ताज़ा खबर
 

चलन के साथ, चलन से बाहर

फैशन की दुनिया बदलाव पर टिकी है। फैशन डिजाइनरों के साथ-साथ अब फैशन ब्लॉगर भी हर रोज अपनी राय से लोगों को अवगत करा रहे हैं।
Author July 16, 2017 05:04 am
प्रतीकात्मक चित्र।

अक्सर लोग वही पहनना पसंद करते हैं, जो चलन में है। फैशन डिजाइनर भी लोगों की इस रुचि को ध्यान में रख कर प्रयोग करते रहते हैं। इसलिए थोड़े-थोड़े अंतराल पर पहनावे में चलन बदल जाया करता है। ऐसे में कई लोगों के सामने समस्या रहती है कि किस तरह वे चलन के साथ चलते हुए भी नए अंदाज में दिखें और उनका व्यक्तित्व निखरे। नए चलन के पहनावे के साथ किस तरह पारंपरिक या पुराने पड़ चुके चलन के परिधान को मिला कर नया अंदाज दिया जा सकता है, बता रही हैं अनुजा भट्ट।

फैशन की दुनिया बदलाव पर टिकी है। फैशन डिजाइनरों के साथ-साथ अब फैशन ब्लॉगर भी हर रोज अपनी राय से लोगों को अवगत करा रहे हैं। आजकल युवा जब फैशन पर बात करते हैं, तो अक्सर दो शब्दों का प्रयोग करते हैं- पहला, ट्रेंडी और दूसरा स्टाइलिश। ट्रेंडी यानी जो नया-नया चलन में है। मेट्रो हो या मॉल, उनके गलियारों में घूमते समय अक्सर देख कर लगता है कि बहुत से युवा ट्रेंड का अनुकरण कर रहे हैं, उसके बावजूद वे आकर्षक नहीं लग रहे। इसका कारण यह है कि वे ट्रेंडी को ही स्टाइलिश होना मान लेते हैं, जबकि स्टाइलिश दिखने के लिए सिर्फ ट्रेंडी होना काफी नहीं है। अगर आप चाहते हैं कि आपका व्यक्तित्व निखर कर आए, तो आपको इन दोनों के बीच के अंतर और उनके संबधों को अच्छी तरह समझना होगा।

ट्रेंडी होने का मतलब है कि आप बिल्कुल नए चलन और फैशन का अनुकरण कर कपड़े पहन रहे हैं, बगैर यह सोचे-समझे कि वह आप पर अच्छा लग रहा है या नहीं। आपको लगता है कि चलन को अपनाना जरूरी है। अगर आप चलन में शामिल कपड़े न भी पहनें तो स्टाइलिश दिख सकती हैं। एकदम नए चलन के कपड़े पहनने के लिए पहले आप यह जानने की कोशिश करें कि आप पर क्या और कौन-सा परिधान अच्छा लगता है। जब यह जान जाएंगी तो आप अपने उस परिधान को ट्रेंडी बना सकती हैं।

बदलाव का दौर

आज के दौर में फैशन किन्हीं एक-दो चीजों पर टिका हुआ नहीं है। फैशन में कई श्रेणियां शामिल हो गई हैं। इसलिए आपके पास चुनाव करने की गुंजाइश भी ज्यादा है। वैसे आपके दोस्त भी बताते होंगे कि कौन-से पहनावे में आप ज्यादा अच्छी लगती हैं। कोई भी पहनावा आपकी लंबाई, वजन और आपके रंग पर निर्भर करता है। यह वैसे ही है जैसे हर तरह का बाल आपके चेहरे पर नहीं फबता।
अब वह जमाना नहीं रहा, जब फिल्म देख कर लोग फैशन को समझते थे और वहीं से फैशन जीवन में शामिल होता और बाहर हो जाया करता था। आज सब कुछ साथ-साथ चल रहा है। एक तरफ परंपरागत भारतीय पहनावा है, तो दूसरी तरफ पश्चिमी पहनावा भी अपनाया जा रहा है। फैशन डिजाइनर अदिति लाल कहती हैं कि अब बनारसी, कांजीवरम साड़ी की स्कर्ट पसंद की जा रही है, जिसके साथ गहरे रंग के क्राप टॉप की मांग है। आप इसी स्कर्ट को दो तरह से पहन सकती हैं। पहला तो स्कर्ट की तरह और दूसरा आप ब्लाउज के नीचे शिफॉन का आधार बना कर उसको अनारकली बना सकती हैं। उत्सव और त्योहार के मौके पर ऐसी ड्रेस पहनने में बहुत अच्छी लगेगी।

