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सेहत- सर्दी में आंखों की देखभाल

लंबे समय तक एसी में रहना, कंप्यूटर पर लगातार काम करना, ऐसे बारीक काम करना, जिनकी वजह से आंखों पर जोर पड़ता हो, कांटेक्ट लेंस का इस्तेमाल, बदलते मौसम की एलर्जी और प्रदूषण ऐसे बड़े कारण हैं, जो आंख पर सीधा असर डालते हैं।
Author November 12, 2017 04:48 am
प्रतीकात्मक चित्र

आखें हमारे शरीर का सबसे संवेदनशील हिस्सा हैं। सबसे ज्यादा काम आंखों को ही करना पड़ता है। इसलिए इनकी देखभाल और सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है। हवा, रोशनी, प्रदूषण- सभी का सामना सबसे पहले आंखों को करना पड़ता है। बदलते मौसम और खानपान का भी आंखों पर काफी असर पड़ता है। इसके अलावा लंबे समय तक एसी में रहना, कंप्यूटर पर लगातार काम करना, ऐसे बारीक काम करना, जिनकी वजह से आंखों पर जोर पड़ता हो, कांटेक्ट लेंस का इस्तेमाल, बदलते मौसम की एलर्जी और प्रदूषण ऐसे बड़े कारण हैं, जो आंख पर सीधा असर डालते हैं। इसलिए आंखों की देखभाल बहुत जरूरी होती है।
बचें प्रदूषण से
आजकल सबसे बड़ी समस्या प्रदूषण की है। खराब हवा और वाहनों का धुआं आंखों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं। इससे आंखों में जलन और सूखेपन की समस्या हो जाती है। इससे बचाव के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि घर से बाहर निकलते समय हमेशा अच्छे किस्म का चश्मा जरूर लगाएं। गरमी में तेज धूप से बचने के लिए धूप का चश्मा लगा लेना बेहतर होता है, क्योंकि तेज रोशनी के प्रति आंखें ज्यादा संवेदनशील होती हैं। वैसे संभव हो तो दिन में दो बार आंखों को साफ पानी से धो जरूर लें।
कंप्यूटर पर लगातार न बैठें
कंप्यूटर पर लगातार काम करने से आंखों पर भारी दबाव बनने लगता है। इसके अलावा कंप्यूटर स्क्रीन से निकलने वाली किरणें भी आंखों को नुकसान पहुंचाती है। इसलिए कंप्यूटर पर देर तक या अनवरत कभी काम नहीं करना चाहिए। अगर आप कंप्यूटर पर लगातार काम करते हैं तो हर एक घंटे के अंतराल पर कम से कम पांच मिनट के लिए कंप्यूटर के सामने हटें जरूर। आंखों को आराम देने के लिए कंप्यूटर से निगाह हटाना जरूरी है। कम से कम दो मिनट के लिए अपनी आंखें जरूर बंद करें।
कांटेक्ट लेंस
अगर कांटेक्ट लेंस का इस्तेमाल करते हैं तो उसे नियमित रूप से अच्छी तरह साफ करें। बेहतर यही होगा आप अच्छी क्वॉलिटी का डिस्पोजेबल कॉन्टेक्ट लेंस का इस्तेमाल करें। अगर कांटेक्ट लैंस घटिया क्वालिटी का होता है या फिर आंखों को अनुकूल नहीं आता है तो इससे आंख में संक्रमण का खतरा पैदा हो जाता है।
ध्यान रखें
’अगर आंख में कोई समस्या होती है कभी भी अपनी मर्जी से कोई दवा न लें। तत्काल आंखों के डॉक्टर को दिखाएं।
’अपने खानपान में ऐसी चीजों को शामिल करें जिनमें एंटी आॅक्सीडेंट और विटमिन ए पर्याप्त मात्रा में मौजूद हों। इसके लिए संतरा, पपीता, आम, नींबू और टमाटर आदि का सेवन फायदेमंद होता है।
’ओमेगा 3 फैटी एसिड आंखों के लिए बहुत जरूरी है। मछली, अखरोट, बादाम और अलसी के बीजों में यह तत्त्व भरपूर मात्रा में पाया जाता है।
अगर डायबिटीज हो तो
डायबिटीज से ग्रस्त लोगों में से लगभग चालीस फीसद लोग डायबिटीज जनित रेटिनोपैथी से भी पीड़ित होते हैं। इसलिए रेटिनोपैथी की जांच जरूरी है। डायबिटीज जनित रेटिनोपैथी खून की छोटी नलियों को नुकसान पहुंचने से होती है। ये नलियां ही रेटिना को पोषक तत्त्व पहुंचाती हैं। इनके खराब होने पर इनमें से खून और अन्य तरल पदार्थों का रिसाव होने लगता है, जिससे रेटिना के ऊतकों में सूजन आ जाती है और नजर धुंधलाने लगती है। यह स्थिति आमतौर पर दोनों आंखों को प्रभावित करती है। इसमें सबसे ज्यादा खतरा आंखों की रोशनी जाने का भी रहता है।  ज्यादातर रोगियों में रेटिना की गड़बड़ी का तत्काल पता नहीं चल पाता। इस वजह से डायबिटीज पीड़ित लोग इस बात से तब तक अनजान रहते हैं, जब तक कि रोग बढ़ नहीं जाता। इसलिए यह जरूरी है कि डायबिटीज पीड़ित व्यक्ति रेटिनोपैथी का पता लगाने के लिए नियमित रूप से जांच कराते रहें।  हालांकि बीमारी बढ़ने के बाद ही इसके लक्षण दिखाई देने लगते हैं। जैसे देखने में धुंधलापन, आंखों के पास धब्बे, दोहरी दृष्टि और आंखों में दर्द। लेजर सर्जरी का इस्तेमाल करके अक्सर इसका इलाज किया जाता है।

