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जानकारी : दीवार के पार

दुर्गम पहाड़ी इलाकों में सीमा असुरक्षित हिस्सों में अगर किसी मानव की आवाजाही होती है तो सेंसर बीप करने लगते हैं, जिससे प्रहरी सजग हो जाते हैं।
Author नई दिल्ली | June 5, 2016 07:49 am
कोरिया के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी पारदर्शी दीवार विकसित की है, जिसमें दूसरी तरफ मौजूद व्यक्ति का स्पर्श किया जा सकेगा, साथ ही उससे बातचीत करने का विकल्प भी होगा।

क्या दीवार के पार देखा जा सकता है ? इस असंभव को संभव बनाया है विज्ञान की आधुनिक नई तकनीक ने । कोरिया के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी पारदर्शी दीवार विकसित की है, जिसमें दूसरी तरफ मौजूद व्यक्ति का स्पर्श किया जा सकेगा, साथ ही उससे बातचीत करने का विकल्प भी होगा। ऐसी दीवार वाली स्टोर विंडोज में रखे गए उत्पादों को न केवल ग्राहक देख सकता है, बल्कि उन्हें छूकर अनुभव भी कर सकता है।

यह पारदर्शी दीवार दोनों सतहों से संबद्ध होती है, जिसमें ग्राहक की आवाज और स्पर्श से फीडबैक भी लिखा जा सकेगा। नतीजतन लोग डिस्प्ले के माध्यम से स्पर्श करने के साथ बातचीत भी कर सकेंगे। फ्लेक्सीग्लास और सीट के बीच एक होलोग्राफिक और एक स्क्रीन फिल्म लगाई गई है और दीवार के दोनों तरफ बीम प्रोजेक्टर लगाए गए, जिसमें चित्र प्रतिबिंबित होते हैं। इस ट्रांस-वाल को कोरिया एडवांस इंस्टीट्यूट आॅफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं ने विकसित किया है।

दो उपभोक्ता दीवार के सामने एक दूसरे की तरफ एक ही जगह और समान समय पर खड़े होकर बिना किसी शारीरिक हस्तक्षेप के स्पर्श कर सकते हैं। भारत और पाकिस्तान के सीमा के पानी वाले हिस्सों की निगरानी में आ रही कठिनाई से निपटने के लिए सीमा सुरक्षा बल (सीसुब) ने नायाब तरीका अपनाया है। सीसुब ने इन खाली हिस्सों को भरने के लिए लेजर दीवारें खड़ी कर दी हैं। गौरतलब है कि इन्हीं हिस्सों से अक्सर आतंकी भारत में घुसते रहे हैं। नियंत्रण रेखा को छोड़ सीसुब पाकिस्तान से लगी देश की सीमा के बाड़ रहित हिस्सों की सुरक्षा के लिए ‘फरहीन लेजर दीवार’ जैसा नायाब तकनीकी समाधान खुद ही खोजा है। जम्मू क्षेत्र से लगी पाकिस्तान की सीमा पर स्थित बसंतार नदी, बेन नाला, करोल कृष्ण और फलोआ नाला में लेजर दीवारें स्थापित की गई हैं।

दुर्गम पहाड़ी इलाकों में सीमा असुरक्षित हिस्सों में अगर किसी मानव की आवाजाही होती है तो सेंसर बीप करने लगते हैं, जिससे प्रहरी सजग हो जाते हैं।

रक्षा वैज्ञानिकों ने एक ऐसा रडार विकसित किया है जो दीवार के पार देख सकता है। देश के प्रमुख सरकारी संस्थान डीआरडीओ द्वारा विकसित थर्मल इमेजिंग रडार को ‘दिव्यचक्षु’ (दैवी आंख) नाम दिया गया है। डीआरडीओ के बंग्लुरु स्थित इलेक्ट्रॉनिक्स एंड रडार डेवलपमेंट एस्टैब्शिमेंट में अभी इसका परीक्षण किया जा रहा है।

इस परियोजना पर काम कर रहे एक वैज्ञानिक के मुताबिक यह रडार 20 से 30 सेंटीमीटर मोटाई वाली किसी भी चीज की बनी दीवार के पार दृश्य दिखा सकता है। इससे दीवार की दूसरी ओर बीस मीटर की दूरी तक में हो रही गतिविधियां और वहां मौजूद लोगों की स्पष्ट जानकारी मिल सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, रडार से गतिविधियों की जानकारी मिलने से आतंकियों का पता लगाने और उनमें और बंधकों में भेद करने में मदद मिल सकती है। आतंकी हमलों से निपटने में यह उपयोगी साबित हो सकता है।

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