले दिन भी चिड़िया घोंसला बनाने में लगी रही। तीसरे दिन तब जाकर घोंसला बनकर तैयार था। चिड़िया चीं-चीं करते हुए खुशियां मना रही थी। संजू यह देखकर खूब खुश हो रहा था। अब तो संजू बार-बार खिड़की खोलकर उन्हें देखता रहता। शाम हो जाने के बाद चिड़िया की आवाज बंद हो जाती थी। वह सोचता-शायद चिड़िया थक गई है।

संजू दिनरात उसी के बारे में सोचा करता। वह दिन भर उसे देखा करता। इस कारण वह घर बनाने के अपने काम से पूरी तरह बेखबर था। वैसे भी उसे घर बनाने में कोई दिलचस्पी नहीं रह गई थी। रात को संजू जल्दी सो गया था। सोते ही सपनों में खो गया। उसने देखा कि वह चिड़िया उसके पास आई है। वह उससे खूब बातें कर रही है। संजू के साथ-साथ चिड़िया रानी भी खूब खुश हो रही है। आखिर दोनों में दोस्ती जो हो चुकी थी। अचानक संजू को कुछ याद आई तो वह दुखी-सा हो गया। चिड़िया ने उससे दुख का कारण पूछा तो उसने उससे सारी बातें कह दीं। उसे घर बनाने की बात याद आ गई थी। इस पर चिड़िया ने उससे कहा-पहले मेरा भी एक घोंसला था जिसमें मैं अपनी मां के साथ रहा करता था। पिछले दिनों आए तूफान में मेरा घोंसला गिर गया था और मेरी मां भी चल बसी थी। लेकिन मैंने हार नहीं मानी। जीवन में कुछ भी पाने के लिए संघर्ष के भरोसे मैं जीना चाहती थी। आज जब इधर से गुजर रही थी तो मुझे यहां मेरे रहने लायक सही वातावरण दिखा और मैं यहीं रहने के लिए एक घोंसला बनाया। देखो, मेरा ‘सुंदर-सा, प्यारा-सा घर’ बनकर तैयार है। यह मेरे सपनों का घर है। अब मैं यहीं से एक नई जिंदगी शुरू करना चाहती हूं। और तो और, अब तो मुझे तुम्हारे जैसा दोस्त भी मिल चुका है।

तभी चिड़िया की चीं-चीं की आवाज से संजू की नींद खुली तो सवेरा हो चुका था। उसे पता नहीं चला कि वह सपना ही देख रहा था। फिर भी वह काफी खुश था। ऐसा लगा जैसे वह सपना नहीं देख रहा था, बल्कि चिड़िया रानी उसे गा-गाकर, गीत सुनाकर कह रहा था-उठो, मेरे प्यारे दोस्त अपने काम में जुट जाओ। लगातार अभ्यास से तुम अवश्य ही सफल होगे। असफलता से घबराओ नहीं। संजू को लगा-जैसे वह इस बार घर बना ही लेगा। उसे न जाने एक विश्वास आ गया था।

संजू आज बड़े ही मन से अपने काम में लग गया। दोपहर होते-होते उसे अपने ‘सपनों के घर’ को बनने का आभास हो चुका था। वह खुश था कि उसे कक्षा में डांट नहीं मिलेगी। सपने में चिड़िया रानी से मिली प्रेरणा की वजह से वह एक घर बनाने में सफल हो गया। वह दौड़ते हुए खिड़की के पास गया। तभी चिड़िया को भी उसने अपनी खिड़की पर ही बैठा हुआ देखा। उसने उसे ढेर सारा दाना चुगाया।

गर्मी की छुट्टी समाप्त होने पर संजू भी अपने सपनों के घर का प्रतिरूप लेकर स्कूल गया। कक्षा में उसके सभी साथी इसे देखकर आश्चर्यचकित था। एक बार तो कक्षा के अध्यापक को भी लगा कि उसने किसी दूसरे से घर को बनवाया है, लेकिन उसने अपनी सारी बातें कक्षा में कह सुनाई। अध्यापक ने कहा-वाकई यह सबके लिए एक प्रेरणा की बात है। संजू के बनाए घर के प्रतिरूप को सभी ने बेहतर बताया। उसे सबसे सुंदर घर घोषित किया गया। घर आने पर संजू सबसे पहले उस चिड़िया के सामने ही खुशी में झूमने लगा।

(जितेश कुमार)

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