ग्लूकोमा डायबिटीज से ही होने वाली आंख की समस्या है। आंखों में अलावा दबाव बनने की वजह से ये बीमारी होती है। इस रोग से धीरे-धीरे आंख की रोशनी कम होती चली जाती है। अगर बीमारी शुरुआत में ही पकड़ ली जाए तो आंख की रोशनी जाने से बचाई जा सकती है। इस समस्या से बचाव के लिए जरूरी है कि जीवनशैली में बदलाव कर लिया जाए, ताकि ब्लड प्रेशर सामान्य रहे। इससे आंखों में भी दबाव नहीं बढ़ेगा।  ’अगर आप इंसुलिन लेते हैं तो सावधानी रखें। क्योंकि इंसुलिन का स्तर बढ़ता है, तो इससे बल्डप्रेशर भी बढ़ता है और फिर आंखों पर दबाव भी बढ़ता है। इसलिए खानपान में चीनी और अनाज कम करें। अगर ग्लूकोमा है डबलरोटी, पास्ता, चावल, अनाज, आलू आदि खाने से बचें।  इंसुलिन के स्तर को कम करने का सबसे अच्छा तरीका है व्यायाम। जैसे- एरोबिक्स। इससे इंसुलिन लेवल कंट्रोल में रहता है और आंखों की रोशनी भी बचाई जा सकती है।
हरी सब्जियां खाएं
ल्यूटिन और जेकैक्थिन से आंखों की रोशनी बढ़ती है। ल्यूटिन हरी, पत्तेदार सब्जियों में विशेष रूप से बड़ी मात्रा में पाया जाता है। यह एंटी-आॅक्सीडेंट है और आंखों की कोशिकाओं को नष्ट होने से बचाता है। साग, पालक, ब्रोकोली, स्प्राउट्स और अंडे के पीले भाग में भी ल्यूटिन होता है।
अंडे का पीला भाग भी पोषक तत्त्वों से भरपूर होता है, लेकिन इसे पकाते ही इसके सारे पोषक तत्त्व खत्म हो जाते हैं। इसलिए बिना पकाए खाएं तो ज्यादा बेहतर होगा। ल्ल

 

 

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