परिधान और प्रयोग

हम चलन वाले परिधान में कुछ बदलाव कर उसे स्टाइल में बदल सकते हैं। जिस तरह स्कर्ट का उपयोग दो तरह की ड्रेस में किया जा सकता है, उसी तरह एक और प्रयोग के बारे में स्टाइलिस्ट और ब्लॉगर प्रणिता मेहता कहती हैं कि कुर्ती अगर साड़ी के साथ पहनी जाए तो वह आपकी संस्कृति को भी दर्शाती है और साथ ही आपको ट्रेंडी और स्टाइल आइकॉन भी बना सकती है। इस मौसम में चाहें तो लेगिंग को विराम दे सकती हैं। कुर्ती को लांग स्कर्ट के साथ पहन सकती हैं। इसके साथ चाहें तो दुपट्टा पहन सकती हैं, चाहें तो नहीं। आजकल साड़ियों के साथ मॉडर्न स्ट्रेचबल ब्लाउज आते हैं, जिनमें सिलाई की भी जरूरत नहीं होती है। इसके अलावा लंबी डोरियां लगे हुए ब्लाउज भी आते हैं, जिन्हें आप साड़ी के अंदर दबा कर पहन सकती हैं। देखने में ये टी-शर्ट की तरह लगेंगे। इससे आप देखने में ट्रेंडी भी लगेंगी और स्टाइलिश भी।

रंगों का खेल

कभी फैशन में हम विरोधाभासी रंग पसंद करते हैं, तो कभी हमें एक ही रंग पसंद आता है। हम एक जैसा पहनावा पसंद करते हैं। यह सब कुछ डिजाइन पर निर्भर करता है। बुटीक को अपनी सेवाएं देने वाली फ्रीलांस डिजाइनर नियति मनोज कहती हैं कि लंबे कुर्ते प्लॉजो के साथ आजकल चलन में बने हुए हैं। आप सामान्य प्लाजो की जगह ज्यादा खुले प्लाजो भी आजमा सकती हैं। आप चाहें तो एक ही रंग के कढ़ाई किए हुए कुर्ते को प्लाजो के साथ पहन सकती हैं। बस उसके साथ अलग रंग का चमकदार दुपट्टा पहनें।  अगर आपको यह बहुत साधारण लग रहा हो तो उसके साथ रंगबिरंगी फुलकारी वाला दुप्ट्टा भी पहन सकती हैं। जो इंडो वेस्टर्न ड्रेस पहनने के शौकीन हैं, वे क्राप टॉप के साथ मैक्सी स्कर्ट पहन सकती हैं। आप इसके साथ कोल्हापुरी चप्पल या डिजाइनर जूती भी पहन सकती हैं। अगर आप कुछ और प्रयोग करना चाहती हैं, तो क्रॉप टॉप के साथ धोती पैंट पहन सकती हैं। उसके साथ बोहो चिक ज्वेलरी पहनी जा सकती है। कहने का अर्थ यह कि अगर आप अपनी स्टाइल को एक बार समझ लें तो फिर आपके पास पहनने के लिए कई विकल्प होंगे। सोचना आपको है कि आप पर क्या जंचता है क्या नहीं।

 

मनीष मल्होत्रा
मनीष मल्होत्रा पिछले सत्ताईस सालों से फैशन की दुनिया में सक्रिय हैं। जिन फिल्मों को देख कर ज्यादातर लोग अपना फैशन तय करते हैं, उनमें से अधिकतर में नायक-नायिकाओं के परिधान मनीष मल्होत्रा के डिजाइन किए होते हैं। फिल्मों के लिए ड्रेस डिजाइन करते-करते मनीष मल्होत्रा ने समझा कि किस तरह लोग पहनावे को लेकर अपना मिजाज बनाते और बदलते हैं। इसलिए उन्होंने स्वतंत्र रूप से अपना शोरूम खोला और आज दुनिया के तमाम बड़े शहरों में उनके डिजाइन किए हुए कपड़ों के शोरूम हैं- दिल्ली, मुंबई, दुबई, लंदन आदि जगहों पर।
मनीष मल्होत्रा के डिजाइन की खूबी है कि वे परिधान को पारंपरिक शैली से उठा कर समकालीन रुचि से जोड़ देते हैं। इसके लिए वे पारंपरिक रंगों और कपड़ों की बुनावट को पसंद करते हैं। उनका मानना है कि फैशन को लेकर लोगों की रुचि निरंतर बदलती रहती है। खासकर महिलाएं, हर समय नए-नए डिजाइन और स्टाइल के कपड़े पहनना पसंद करती हैं। हर समय एक ही तरह के परिधान पहनने से उन्हें ऊब होने लगती है। सो, मनीष मल्होत्रा का मानना है कि पारंपरिक परिधानों में समय-समय पर बदलाव करके उन्हें समकालीन रूप दें, लोगों की बदलती रुचियों के साथ उन्हें जोड़ दें तो वे चलन में आ जाते हैं। एक ही तरह के परिधान पहनने की ऊब से बचने के लिए जरूरी है कि पारंपरिक और समकालीन का मेल करते रहा जाए।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

First Published on July 16, 2017 5:04 am

  1. No Comments.
सबरंग