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जिज्ञासा और खोजी तंत्र

कंप्यूटर के फैलते संजाल में रोज सैकड़ों नई वेबसाइटें शुरू हो रही हैं, उन पर लाखों की तादाद में रोज नई सूचनाएं और जानकारियां दर्ज की जा रही हैं। नई पीढ़ी आजकल इंटरनेट पर इस कदर निर्भर हो चुकी है कि उसे कोई भी जानकारी चाहिए, तुरंत इंटरनेट पर तलाशना शुरू कर देती है। इंटरनेट पर सूचनाओं और जानकारियों के समंदर में कुछ भी तलाशना मुश्किल नहीं। इसके लिए अनेक खोजी तंत्र यानी सर्च इंजन विकसित हो चुके हैं। सर्च इंजनों की दुनिया के बारे में बता रहे हैं सुधांशु गुप्त।
Author August 6, 2017 06:08 am
प्रतीकात्मक चित्र।

एक अमेरिकी लेखक, दार्शनिक और कलाकार अल्बर्ट हबर्ड ने कहा था कि एक मशीन पचास साधारण लोगों का काम कर सकती है, लेकिन कोई भी ऐसी मशीन नहीं बनी जो एक असाधारण प्रतिभा वाले व्यक्ति का काम कर सके। अल्बर्ट की मृत्यु 1915 में हुई थी। तब तक इंटरनेट अस्तित्व में नहीं आया था और न सर्च इंजन जैसे सॉफ्टवेयर बाजार में उपलब्ध थे। लेकिन अगर ये उस समय होते तो क्या तब भी अल्बर्ट यह बात कह पाते? शायद नहीं। हम सब जानते हैं कि इंटरनेट और सर्च इंजन ने मानव मस्तिष्क के कोरटेक्स (मस्तिष्क का एक मध्य भाग, जो सूचनाओं को प्रोसेस करता है) को क्रांतिकारी ढंग से बदला है। वास्तव में सर्च इंजन से मिलने वाली सूचनाओं ने मानव मस्तिष्क और उसकी याद रखने की क्षमता को नया आकार दिया है। इंटरनेट और सर्च इंजन के आगमन से पहले हमें अधिकतर जानकारियां, सूचनाएं और तथ्य याद रखने होते थे। इन्हें प्राप्त करने के लिए हमें मित्रों, परिचितों या जानकारों से संपर्क करना होता था। संदर्भ ग्रंथों को खंगालना पड़ता था। पर अब सर्च इंजन के आने के बाद यह खोज बेहद आसान हो गई। सूचनाओं, तथ्यों और जानकारियों की करोड़ों उपभोक्ताओं की मांग को ये सर्च इंजन पलक झपकते पूरा कर रहे हैं। 2005 की एक रिपोर्ट के अनुसार इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं के बीच सर्च इंजन सबसे अधिक लोकप्रिय हैं। यह रिपोर्ट बताती है कि इंटरनेट का प्रयोग करने वाले चौरासी फीसद लोग सर्च इंजन की मदद लेते हैं।

क्या है सर्च इंजन

आपको नेट पर कुछ खोजना है, लेकिन क्या खोजना है उसका आपको पता नहीं मालूम। तब आप क्या करेंगे? इसे इस तरह भी समझ सकते हैं कि आपको एक विशाल पुस्तकालय में से एक किताब तलाश करनी है, लेकिन किताब कहां रखी है, यह आप नहीं जानते। सर्च इंजन आपकी इसी दुविधा को खत्म करते हैं। आज पूरी दुनिया में गूगल, याहू, बिंग जैसे अनेक सर्च इंजन काम कर रहे हैं। इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाला शायद ही कोई व्यक्ति होगा, जो गूगल का प्रयोग न करता हो। तो गूगल जैसे सर्च इंजन का काम है सूचनाएं पाने वालों को सूचनाएं देने वालों से मिलवाना, यानी मैचमेकिंग।  विज्ञापन के नजरिए से बात करें तो यह सामान खरीदने वालों को सामान बेचने वालों से मिलवाता है। इंटरनेट पर सभी विषयों की सामग्री में होने वाली वृद्धि अद्भुत है। नेटक्राफ्ट डॉट कॉम के अनुसार इस समय दस करोड़ से अधिक वेब सर्वर मौजूद हैं। स्वाभाविक रूप से वेब पर जितनी अधिक सामग्री होगी, उसे खोजने के लिए उतने ही अधिक सर्च इंजन की आवश्यकता होगी। सर्च इंजन एक ऐसा सॉफ्टवेयर है, जो वर्ल्ड वाइड वेब पर किसी भी ‘की-वर्ड’ की खोज करता है और जिन वेब पेज में वे शब्द होते हैं, उन्हें परिणाम के रूप में उपभोक्ता के सामने पेश कर देता है। इसमें से उपभोक्ता अपने मतलब की सूचनाएं तलाश लेता है।

