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दाना-पानी- सूप और पुलाव

भोजन पकाना कला है, इसलिए यह तसल्ली से किया जाने वाला काम है। हड़बड़ी में और जल्दी तैयार किया गया भोजन पेट तो भर सकता है, पर तृप्ति नहीं देता।
Author July 16, 2017 02:01 am
लगन से भोजन पकाने से न सिर्फ उसका आवश्यक पोषण शरीर को पहुंचता है, बल्कि मन और जीभ को भी सुकून मिलता है।

भोजन पकाना कला है, इसलिए यह तसल्ली से किया जाने वाला काम है। हड़बड़ी में और जल्दी तैयार किया गया भोजन पेट तो भर सकता है, पर तृप्ति नहीं देता। इस तरह भोजन के आवश्यक पौष्टिक तत्त्व भी अक्सर नष्ट हो जाते हैं। भोजन का वास्तविक स्वाद नहीं मिल पाता। कहावत भी है, सहज पके सो मीठा होय। आजकल भागदौड़ भरी जिंदगी में, खासकर शहरों में, अधिकतर लोग फटफट तैयार हो सकने वाला भोजन पकाने में विश्वास करते हैं। इसके लिए बाजार में तरह-तरह के उपकरण आ गए हैं। बहुत-सारी डिब्बाबंद चीजें उपलब्ध हैं। यहां तक कि तैयार रोटी, पराठे, सब्जी भी डिबाबंद आने लगी है। खरीद कर लाओ, फटाफट गरम करो, खाओ और फुर्सत पा जाओ। बच्चों के बेहद पसंदीदा, दो मिनट में तैयार हो जाने वाले नूडल्स का बाजार इस कदर विकसित हो गया है कि इतनी तेजी से और इतनी मात्रा में शायद ही कोई डिब्बाबंद खाद्यपदार्थ बिकता हो। सूप के मामले में भी यही बात लागू होती है। शहरों में अब सूप का मतलब पैकेट में उपलब्ध सूप पाउडर हो गया है। सब्जियों और अनाजों को काट-छांट कर मूल रूप से सूप बनाने की मशक्कत बहुत कम लोग करते हैं। मगर ऐसी चीजें सेहत के लिए कितनी नुकसानदेह साबित हो रही हैं, अनेक आंकड़े इसके गवाह हैं। इसलिए पहले जमाने में भोजन पकाना बहुत पवित्र और लगन का काम माना जाता था। अब एक नए शोध में बताया गया है कि जो लोग भोजन पकाने में रुचि लेते हैं, उनमें रचनात्मकता का विकास होता है। तनाव और चिड़चिड़ापन दूर होता है।

इसलिए भोजन पकाते समय हड़बड़ी न करें। लगन से भोजन पकाने से न सिर्फ उसका आवश्यक पोषण शरीर को पहुंचता है, बल्कि मन और जीभ को भी सुकून मिलता है। बाजार में पैकेटों में उपलब्ध टमाटर, मशरूम, मिक्स वेजिटेबल आदि सूप तो आपने बहुत पीए होंगे, पर घर में राजमा का सूप बना कर पीएं, उन सबका स्वाद भूल जाएंगे। खासकर बीमार लोगों, बुजुर्गों, बच्चों और पाचन संबंधी विकार से परेशान लोगों के लिए यह सूप बहुत लाभदायक साबित होता है। कभी-कभी रात का भोजन लेने के बजाय सिर्फ यह सूप लें, पूरा पोषण मिलेगा और पेट को भी आराम मिलेगा। इसे बनाने में थोड़ी मशक्कत जरूर करनी पड़ेगी, पर इसे पीकर जो आनंद मिलेगा, उससे सारी मशक्कत भूल जाएंगे।

