December 09, 2016

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कहानी: जादूगर और उल्टा का सीधा

बहुत समय पहले की बात हैं परियों के देश में एक राजकुमारी रहती थी जिसका नाम सुगंधा था। वह बहुत खूबसूरत थी।

प्रतीकात्मक तस्वीर

बहुत समय पहले की बात हैं परियों के देश में एक राजकुमारी रहती थी जिसका नाम सुगंधा था। वह बहुत खूबसूरत थी और हमेशा हंसती-खिलखिलाती रहती थी। दुख और तकलीफ को न तो वह अपने पास फटकने देती थी और न ही दूसरों के पास। हमेशा वह सबकी मदद करने को तैयार रहती और उनके होंठों पर मुस्कान लाने को तत्पर। इसीलिए सब उससे बहुत प्यार करते थे। एक दिन वह महल के बगीचे में अपनी सहेलियों के साथ खेल रही थी कि तभी वहां से आसमान में उड़ते हुए एक जादूगर की नजर उस पर पड़ी और वह उसकी सुंदरता देखकर मुग्ध हो गया।

पर जादूगर दिखने में बहुत कुरूप था, इसलिए उसने सोचा कि अगर यह परी मुझे मेरे असली रूप में देख लेगी तो भाग जाएगी, शादी करना तो बहुत दूर की बात है। यह सोचते हुए जादूगर ने तुरंत अपना रूप बेहद सुंदर और सुदर्शन का बना लिया और बगीचे में उतर पड़ा। सुगंधा और उसकी सहेलियों ने जब एक अनजान युवक को अपने बगीचे में देखा तो वे अचकचा गर्इं। सुगंधा बोली,‘तुम कौन हो और बाहर द्वारपालों के रहते हुए राजमहल के अंदर कैसे आ गए?’ जादूगर ने जवाब दिया। ‘तुम बहुत खूबसूरत परी हो और मैं तुमसे विवाह करना चाहता हूं।’ उसका इतना कहना था कि वहां पर हंसी का फव्वारा फूट पड़ा।
उसने सुगंधा को देखा जो अब तक बेतहाशा हंसे चली जा रही थी। उसे ये देखकर बहुत गुस्सा आया और वह अचानक अपने असली रूप में आ गया। सुगंधा की सहेलियां इतने बदसूरत और बुड्ढे जादूगर को देखकर घबराहट के मारे चीख उठी और सुगंधा तो उसे देखते ही डर से बेहोश हो गई।

उसके बेहोश होने के बाद जादूगर उसके पास गया और उसके हाथ को पकड़कर कोई मंत्र बुदबुदाना लगा, यह देखकर उसकी सहेलियां चीखते हुए राजा और रानी को बुलाने के लिए राजमहल के अंदर चली गई। राजा और रानी ने जब सुगंधा के बेहोश होने की बात सुनी तो वे नंगे पैर ही बगीचे की तरफ भागे और वहां पहुंचने पर देखा कि सुगंधा जमीन पर बैठी हुई इधर उधर देख रही है। उसकी सहेलियां भी घबराहट के मारे पसीने में नहा गई थीं। राजा ने बड़े ही प्यार से सुगंधा का हाथ पकड़ा और उसे महल के अंदर ले जाने लगा। पीछे-पीछे रानी भी अपने आंसू पोंछते हुए चल दी।  सुगंधा के कक्ष में पहुंचकर जब राजा ने उसे बिस्तर पर लेटाकर कहा, ‘तुम अब आराम से सो जाओ।’ तो जैसे सुगंधा को कोई बिस्तर से धक्का देने लगा और वह खिड़की पर कूदकर बैठ गई।
यह देखकर राजा और रानी बहुत डर गए। राजा कुछ कहता, इससे पहले ही रानी बोली-मुझे लगता हैं कि सुगंधा कुछ ज्यादा ही घबरा गई है। इसलिए हम कुछ देर उसे बिलकुल अकेला रहने देते हैं और शाम को उसके लिए एक भव्य आयोजन रखेंगे जिससे वह खुश हो जाएगी और जादूगर वाली बात पूरी तरह भूल जाएगी।

राजा के तो वैसे भी कुछ समझ नहीं आ रहा था।उसने एक नजर सुगंधा की ओर देखा जो अभी भी खिड़की पर बैठी हुई थी, इसलिए वह रानी की बातों का बगैर कोई जवाब दिए सिर झुकाकर कमरे से बाहर चला गया। रानी ने बड़े ही प्यार से सुगंधा के सिर पर हाथ फेरा और कमरे से बाहर चली गई।
शाम को जब राजा और रानी कमरे में आए तो सुगंधा को बिस्तर पर आराम करते देखकर बहुत खुश हुए और उन्हें लगा कि सब कुछ पहले जैसा हो गया। राजा ने उससे बड़े ही प्यार से कहा-अब तुम अपने कक्ष में आराम से रहो और कोई भी जरूरत हो तो मुझे बता देना। यह सुनते ही सुगंधा ने बड़े गौर से राजा की तरफ देखा और अचानक उसे पता नहीं क्या हुआ और वह जोर-जोर से हंसने लगी और दौड़ती हुई दरबार में पहुंच गई।