मसलन, आपने गूगल पर ‘भारत का इतिहास’ लिखा। नब्बे सेकेंड में इकतीस करोड़ सत्तर लाख परिणाम आपके सामने होंगे। बेशक हर सर्च इंजन का सर्च करने का अपना तरीका होता है, लेकिन मूल रूप से सर्च इंजन के तीन बुनियादी काम होते हैं। पहला, वे वेब पेज की सामग्री की खोज करते हैं, जिसे ‘क्रॉलिंग’ कहा जाता है। दूसरा, वे इस सामग्री को पढ़ते हैं और इनके शब्दों के आधार पर सूची बनाते हैं। तीसरा, वे उपभोक्ताओं की जिज्ञासाओं के आधार पर संबंधित पेजों की एक सूची बनाते हैं और उपभोक्ता के सामने पेश कर देते हैं। इस तरह उपभोक्ताओं के लिए किसी सामग्री को तलाश करना आसान हो जाता है। पूरी दुनिया में सबसे अधिक लोकप्रिय सर्च इंजन ‘गूगल’ की शुरुआत 1996 में एक रिसर्च परियोजना के दौरान लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन ने की थी। उस समय ये दोनों स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय, कैलिफोर्निया के छात्र थे। लैरी और सर्गेइ का मानना था कि अच्छा सर्च इंजन वही होगा, जो वेब पेजों के ताल्लुक का भी विश्लेषण करे। दोनों ने इस तकनीक को ‘पेजरैंक’ का नाम दिया। इस तकनीक में किसी वेबसाइट की प्रासंगिकता, योग्यता का अनुमान, वेब पेजों की गिनती और उनकी प्रतिष्ठा के आधार पर लगाया जाता है। पेज और ब्रिन ने अपने सर्च इंजन का नाम ‘बैकरब’ रखा था, क्योंकि यह पिछली कड़ियों के आधार पर किसी साइट की प्राथमिकता तय करता था। बाद में पेज और ब्रिन ने इसका नाम गूगल रखा।

गूगल अंग्रेजी शब्द गुगोल का बिगड़ा हुआ रूप है, जिसका अर्थ है वह नंबर, जिसमें एक के बाद सौ शून्य हों। जब गूगल शुरू हुआ तो ब्रिन और पेज के जेहन में इसका कोई व्यावसायिक प्रारूप नहीं था। एक ऐसा भी बिंदु आया, जब वे गूगल को एक मिलियन डॉलर में याहू को बेचने गए थे। लेकिन याहू ने यह प्रस्ताव नामंजूर कर दिया। 1998 में गूगल की स्थापना हो चुकी थी और 2001 में गूगल ने एड आॅक्शन डेवलप किया। उसके बाद से गूगल में मानो रुपयों की बारिश होने लगी। देखते-देखते गूगल खरबों रुपए की कंपनी हो गई। माउंटेन व्यू, कैलिफोर्निया में आज गूगल का भव्य कार्यालय है, जिसे ‘गूगलप्लेक्स’ कहा जाता है। 2007 तक गूगल के कर्मचारियों की संख्या 16,895 थी, जो 2016 तक बढ़ कर 72,053 हो गई थी। गूगल को एड वर्ड्स से अरबों रुपए की आय होती है। शीर्ष पर बने रहने के लिए गूगल नई सेवाएं शुरू करता रहता है। हाल ही में गूगल ने अपने सर्च इंजन में नया अपडेट किया है, जिसमें यह उपयोगकर्ताओं को शहर में होने वाले पसंदीदा आयोजनों को खोजने, प्रोत्साहित करने और उसमें शामिल होने में मदद करेगा। इस नई सुविधा की शुरुआत भारत में की गई है।