राजमा सूप

राजमा को रात भर भिगो कर कुकर में नरम होने तक उबालें। टमाटर, गाजर, चुकंदर, प्याज, फ्रेंच बीन्स, लहसुन छोटा-छोटा काट लें। एक कड़ाही में हल्का-सा देसी घी गरम करें। उसमें सारी सब्जियों को नरम होने तक चलाते हुए भून लें। इसी में उबले हुए राजमा मिलाएं। ठंडा करके इन सबको मिक्सी में पीस लें। इस मिश्रण को एक बार फिर कड़ाही में डाल कर गरम पानी डाल कर चलाते हुए धीमी आंच पर उबाल लें। अब इसमें हरा धनिया पत्ता, हरे प्याज के पत्ते, अदरक और चाहें तो हरी मिर्च बारीक काट कर मिला लें। थोड़ी देर उबालने के बाद उतार लें। फिर इसमें नमक और कुटी काली मिर्च डाल कर गरमागरम परोसें।
इसमें राजमा प्रोटीन और फाइवर की जरूरतें पूरी करेगा, तो इसमें मिला हुआ अदरक और हरा धनिया आपके रक्त का प्रवाह सुचारु बनाएगा, खून में आक्सीजन की मात्रा संतुलित रखेगा। सबसे बड़ी बात कि यह पचाने में बहुत आसान है।

राजमा पुलाव

पुलाव पकाना कारीगरी का काम है। इसके लिए लोग कई तरीके अपनाते हैं। मगर पारंपरिक तरीका वही है कि पहले चावल को आधा पकाएं। उसका माड़ निकाल कर अलग रख लें। अपनी पसंद की सब्जियां लें और उनके साथ चावल को पकाएं। राजमा पुलाव बनाते समय भी यही तरीका अपनाना चाहिए। पुलाव का मजा यह है कि इसमें सब्जियां और चावल एक साथ खाए जा सकते हैं, अलग-अलग पकाने की जरूरत नहीं पड़ती। फिर यह खाने में हल्का और स्वादिष्ट होता है, इसलिए भी लोग पसंद करते हैं।  राजमा पुलाव पकाने का फायदा यह है कि दूसरे पुलाव में जो दालों से मिलने वाले प्रोटीन की कमी रह जाती है, वह इसमें पूरी हो जाती है। खासकर बच्चों के लिए यह सबसे उत्तम आहार है। बच्चे हर तरह की दाल खाने में नाक-भौं सिकोड़ते हैं। वे राजमा बेशक पसंद करते हों, पर उन्हें रोज एक ही चीज दी जाए तो ऊब जाएंगे। इसलिए राजमा-पुलाव बेहतर विकल्प है।

इसे पकाने के लिए राजमा को रात भर भिगो कर हल्के हल्दी और नमक के साथ कुकुर में तीन-चार सीटी तक उबाल लें, ताकि राजमा फटें नहीं, नरम हो जाएं। चावल को आधा पका लें। अब फ्रेंच बीन्स, गाजर, हरा प्याज, अदरक के छोटे-छोटे टुकड़े काट लें। कड़ाही में घी गरम करें। घी की मात्रा थोड़ी अधिक रखें। घी गरम हो जाए तो जीरा, लौंग, इलाइची, तेजपत्ता, कुछ दाने काली मिर्च के साबुत और दालचीनी का एक छोटा टुकड़ा लेकर तड़का दें। तड़का बन जाए तो उसमें सारी कटी हुई सब्जियां डालें। हल्का नरम होने तक भूनें। फिर उसमें थोड़ी-सा सब्जी मसाला और हल्दी डालें। (अगर घर में केसर उपलब्ध है तो हल्दी के बजाय उसका इस्तेमाल करें। इसके लिए चार चम्मच ठंडे दूध में केसर के तीन-चार दाने भिगो कर कुछ देर के लिए रख दें। पुलाव तैयार हो जाए तो उसे ऊपर से डालें।) सब्जियों में उबला हुआ राजमा मिलाएं और उसके बाद उबला हुआ चावल डाल कर मिला सें। फिर कड़ाही को ठीक से बंद करके ढंक दें। जितनी हल्की आंच हो सके रखें और करीब बीस मिनट तक पकने दें। चावल पक जाएं तो गैस बंद कर दें और कड़ाही को कुछ देर ढकी रहने दें। राजमा चावल तैयार है। इसे हरी चटनी और खीरे के रायते के साथ खाएं। कई बार बचे हुए बासी चावल को फ्राई करके भी कुछ लोग खाते हैं। बच्चे इसे बहुत पसंद करते हैं। इसलिए जब चावल फ्राई करें तो उसमें सब्जियों के साथ उबले हुए राजमा भी मिला दें। उसका पोषण बढ़ जाएगा। ०

 

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First Published on July 16, 2017 2:01 am

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