किसी को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर माजरा क्या है। दरअसल जादूगर ने गुस्से से सुगंधा के ऊपर ऐसा जादू कर दिया था कि उससे जो भी बात बोली जाए वह उसका उल्टा ही करे। पर यह बात न तो सुगंधा को पता थी और न ही राजा-रानी को और न ही उनके दरबार में किसी को।
इसी तरह दिन बीतते जा रहे थे और सब धीरे-धीरे सुगंधा को मानसिकरूप से असंतुलित समझने लगे थे।  राजा-रानी उसके विवाह को लेकर बहुत चिंतित थे। राजा ने तो सुगंधा की चिंता में खाना-पीना भी छोड़ रखा था, वह बस दिन रात लेटकर आंसू बहाया करते थे।

अचानक एक दिन पड़ोसी देश का राजा प्रताप सिंह, जो कि राजा के बहुत अच्छे मित्र भी थे, अपने बेटे कुंअर राज सिंह के साथ सुगंधा की बीमारी सुनकर मिलने के लिए आए। राजा उन्हें देखते ही फूट-फूट कर रो पड़ा। प्रताप सिंह उसे दिलासा देते हुए बोले-राज्य भर के अच्छे से अच्छे हकीम उसे ठीक नहीं कर पाए, आखिर उसे ऐसा हुआ क्या है? तभी वहां पर सुगंधा अपनी मां के साथ आ गई। राजकुमार सुगंधा की खूबसूरती देखकर दंग रह गया। उसने मन में निश्चय किया कि वह विवाह करेगा तो सुगंधा से ही वरना आजीवन अविवाहित ही रहेगा। वह अपने पिता से सबके सामने ही बोला-‘मैं सुगंधा से विवाह करूंगा।’
यह सुनकर राजा भीगी आंखों से बोला-मैं उसके विवाह के लिए चिंतित अवश्य हूं, पर मैं जानबूझकर तुम्हारे जीवन को नरक नहीं बना सकता।’
ऐसा कुछ नहीं होगा। राजकुमार मुस्कुराते हुए बोला और फिर सबकी सहमति से उन दोनों का दो दिन बाद ही बड़े धूमधाम से विवाह संपन्न हो गया।
जब सुगंधा अपनी ससुराल पहुंची तो कुछ दिन तो उसने राजकुमार से डर के मारे बात ही नहीं की कि कहीं वह कुछ उलटी-सीधी हरकत करने लग जाए और उसके पति को सबके सामने शर्मिंदा होना पड़े।

राजकुमार ने एक दिन देखा कि सुगंधा अकेले ही बाग में टहल रही है तो वह धीमे से जाकर उसके पास खड़ा हो गया और उसे गौर से देखने लगा। सफेद चमचमाती हुई पोशाक में वह बेहद खूबसूरत लग रही थी पर उसके गोरे चेहरे पर एक उदासी थी और उसकी आंखों से आंसू गिर रहे थे। राजकुमार यह देखकर बहुत दुखी हो गया और सुगंधा को खुश करने के लिए बोला-तुम्हारे हाथ में ये गुलाब के फूल कितने सुंदर लग रहे हैं न…?
सुगंधा जो कि अब तक गुलाब के फूलों को बड़े ही प्यार से सहला रही थी अचानक उन्हें जमीन पर फेंकते हुए बोली-न न ये गुलाब के फूल तो बहुत बदसूरत हैं, खूबसूरत तो जूही के फूल हैं। राजकुमार का माथा ये सुनकर ठनका, उसने बात आगे बढ़ाने के लिए कहा, तुम्हारी पोशाक तो बहुत सुंदर हैं।  किसने कहा, ये तो बहुत खराब है। सुगंधा अपनी पोशाक को अजीब नजरों से घूरती हुई बोली। इसका मतलब जादूगर ने सुगंधा के ऊपर जो मंत्र पढ़े थे वह अब मुझे समझ में आ रहे हैं और यह सोचता हुआ राजकुमार आगे बोला-अच्छा, अब हम लोग यहीं कुछ देर और खड़े रहते हैं। सुगंधा उसका हाथ पकड़ते हुए बोली-चलो, हम लोग महल के अंदर चलते हैं। उसके यह कहते ही राजकुमार ठहाका मारकर हंस पड़ा और धीरे से बोला-जादूगर को तो एक न एक दिन मैं पकड़ कर तुम्हें ठीक करा ही दूंगा, पर अब मुझे यह समझ में आ गया हैं कि तुम हर बात का उलटा ही करती हो। और वह सुगंधा का हाथ थाम कर महल के अंदर चल पड़ा। उसके बाद का जीवन उन्होंने बहुत हंसी खुशी व्यतीत किया। राजकुमार ने उल्टा बोलकर और सुगंधा ने उसे सीधा समझकर…

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First Published on November 20, 2016 2:42 am

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