सर्च इंजन का प्रभाव

यह सच है कि आज सर्च इंजन के बिना जीवन अकल्पनीय-सा लगने लगा है। मगर क्या इनके प्रयोग का हमारे सामाजिक जीवन पर कोई अच्छा या बुरा प्रभाव पड़ रहा है? अनेक अध्ययन बताते हैं कि लोग अब किसी जानकारी या सूचना के लिए अपने मित्रों या साथियों से संवाद नहीं करते। सर्च इंजन ने उन्हें एक सुरक्षा कवच मुहैया करा दिया है।
गूगल का एक प्रभाव यह भी हुआ कि अब लोगों की पढ़ने, याद रखने और सोचने की शैली अलग हो गई। हर सूचना पल भर में मिल जाने ने उनके बौद्धिक व्यक्तित्व को आलसी बना दिया है। इसका परिणाम यह हुआ कि अब लोग यादाश्त को अहमियत नहीं देते। जबकि एक समय यह महत्त्वपूर्ण हुआ करता था कि आपकी यादाश्त कितनी अच्छी है और आपको कितनी सूचनाएं जुबानी याद रहती हैं।

अध्ययन यह भी बताते हैं कि शब्दों और वाक्यों को याद रखने की प्रवृत्ति भी निरंतर कम हो रही है, क्योंकि कोई भी सूचना अब सिर्फ एक क्लिक की दूरी पर है। अब आपकी यादाश्त का आपके मस्तिष्क से कोई रिश्ता नहीं रहा। अब वह कंप्यूटर में संरक्षित है। जब आपको जिस चीज की आवश्यकता होगी, आप उसमें से निकाल लेंगे। एक लिहाज से यह फायदेमंद भी है कि आप अपने मस्तिष्क का प्रयोग दूसरे रचनात्मक कामों में कर सकते हैं, जिसका प्रयोग पहले चीजों को याद रखने में करना पड़ता था। अब आपको ‘रोमियो-जूलियट’, ‘आषाढ़ का एक दिन’ या ‘वार पीस’ किसने लिखा, यह याद रखने की जरूरत नहीं है। आप एक मिनट से भी कम समय में यह जानकारी ले सकते हैं। सर्च इंजन के ये दुष्परिणाम हैं। इसके बावजूद सर्च इंजन आज हमारे काम को बेहद आसान बना रहे हैं। ०

सुंदर पिचाई : सादगी के साथ शीर्ष पर 

दुनिया के सबसे बड़े सर्च इंजन गूगल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं सुंदर पिचाई। 2016 तक पिचाई की तनख्वाह लगभग दो सौ मिलियन अमेरिकी डॉलर थी। लेकिन यहां तक पहुंचने का उनका सफर आसान नहीं रहा। जुलाई, 1972 में मदुरै, तमिलनाडु में जन्मे सुंदर पिचाई का पूरा नाम सुंदरराजन पिचाई है। उन्होंने अपना बचपन चेन्नै के एक छोटे मकान में गुजारा। स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने आइआइटी खड़गपुर से बैचलर डिग्री सिल्वर मेडल के साथ हासिल की। अमेरिका की स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी से एमएस किया और उसके बाद वार्टन स्कूल से एमबीए की पढ़ाई की।पिचाई को पेन्सिलवेनिया यूनिवर्सिटी में साइबेल स्कॉलर के नाम से जाना जाता था। आर्थिक तंगी का आलम यह था कि पिचाई 1995 में स्टेनफोर्ड में पेइंग गेस्ट के रूप में रहते थे। पैसे बचाने के लिए वे अक्सर पुरानी चीजों का इस्तेमाल करते थे।

वे पीएचडी करना चाहते थे, लेकिन हालात ने उन्हें बतौर प्रोडक्ट मैनेजर अप्लायड मटीरियल्स में नौकरी करने के लिए बाध्य कर दिया। मैक्किन्से में बतौर सलाहकार काम करने पर भी उन्हें कोई पहचान नहीं मिली। पहचान की तलाश में ही वे 1 अप्रैल, 2004 को गूगल में आ गए। उनका पहला प्रोजेक्ट प्रोडक्ट मैनेजमेंट और इनोवेशन शाखा में गूगल के सर्च टूलबार को बेहतर बना कर दूसरे ब्राउजर के ट्रैफिक को गूगल पर लाना था। इसी दौरान उन्होंने सुझाव दिया कि गूगल को अपना ब्राउजर उतारना चाहिए। यहीं से वे गूगल के संस्थापक लैरी पेज की नजर में आए। इसी आइडिया से उन्हें असली पहचान मिलनी शुरू हुई। 2008 से 2013 के दौरान सुंदर पिचाई के नेतृत्व में क्रॉम आॅपरेटिंग सिस्टम की सफल लांचिंग की गई। इसके बाद एंड्रॉयड मार्केट प्लेस से उनका नाम पूरी दुनिया में छा गया। सुंदर पिचाई ने ही गूगल ड्राइव, जीमेल ऐप और गूगल वीडियो कोडेक बनाए। सुंदर द्वारा बनाए गए क्रॉम ओएस और एंड्रायड ऐप ने उन्हें गूगल के शीर्ष पद तक पहुंचा दिया। ०

