December 08, 2016

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कहानी: आलसी

परीक्षा के दिनों में सभी बच्चे पढ़ाई में लगे हुए थे। सभी को अच्छे नंबरों से पास होना था।

Author November 6, 2016 01:30 am
आलसी ।

मीरा

संजय बहुत ही आलसी किस्म का लड़का था। घर में सबसे छोटा होने के कारण सभी उसे बहुत प्यार करते थे। इस कारण वह थोड़ा जिद्दी भी हो गया था। उसको लगता दुनिया में सब कुछ जो भी हो रहा है वह अपने आप ही हो रहा है। इसलिए ज्यादा मेहनत करने की जरूरत नहीं है। उसका मन किसी भी काम में नहीं लगता। उसकी इस बात से उसके घर वाले बहुत ही परेशान थे। घर पर भी अपने काम को वह नहीं करता या अपने अन्य भाई-बहनों पर डाल देता।
उसका हरदम यही प्रायस रहता की उसे कोई काम न करना पड़े। इस कारण कई बार उसको नुकसान भी उठाना पड़ता मगर इसका उस पर कोई असर नहीं हुआ। स्कूल से भी कई बार उसकी इस बात को लेकर शिकायत आ चुकी थी। जब उसका मन होता वह स्कूल जाता, नहीं होता तो नहीं जाता।

किसी की भी डांट का उस पर कोई असर नहीं होता। परीक्षा के दिनों में सभी बच्चे पढ़ाई में लगे हुए थे। सभी को अच्छे नंबरों से पास होना था। इसी कारण शाम को खेल का समय भी कम कर दिया था। मगर संजय पर इस बात का कोई असर नहीं था। वह बच्चों से कहता कि अरे क्या हम परीक्षा से इतने डरते है जो उसके आते ही खेलना छोड़ दें। वह रोज की तरह मैदान जाता और खेलता। कई बार वह अकेला ही खेलता। क्योंकि उसके सारे दोस्त तो परीक्षा की तैयारी में लगे हुए थे। उसको इस बात की जरा भी चिंता नहीं थी की अगर उसने पढ़ाई नहीं की तो वह फेल हो जाएगा। हालांकि, उसके दोस्तों ने उसको यह बात कई बार समझाने की कोशिश करी मगर सारे प्रयास विफल ही रहे। मां-पिता तो उसको समझा-समझा कर पहले ही थक चुके थे।

और आखिरकार परीक्षा का दिन भी आ गया। संजय ने जब प्रश्नपत्र देखा तो उसका सिर चकरा गया, क्योंकि उसे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था। ये प्रश्न उसने पहले कभी नहीं पढेÞ थे। उसने परीक्षा हाल में नजर दौड़ाई, सभी बच्चे लिख रहे थे सिर्फ संजय को छोड़कर। यह देखकर वह बहुत उदास हो गया। उसका मन रोने का कर रहा था। और उसे अपनी बेबकूफी पर काफी गुस्सा भी आ रहा था।जब परीक्षा परिणाम आया तो संजय को जिस बात का डर था वही हुआ। वह दो विषयों में पास नहीं हो पाया। उसके सारे दोस्त पास हो गए थे, इस कारण वे सभी काफी खुश थे। और अब वह फिर से शाम को मैदान में क्रिकेट खेलने लगे। संजय इस घटना से काफी दुखी था और उसे अपनी गलती पर काफी पछतावा हो रहा था।

उसे यही लग रहा था कि अगर उसने समय रहते पढ़ाई की होती तो आज यह दिन नहीं देखने को मिलता। वह पूरी तरह से टूट गया। मगर उसके दोस्तों ने उसे समझाया कि अभी तुम्हारे पास एक अवसर और है अगर तुम इस बार अच्छे से मेहनत करते हो तो तुम भी पास हो जाओगे । और फिर हम सब एक साथ अगली कक्षा में होंगे। यह सुनकर संजय की आंखों से आंसू बहने लगे। और उसने अपने दोस्तों से वादा किया कि वह इस बार जरा भी लापरवाही नहीं करेगा और जी जान से पढ़ाई करेगा और पास होकर ही रहेगा। उसके दोस्तों ने उसकी इस बात की सराहना की। संजय अब मेहनत करने लगा था, जहां उसे कठिनाई महसूस होती वह मास्टरजी और दोस्तों के पास जाकर समझ लेता।

इस बार संजय ने पूरी मेहनत के साथ परीक्षा दी और उसका परिणाम भी अच्छा रहा । संजय सभी विषयों में पास हो गया और अब वह अपने दोस्तों के साथ अगली कक्षा में होगा । उसे यह बात भी समझ में आ गई कि बिना मेहनत के सिर्फ सोचते रहने से कुछ नहीं होता है इसके लिए मेहनत करनी होती है। और मेहनत कभी बेकार नहीं जाती। उसकी इस बात से उसके सभी दोस्त और परिवार वाले काफी खुश थे। ०

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First Published on November 6, 2016 1:27 am

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