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सुंदरता का घमंड

सुंदरवन में चीकू नाम का खरगोश रहता था। वह अत्यंत सुंदर था। अपनी सुंदरता के कारण ही वह अन्य जानवरों से दूर रहता था। एक दिन मोटू भालू सुबह की सैर पर निकला हुआ था। उसे रास्ते में चीकू मिल गया।
Author July 2, 2017 02:13 am
हाथी दादा को चीकू का जवाब सुन कर बड़ा क्रोध आया, पर उन्होंने उसे छोटा जानवर समझ कर कुछ नहीं कहा।

गोविंद भारद्वाज

सुंदरवन में चीकू नाम का खरगोश रहता था। वह अत्यंत सुंदर था। अपनी सुंदरता के कारण ही वह अन्य जानवरों से दूर रहता था। एक दिन मोटू भालू सुबह की सैर पर निकला हुआ था। उसे रास्ते में चीकू मिल गया। चीकू ने उसे देख कर मुंह फेर लिया। मोटू ने उसे टोकते हुए पूछा, ‘क्यों चीकू, मुझसे नजर बचा कर कहां जा रहे हो?’ ‘मैं काले और मोटे लोगों के मुंह नहीं लगता।’ चीकू ने तपाक से कहा।  मोटू भालू अपमान का घंूट पीकर चुपचाप अपने रास्ते पर चल दिया। अगले दिन चीकू नदी के किनारे हरी-हरी दूब खाने में लगा हुआ था। वहां पानी पीने के लिए हाथी दादा अपने परिवार के साथ आ गए। हाथी दादा को देख कर भी चीकू अपना पेट भरने में लगा रहा। दादा ने पूछा, ‘अरे चीकू जी बहुत बड़े हो गए हो, जो हैलो-हाय भी नहीं करते?’ चीकू ने हाथी दादा की बात अनसुनी कर दी। फिर दादा ने पूछा, ‘क्यों भई, हमसे क्या नाराजगी है?’  चीकू बोला, ‘मैं पर्वत से मोटे-भद्दे शरीर और अजगर जैसे संूड़ वाले जानवरों से बातचीत नहीं करता। तुम्हारे बड़े-बड़े दांत कितने खराब लगते हैं… छी…।’

हाथी दादा को चीकू का जवाब सुन कर बड़ा क्रोध आया, पर उन्होंने उसे छोटा जानवर समझ कर कुछ नहीं कहा। बस इतना अवश्य कहा, ‘छोटा मुंह और बड़ी बात।’चीकू नदी में अपनी सुंदर परछाई देख कर फूला नहीं समा रहा था। शाम को हाथी दादा और मोटू भालू ने जब कालू लंगूर को चीकू की हरकतों के बारे में बताया तो उसे यकीन नहीं हुआ। वह उससे मिलने चीकू के घर पहुंच गया। ‘चीकू घर में हो क्या?’ कालू ने आवाज लगाई। खरगोश की पत्नी बाहर आई और बोली, ‘वे तो बाजार गए हुए हैं।’ कालू लंगूर वापस चल दिया। थोड़ी दूर जाकर उसे ऐसा लगा कि चीकू की पत्नी झूठ बोल रही है। वह फिर चीकू के घर पहुंचा। चीकू घर में आराम कर रहा था। कालू को यह देख कर बहुत गुस्सा आया। उसने चीकू से कहा, ‘अबे घर में होकर भी अपने आप को घर ेमें न होने की झूठी बात कहलवाता है। तुझे शर्म नहीं आती।’

