December 05, 2016

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नन्ही दुनिया: अनोखी दिवाली

शेर सिंह जब महामंत्री हैवी हाथी से इस बारे में पूछते तो वह बोलते, ‘चतुरी के साथ-साथ सभी हमें इस त्योहार पर सरप्राइज देना चाहते हैं।’ रेनू सैनी की कहानी।

Author October 30, 2016 01:49 am
इस साल 30 अक्टूबर, रविवार को दिवाली मनाई जाएगी।

रेनू सैनी

नंदनवन में सभी त्योहार प्रेम से और मिलजुल कर मनाए जाते थे। दिवाली आने वाली थी और सभी दिवाली को जोर-शोर से मनाए जाने की योजनाएं बना रहे थे। शेर सिंह का कहना था कि हर बार हम नंदनवन में सभी त्योहारों के माध्यम से एक मिसाल कायम करते हैं। इसलिए इस बार भी कोई ऐसी तरकीब खोजी जाए जिससे न सिर्फ नंदनवन में दिवाली की गूंज हो बल्कि सभी प्राणी हमारे द्वारा मनाई गई दिवाली की मिसाल पेश करें। यह सुनकर सभी पशु-पक्षी आपस में विचार करने लगे। रानी बया, गौरी गौरैया और मीकू हिरन मिट्टी के खिलौने और दीये बनाते थे। चतुरी लोमड़ी पूरे नंदनवन में सबसे होशियार मानी जाती थी। उसकी योजनाएं और तरकीबें हमेशा सराही जाती थीं। शेर सिंह की घोषणा सुनकर पूरे नंदनवन के पशु-पक्षियों का जमघट चतुरी के घर लगा हुआ था । चतुरी सोच-विचार में डूबी हुई थी कि अनोखी दिवाली मनाने के लिए क्या किया जाए ? पटाखे, आतिशबाजी चलाना, एक-दूसरे को मिठाई देना, नए कपड़े पहनना तो इक्कीसवीं सदी में पुरानी बात हो चुकी थी। हर त्योहार में मिठाई और उससे जुड़ी रस्में तो होती ही हैं।

कुछ दिनों तक चतुरी सोच-विचार में डूबी रही। आखिर उसे योजना सूझ ही गई। वह सभी पशु-पक्षियों को इस योजना में शामिल कर चुकी थी। शेर सिंह जब महामंत्री हैवी हाथी से इस बारे में पूछते तो वह बोलते, ‘चतुरी के साथ-साथ सभी हमें इस त्योहार पर सरप्राइज देना चाहते हैं।’ यह सुनकर शेर सिंह की उत्सुकता बढ़ गई कि आखिर इस बार दिवाली पर ऐसा अनोखा क्या होने वाला है जो चतुरी के साथ-साथ पूरा उन्हें नंदनवन सरप्राइज देना चाहता है।
आखिर दिवाली का दिन भी आ गया। उस दिन पूरे नंदनवन में चहल-पहल थी। नंदनवन सुंदर पुष्पों और लताओं से सजाया जा चुका था। नंदवन के बड़े पार्क में सभी जानवर पूजा के बाद दिवाली मिलन के लिए इकट्ठे होने वाले थे।

रात्रि के समय अचानक पूरे नंदनवन की लाइट चली गई। शेरसिंह यह देखकर परेशान हो गए। उन्होंने मीकू बंदर को जांच करने का काम सौंपा तो वह बोला, ‘महाराज। आज पूरी रात बिना लाइट के ही गुजारनी होगी। दिवाली की अमावस्या की रात बिना लाइट के। यह सुनकर उन्हें त्योहार का मजा फीका नजर आने लगा। तभी महामंत्री उनके पास आया। पूजा का वक्त हो गया था। पूजा करने के बाद महामंत्री हैवी हाथी उन्हें गुफा से बाहर लेकर आया तो वह यह देखकर दंग रह गए कि बिना लाइट के पूरा नंदनवन जगमग-जगमग कर रहा था। अब तो उनके आश्चर्य की सीमा न रही। एक नहीं अपितु अनेक दीये दाएं-बाएं, ऊपर-नीचे, आगे-पीछे बहुत ही खूबसूरत डिजाइन से सजे हुए थे। जगमग करते दीयों ने लाइट की रोशनी को मात कर दिया था। कलात्मक और आकर्षक दीयों से जगमगाती रोशनी में सभी पशु-पक्षी नंदनवन के पार्क में अपने-अपने घरों में पूजा करके महाराज का इंतजार कर रहे थे।