शीर्ष सर्च इंजन

सर्च इंजन, यानी आपकी ज्ञान और सूचनाओं की भूख को पूरा करने वाला इंजन! अगर आप इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं, तो आप हर समय इस इंजन का इस्तेमाल करते हैं। इस समय दुनिया के दस शीर्ष सर्च इंजन इस प्रकार हैं:

गूगल सर्च इंजन की दुनिया में पहला स्थान रखने वाला ‘गूगल’ दूसरे स्थान के सर्च इंजन से तैंतालीस प्रतिशत आगे है। फरवरी 2016 की कॉमस्कोर रिपोर्ट के अनुसार खोजकर्ताओं में चौंसठ फीसद उपभोक्ता गूगल का प्रयोग कर रहे थे। जबकि दूसरे स्थान पर रहने वाले सर्च इंजन बिंग पर केवल 21.4 फीसद। यही नहीं, मोबाइल और टेबलेट पर भी सर्च इंजन के बाजार में 89 प्रतिशत गूगल का हिस्सा है।

सर्च की दुनिया में गूगल को टक्कर देने के लिए ‘बिंग’ ने बेहद प्रयास किए। इसके बावजूद बिंग उपभोक्ताओं को यह समझाने में नाकाम रहा कि वह गूगल से बेहतर परिणाम से दे सकता है।

अक्तूबर 2011 से ‘याहू खोज’ बिंग द्वारा संचालित हो रही है। याहू आज सबसे लोकप्रिय ईमेल सेवा मुहैया कराता है और सर्च इंजन की दुनिया में वह तीसरा सबसे लोकप्रिय इंजन बना हुआ है।

आस्क डॉट कॉम औपचारिक रूप से ‘आस्क जीव्स’ के नाम से जाना जाने वाले आस्क डॉट कॉम की सर्च की दुनिया में तीन फीसद भागीदारी है। यह सर्च इंजन उपभोक्ताओं के बीच सवाल और जवाब के प्रारूप पर टिका है। गुणवत्ता की कमी के कारण यह गूगल, बिंग और याहू से पीछे है।

सर्च इंजन की दुनिया में पांचवें नंबर पर एओएल डॉट कॉम है। नेटमार्केट शेयर के अनुसार एक समय बेहद लोकप्रिय यह सर्च इंजन अब भी शीर्ष दस में स्थान बनाए हुए है। हालांकि बाजार में इसकी भागीदारी महज 0.6 फीसद है।

सन 2000 में शुरू हुआ यह सर्च इंजन चीन में सबसे लोकप्रिय है। बाजार में इसकी भागीदारी लगातार बढ़ रही है। विकीपीडिया के अनुसार ‘बैडू’ प्रति माह करोड़ों लोगों के सवालों के जवाब उपलब्ध कराता है।

यह एक अलग किस्म का और कंप्यूटेशनल नॉलेज इंजन है, जो विभिन्न विषयों पर तथ्य और आंकड़े उपलब्ध कराता है। यह ब्याज आदि हर तरह की गणना भी करता है।

अन्य सर्च इंजनों के मुकाबले डकडकगो के कई फायदे हैं। यह एक साफ सुथरा इंटरफक्स है, जो उपभोक्ताओं को ट्रेक नहीं करता। इसके पृष्ठ आपको विज्ञापनों से भरे हुए नहीं मिलेंगे। इसमें कई अन्य सुविधाएं भी हैं।

आर्काइव डॉट आॅर्ग एक इंटरनेट संग्रह खोज इंजन है। इसका इस्तेमाल आप यह देखने के लिए कर सकते हैं कि कोई वेबसाइट 1996 से कैसी दिखती थी। अगर आप किसी वेबसाइट का इतिहास और उसके बदलावों को देखना चाहें तो यह एक उपयोगी सर्च इंजन है। यह सर्च इंजन लगभग आस्क डॉट कॉम जैसा है। यह अमेरिका में लोकप्रिय सर्च इंजन है।

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