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बाल कहानी- करनी का फल

नदी के तट से लगा एक बहुत सुंदर गांव है झरिया। चारों और लहलहाते खेत, मीठे और स्वादिष्ट फलों से लदे पेड़ इस गांव की खुशहाली की दास्तान बयां करते ।
Author May 14, 2017 05:39 am
प्रतीकात्मक चित्र

प्रेरणा मालवीया

नदी के तट से लगा एक बहुत सुंदर गांव है झरिया। चारों और लहलहाते खेत, मीठे और स्वादिष्ट फलों से लदे पेड़ इस गांव की खुशहाली की दास्तान बयां करते । प्रकृति का बड़ा ही सुंदर दृश्य यहां देखने को मिलता। कचरू और उसकी पत्नी भी इसी गांव में रहते हैं। दोनों बहुत मेहनती और ईमानदार हैं। बस कमी थी तो घर में एक संतान की। झरिया गांव जहां अपनी सुंदरता के लिए दूर-दूर तक जाना जाता, उतना ही कचरू के बनाए सुंदर- सुंदर रंग-बिरंगे जूतों के लिए भी। उनके बनाए जूते झरिया और आसपास के कई गांवों के बच्चे पहनते। आसपास जब भी कहीं मेला लगता कचरू को उसमें अवश्य ही बुलाया जाता और उसके जूते पूरे मेले में आकर्षण का केंद्र होते। जो भी एक बार उनके बनाए जूते पहन लेता वह हर बार उन्हीं जूतों की मांग करता। बच्चों की टोली इन रंग-बिरंगे जूतों को पहन कर खुशी से झूम उठती। कचरू और उसकी पत्नी इन बच्चों के चेहरे की खुशी देख कर अपने सारे गम भूल जाते और फिर से नई ऊर्जा और जोश से अपने काम में लग जाते। इस काम से उन्होंने काफी धन भी अर्जित कर लिया। मगर इसका उन्हें जरा भी अभिमान रहता। कितने मौसम आए, चले गए, मगर कचरू का यह काम अपनी गति से चलता रहा। कचरू की ख्याति दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है । उसकी यह ख्याति गांव में कुछ लोगों की ईर्ष्या का कारण भी बनने लगी। जैसे उन्हीं के पड़ोस में रहने वाले दो नवयुवक लखन और रजक उनसे ईर्ष्या करते। दोनों बहुत ही आलसी हैं। बिना काम के धन कमाने का सोचते। गांव में सभी लोग उनकी करतूतों से परेशान हैं। इस कारण उन्हें गांव में कोई काम नहीं देता, जिससे उन्हें अब चोरी करने की आदत भी पड़ गई।

धीरे-धीरे उनके खाने के भी लाले पड़ने लगे। इससे बचने के लिए उन्होंने एक तरकीब सोची। अगर कचरू के बनाए जूते शहर जाकर ऊंचे दामों में बेचें तो कम मेहनत करके भी ज्यादा धन कमा लेंगे। वैसे भी शहरों में इस तरह के जूतों की भारी मांग होती है। लोग इसके मुंहमांगा दाम भी देकर जाते हैं। इसको लेकर उन्होंने कचरू से बात की और आधा मुनाफा देने का भी वादा किया। कचरू ने भी इस बात से सहमति जताई। कचरू के बनाए जूते वे शहर में ले जाकर काफी महंगे दामों में बेचते और उसे कम मुनाफा देते, यह कहते हुए कि शहरों में इस तरह की चीजों को ज्यादा पसंद नहीं किया जाता है। कचरू और उसकी पत्नी कभी शहर नहीं गए थे। इस कारण उन्हें इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि वे दोनों मिलकर उनको धोखा दे रहे है । उधर, वे दोनों अपनी इस कुटिलता पर मन ही मन बहुत प्रसन्न होते। यह सिलसिला कई दिनों तक चलता रहा। लखन और रजक ने बेईमानी करके इस तरह से काफी धन एकत्र कर लिया। जब उनके पास काफी धन एकत्र हो गया तो उन्होंने इस धन से सोना खरीदने की योजना बनाई।

शहर से सोना लेकर वापस अपने गांव की ओर आते समय उन दोनों को पुलिस ने पकड़ लिया। इतना सोना खरीदने के पीछे की वजह बताने पर पुलिस को यकीन नहीं हुआ, क्योंकि जितना मुनाफा वे बता रहे थे, उस धनराशि से इतना सोना खरीदना तो बहुत ही मुश्किल है। और इससे पहले भी वे कई बार चोरी के जुर्म में जेल जा चुके हैं । इस कारण उनकी कही बातों पर पुलिस को जरा भी भरोसा नहीं हुआ। पुलिस को यही लगा कि यह सोना चोरी का है या वे दोनों मिल कर जरूर कचरू को धोखा दे रहे हैं। अब उनके पास कोई इसके अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा था कि वे पुलिस को सारी बातें सही-सही बता दें। थक-हार कर उन्होंने पुलिस को सारी बातें साफ-साफ बता दीं कि किस तरह से उन्होंने कचरू और उसकी पत्नी को धोखा दिया। उनकी मेहनत का उचित दाम भी नहीं दिया और झूठ भी बोला। कचरू और उसकी पत्नी को गांव से तुरंत बुलाया गया। वास्तविकता जानकर भोले-भाले कचरू को बड़ा दुख हुआ । पुलिस ने सोने में से कचरू और उसकी पत्नी को उनकी मेहनत का हिस्सा उनको देकर उन दोनों बदमाशों को जेल में डाल दिया। इस प्रकार चोरों को अपनी करनी का फल मिला। कचरू और उसकी पत्नी पुलिस के इस इंसाफ से खुश हुए। कचरू सब कुछ भूलकर फिर से अपने काम में लग गया। १

 

 

 

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