राजा शेर सिंह ने पार्क के अंदर प्रवेश किया तो वह यह देखकर दंग रह गए कि दीयों से बड़ी ही खूबसूरती से स्वागतम् लिखा गया था। उनके बैठने के स्थान पर सिंहासन के साथ-साथ दीए भी लगे हुए थे। शेर सिंह सिंहासन पर बैठे। उन्होंने सभी को दिवाली की बधाई दी। इसके बाद बंदर, हाथी, मोर, हिरन, कठफोड़वे आदि ने दीयों के साथ नृत्य प्रस्तुत कर उन्हें अचंभित कर दिया। पशु-पक्षियों का दीयों के साथ नाच देखकर ऐसा प्रतीत होता था कि उन्होंने इसके लिए बहुत मेहनत की है और महाराज शेर सिंह तो इस काम को अंजाम देने वाले की चतुराई और प्रतिभा पर चकित थे कि किस तरह उसने दीयों के माध्यम से पशु-पक्षियों से नृत्य करा कर रोशनी की कमी को दूर कर दिया था ।

वाकई पूरा नंदनवन जहां तक देखो वहां तक मिट्टी के सुंदर दीयों से जगमग कर रहा था। साधारण और कलात्मक मिट्टी के दीयों ने रोशनी की अद्भुत बरसात अमावस्या की रात नंदनवन में की थी। ऐसा लग रहा था कि प्राकृतिक रोशनी से पूरा नंदनवन नहा उठा है। नृत्य और अन्य कार्यक्रम देखकर सभी ने मिल कर इको-फ्रेंडली पटाखे जलाए और अंत में शेरसिंह को मंच पर दो शब्द बोलने के लिए आमंत्रित किया गया। महाराजा शेर सिंह मंच पर आकर बोले, ‘वाकई, सभी पशु-पक्षियों ने मुझे बहुत ही मनोरम और सुंदर सरप्राइज दिया है। लेकिन जिसका दिमाग इन सबके पीछे है, मैं उसे यहां बुलाकर कुछ बातें जानना चाहता हूं।’ यह सुनकर चतुरी लोमड़ी आगे आई तो शेरसिंह बोले, ‘यह सरप्राइज तुमने इतनी जल्दी कैसे दिया क्योंकि लाइट तो अभी कुछ ही देर पहले गई है।’ इस पर चतुरी मुस्कराते हुए बोली, ‘महाराज, लाइट बंद करना भी तो सरप्राइज का एक हिस्सा है।’

यह सुनकर दंग रह जाने की बारी महाराज की थी। वह बस यही बोल पाए, ‘कैसे’, इस पर चतुरी बोली, ‘महाराज, आप चाहते थे कि हम हर त्योहार की तरह दिवाली पर सबको एक मिसाल दें तो आज हमने बिजली की बचत करके यही संदेश देने का प्रयास किया है कि समझदारी से त्योहार के आनंद के साथ-साथ फिजूलखर्ची से भी बचा जा सकता है। लोग दिवाली के दिन बिजली की रंग-बिरंगी लड़ियां लगाकर कई गुना बिजली की खपत कर देते हैं। यही कारण है कि दूरदराज तक बिजली नहीं पहुंच पाती। अगर समझदारी से बिजली का उपयोग किया जाए तो सहजता से सभी को उचित रूप से बिजली और पानी मिल सकता है।

उसकी बात सुनकर शेर सिंह बोले,‘बिल्कुल चतुरी। तुम सही कह रही हो और ऐसा सिर्फ बातें बनाने से नहीं होता बल्कि कर के दिखाने से भी होता है। मैं वाकई बहुत प्रभावित हूं। हम सभी उपदेश देने में और बातें बनाने में विश्वास रखते हैं, काम की खुद शुरुआत करने में नहीं। और आज दिवाली पर बिजली बचाने की यह शुरुआत बहुत अच्छी है। आगे से हम सभी प्रयास करेंगे कि बिजली व्यर्थ न जलाएं और पानी भी व्यर्थ न बहाएं, तभी हम दिवाली की शुरुआत पर किए गए इस नेक कार्य के परिणाम को सही मायनों में पा पाएंगे।’ उनकी बात पर सभी पशु-पक्षी एक स्वर में बोले, ‘जी महाराज, हम सब भी बिजली और पानी व्यर्थ नहीं गवांएंगे। इसके बाद महाराज ने चतुरी के साथ-साथ कार्य से जुड़े सभी पशु-पक्षियों को सम्मानित किया और खुशी से झूमते हुए दीयों की सुंदर कतार को देखने लगे । १

 

 

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First Published on October 30, 2016 1:46 am

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