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संंभल कर करें प्रसाधन का प्रयोग

सुंदर दिखने की चाह में आजकल सौंदर्य प्रसाधनों का इस्तेमाल धड़ल्ले से हो रहा है। सजने-संवरने के लिए हर उम्र के लोग, खासतौर से लड़कियां और महिलाएं सौंदर्य प्रसाधनों का काफी इस्तेमाल करती हैं।
Author October 22, 2017 05:16 am
प्रतीकात्मक फोटो

सुंदर दिखने की चाह में आजकल सौंदर्य प्रसाधनों का इस्तेमाल धड़ल्ले से हो रहा है। सजने-संवरने के लिए हर उम्र के लोग, खासतौर से लड़कियां और महिलाएं सौंदर्य प्रसाधनों का काफी इस्तेमाल करती हैं। पर सौंदर्य प्रसाधन हानिकारक भी कम नहीं होते। चेहरे-चमड़ी को गोरा-चिकना और बालों को काला-घना बनाने का दावा करने वाले ज्यादातर सौंदर्य प्रसाधन हानिकारक रसायनों से बने होते हैं। इनके इस्तेमाल का नतीजा यह होता है कि इनसे कई तरह के त्वचा रोग और सांस संबंधी बीमारियां होने लगती हैं। इसलिए सौंदर्य प्रसाधनों का इस्तेमाल बहुत संभल कर करना चाहिए।

आज बाजार में तमाम तरह के ब्रांडों की महंगी क्रीम, लोशन, तेल, मास्चराइजर आदि उपलब्ध हैं। लेकिन इनमें कौन-सा नुकसान पहुंचाएगा और कौन-सा नहीं, यह पता लगाना आसान काम नहीं है। इसलिए इन्हें खरीदते समय सावधानी बरतना जरूरी है। सौंदर्य प्रसाधनों को खुशबूदार बनाने के लिए कृत्रिम सुगंध का इस्तेमाल किया जाता है। ये पदार्थ सिर दर्द, आंखों में जलन, खुजली जैसी समस्याएं पैदा कर देते हैं। इनमें एंटी एजिंग क्रीम, शैंपू या इसी तरह के दूसरे उत्पाद शामिल हैं।

घातक रसायन

रेटिनॉल : यह रसायन एंटी एजिंग क्रीम का मुख्य घटक है। इससे त्वचा की परतें उधड़ जाती हैं, खुरदरापन आ जाता और खुजली होने लगती है। रेटिनॉल से त्वचा सूर्य के प्रकाश के प्रति बहुत संवेदनशील हो जाती है। इससे आपको हमेशा सनस्क्रीन लगाना पड़ सकता है।
हाइड्रोक्विनॉन : ऐसी क्रीम लगाने से हमेशा बचें, जिसमें हाइड्रोक्विनॉन रसायन का इस्तेमाल किया जाता है। यह रसायन कैंसर पैदा करता है। ओक्रोनोसिस नामक त्वचा रोग के लिए इसे ही जिम्मेदार माना जाता है। इस बीमारी में त्वचा विकृत, गहरे रंग की और मोटी होने लगती है।
लॉरिल सल्फेट : शैंपू एक ऐसा उत्पाद है, जिसे आज हर महिला-पुरुष इस्तेमाल करते हैं। शैंपू में सोडियम लॉरिल सल्फेट होता है। यह इतना ज्यादा घातक होता है कि समय से पहले बूढ़ा बना देता है।
मिनरल आॅयल : चेहरे को साफ करने वाले उत्पादों जैसे क्लीनर्स या क्लियरिफाइंग लोशंस में मिनरल आॅयल का खूब इस्तेमाल होता है। यह त्वचा के छिद्रों को बंद करके उन्हें चौड़ा कर देता है। कृत्रिम रंग भी त्वचा के रखरखाव और हेयर डाई जैसे उत्पादों में काफी इस्तेमाल होते हैं। इनमें मौजूद रसायनों से फोड़े और एलर्जी होने का खतरा रहता है।
ट्राइ इथेनोलामाइन : यह रसायन स्किन केयर उत्पादों में पीएच वैल्यू को ठीक रखने के लिए डाला जाता है। इससे एलर्जी, त्वचा के रूखेपन और आंखों में खुजली हो जाती है। चेहरा साफ करने वाले कुछ उत्पादों में ऐसे रसायन होते हैं, जो एंजाइमों को नष्ट कर देते हैं। इससे त्वचा के सोखने की प्रक्रिया तेज हो जाती है। इससे त्वचा अति संवेदनशील हो जाती है। त्वचा पर सूखापन आने लगता है और लाल धब्बे बनने लगते हैं।

मत धोएं बार-बार चेहरा
अक्सर लोग चेहरा बार-बार धोते और फिर क्रीम, लोशन या माइस्चराजर लगाते हैं। जबकि ऐसा करना बिल्कुल गलत है। चेहरे को जल्दी-जल्दी धोने की जरूरत नहीं होती। दरअसल, अधिक धोने-रगड़ने से चेहरे की त्वचा सूख जाती है, जिससे वह और अधिक तेल छोड़ने लगती है। दिन में दो बार चेहरा धोना काफी है। जिन महिलाओं की त्वचा तैलीय होती है और जिन्हें मुहासों की समस्या होती है, वे दिन में कई बार तेज रसायनों वाले उत्पादों का उपयोग करती हैं। इन उत्पादों में अल्कोहल होता है, जो त्वचा को सुखा देता है।

गर्भावस्था में प्रसाधन से परहेज
लिपस्टिक और आई शैडो जैसे सौंदर्य उत्पादों में सीसा काफी मात्रा में होता है। इससे लेड प्वाइजनिंग का खतरा रहता है। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं में यह रसायन भ्रूण के विकास को प्रभावित करता है।
0 मुहांसे दूर करने के लिए आइसोट्रेटिनोइन का इस्तेमाल किया जाता है। गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के लिए यह नुकसानदायक है। इससे शिशु में जन्मजात विकृतियों का खतरा बढ़ जाता है।
0 साबुन और शैंपू जैसे उत्पादों में पैथालेट्स का इस्तेमाल किया जाता है। गर्भवती महिलाओं में लंबे समय तक पैथालेट्स के संपर्क में रहने के कारण गर्भपात का खतरा हो सकता है।
0 सिंथेटिक हेयर कलर उत्पादों में अमोनिया इस्तेमाल किया जाता है। इन उत्पादों में मौजूद अमोनिया, फेनेडियामाइंस और रेसोर्सिनोल शरीर में एलर्जी पैदा कर देते हैं। इन रसायनों को कैंसरकारी माना जाता है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को अपने बालों को रंगने के लिए प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल करना चाहिए।
0 नेल पॉलिश में मौजूद रसायन भी कम घातक नहीं हैं। नेल पॉलिश में ऐसे रसायन होते हैं जो गर्भ और गर्भधारण की क्षमता पर असर डालते हैं। ल्ल

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