‘तुम्हें मुझसे क्या काम है?’ चीकू ने पूछा। ‘मैंने सुना है कि तू अपने आप को बड़ा सुंदर समझता है और दूसरे जानवरों को कुरूप। इसलिए किसी से बातचीत भी नहीं करता।’ कालू ने उसे डांटते हुए कहा। ‘हां… हां… हां… मैं अपने आप को सुंदर समझता हूं और समझता क्या हूं, मैं हूं ही तुम सबसे सुंदर। तुम्हारी तरह मेरा मुंह काला नहीं है और न ही तुम जैसी मेरी मोटी, रस्से जैसी पूंछहै। देखो मेरी सफेद मुलायम त्वचा। भूरी-भूरी, गोल-गोल आंखें और छोटे-छोटे सुंदर पैर।’ चीकू ने अपनी विशेषताएं गिनाते हुए कहा।
कालू लंगूर समझ गया कि सचमुच चीकू को अपनी सुंदरता पर बहुत घमंड हो गया है। वह चुपचाप वहां से अपने घर लौट गया। अगले दिन कालू ने सभी जानवरों की सभी बुलाई। उस सभा में हाथी, भालू, बंदर, गीदड़, लोमड़ी, गैंडा और लंगूर आदि उपस्थित थे। हाथी दादा ने चीकू खरगोश को सुंदरवन की एकता को तोड़ने वाला प्राणी बताते हुए कहा, ‘चीकू को जंगल के प्राणियों की बिरादरी से बाहर निकाल देना चाहिए।’

कालू भालू ने कहा, ‘चीकू हमारे सुंदरवन में नस्लवाद और रंगभेद नीति को बढ़ावा दे रहा है इसलिए उसके खिलाफ कठोर कदम उठाना जरूरी है।’ अंत में कालू लंगूर ने प्रस्ताव पढ़ कर सभी को सुनाया। उसमें लिखा था, ‘चीकू हमारी एकता और अखंडता के लिए खतरनाक है। यह प्राणी रंगभेद नीति पर चल रहा है। गोरे और काले का भेदभाव रखता है। इसलिए उसे सुंदरवन की बिरादरी से बाहर किया जाता है।’ चीकू को जब यह सूचना भिजवाई गई तो वह और खुश हुआ। एक दिन सुंदरवन में कुछ शिकारी घुस आए और उनके साथ आठ-दस शिकारी कुत्ते भी थे। उन शिकारी कुत्तों को अचानक चीकू खरगोश दिखाई दे गया। वे सब उसके पीछे दौड़ पड़े। चीकू लंबी-लंबी छलांगें लगाता हुआ आगे-आगे भाग रहा था। कुत्तों और चीकू के बीच फासला कम रह गया था। अचानक चीकू को मोटू भालू का घर दिखाई दिया। वह झट से उसमें घुस गया। मोटू ने जब चीकू को देखा तो वह गुस्से में बोला, ‘तू सुंदर प्राणी, मोटू और कालू प्राणी के घर क्यों आया है। चल यहां से निकल…।’ ‘जरा मेरी बात सुनो भालू दादा।’ हांफते हुए चीकू ने कहा।

‘मैं कुछ नहीं सुनना चाहता।’ मोटू ने कहा। चीकू ने मोटू के दोनों पैर पकड़ लिए और बोला, ‘मेरे पीछे आठ-दस शिकारी कुत्ते पड़े हैं। आज तुम मुझे अपने घर से निकाल दोगे तो वे मुझे मार डालेंगे। मुझे क्या मालूम था दादा कि मेरी सुंदरता ही मेरी जान की दुश्मन बन जाएगी। आप बड़े दयालु हो दादा, मुझ पर रहम करो।’ चीकू रोने लगा। मोटू भालू को दया आ गई। वह बोला, ‘ठीक है तुम यहीं ठहरो मैं बाहर जाकर देखता हंू।’ चीकू ने राहत की सांस लेते हुए कहा, ‘जान बची लाखों पाए।’ भालू जैसे ही बाहर आया उसे देख कर सारे शिकारी कुत्ते दुम दबा कर भाग गए। मोटू भालू ने सभी जानवरों को अपने घर बुलवा लिया। थोड़ी ही देर में सब जमा हो गए। भालू ने चीकू की सारी कहानी उनके सामने दोहरा दी। सभी जानवरों का गुस्सा चीकू को भीगी बिल्ली बने हुए देख कर ठंडा हो चुका था। सभी ने उसे माफ कर दिया। चीकू खरगोश ने सभी का आभार जताया और सुंदरवन के नियमों पर चलने को तैयार हो गया। उसके सिर से सुंदरता का भूत उतर चुका था। ०

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