May 30, 2017

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कहानी: दोस्ती

रमन रोज सुबह अपनी साइकिल से अकेले ही स्कूल जाता। शाम को लौटते समय भी वह अकेला ही होता, क्योंकि उसके कोई दोस्त नहीं था।

Author October 9, 2016 01:22 am
प्रतिकात्मक चित्र।

प्रेरणा मालवीया

रमन रोज सुबह अपनी साइकिल से अकेले ही स्कूल जाता। शाम को लौटते समय भी वह अकेला ही होता, क्योंकि उसके कोई दोस्त नहीं था। रमन स्कूल में भी अक्सर चुपचाप रहता। वह किसी से ज्यादा बात नहीं करता। जब छुट्टी में सारे बच्चे मैदान में खेलते रमन चुपचाप एक पेड़ के नीचे बैठा रहता। कक्षा में भी उसको बहुत ही शांत बच्चों में गिना जाता। लंच में वह अकेले ही खाना खाता। और खेतपाल को बगीचे में काम करते हुए देखता रहता। खेतपाल स्कूल में माली है और पिछले कई सालों से वह यहां पर काम कर रहा है। जब सारे बच्चे कक्षा में शोर मचाते उस समय भी रमन खिड़की से बाहर खुले आकाश को एकटक निहारता रहता। इस कारण वह कई बार अपने दोस्तों के बीच मजाक का पात्र भी बनता। इस बात को लेकर अक्सर स्कूल के तरफ से रमन के माता-पिता को हिदायत भी दी गई। मगर सारे प्रयास असफल ही रहे।

समय अपनी गति से चल रहा था। कितने मौसम आए चले गए, कितनी ऋतुएं आर्इं चली गर्इं, मगर रमन की यही दिनचर्या रही। एक दिन रमन ने देखा की खेतपाल के साथ एक बच्चा उसी की उम्र का दिखाई दे रहा है। बात करके पता चला कि उसका नाम किसना है और वह खेतपाल का नाती है। यहीं से शुरू हुआ बातचीत का सिलसिला। अब लंच के समय में रमन उन दोनों को काम करते हुए देखता। धीरे-धीरे रमन और किसना की दोस्ती हो गई। रमन उसको अपनी कहानियों की किताबें पढ़ने के लिए देता । किसना उसको अपने गांव की, घर की, अपने दोस्तों की कहानी सुनाता। और किस तरह से वह पेड़ पर चढ़ जाता है और बैलगाड़ी के पीछे लटकने का तो अपना ही मजा है, यह बताते-बताते समय कब निकल जाता पता ही नहीं चलता।

अब रमन रोज लंच होने का इंतजार करता और घंटी बजते ही वह बगीचे की ओर भागता। इधर, किसना भी अपने दोस्त के आने का बेसब्री से इंतजार करता। दोनों साथ में लंच करते। रमन के टिफिन में तो पराठे, मैगी, बर्गर और तरह-तरह के पकवान होते जिनमें से बहुत सारे नाम तो किसना ने पहली बार सुने थे। मगर किसना के टिफिन में तो रोटी आचार और कई बार सिर्फ रोटी ही होती। इस कारण रमन अक्सर अपने टिफिन से कुछ हिस्सा किसना को दे देता और दोनों मिल बांटकर अपना खाना खाते और दुनिया जहान की बातें करते। इस दौरान यदि कोई रमन को देखे तो यकीन ही न कर पाए कि यह वही रमन है जो अक्सर कक्षा में इतना शांत रहता है।

अब रमन का टिफिन खाली घर पहुंचता इससे मम्मी काफी खुश थी। मगर उनको आश्चर्य भी हुआ कि यह चमत्कार कैसे हुआ, वर्ना उसको खाने खिलाने के लिए तो काफी जहमत करनी पड़ती है। खैर, जो भी हुआ ठीक है। कुछ दिन तो इसी तरह निकलें, लेकिन जल्दी ही रमन की वास्तविकता का मम्मी को पता चल गया। जब स्कूल में पालकों को मीटिंग के लिए बुलाया था। कक्षा अध्यापिका ने उनको बताया तो सारा माजरा समझ में आ गया। शाम को घर पर मम्मी ने रमन से बात की। उसने बिना डरे सारी बात सच-सच बता दी। रमन सोच रहा था कि अब मम्मी कल से खाना कम रखेंगी। यह सोच सोच कर वह काफी दुखी था और रात को ठीक से सो भी नहीं सका ।सुबह जैसे ही वह स्कूल के लिए तैयार होकर निकल रहा था, मम्मी ने कहां आज से किसना के लिए भी टिफिन ले जाना। यह सुनकर रमन की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वह मां के गले से लिपट गया। जल्दी से दोनों टिफिन बैग में रखे और स्कूल के लिए चल पड़ा। जल्दी से जल्दी किसना को मिलकर यह सारी बात बताने के लिए। इधर, मम्मी रमन को जाते हुए देखती है और सोचती है कि जन्म से सारे रिश्ते तय होते है मगर दोस्ती ही एक रिश्ता है जो हम बनाते हैं। ०

 

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First Published on October 9, 2016 1:21 am

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