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स्मरण: उपेक्षित विरासत

भगत सिंह के क्रांतिकारी जीवन का जिन शहरों से गहरा नाता रहा है, उनमें दिल्ली और कानपुर भी शामिल हैं।
Author October 2, 2016 02:27 am
कानपुर में प्रताप प्रेस का जर्जर भवन।

भगत सिंह के क्रांतिकारी जीवन का जिन शहरों से गहरा नाता रहा है, उनमें दिल्ली और कानपुर भी शामिल हैं। लेकिन, विडंबना यह है कि उनकी स्मृति से जुड़े तमाम स्थल वीरान और उपेक्षित हैं। दिल्ली में उनका बार-बार आना-जाना रहता था। उन्होंने आठ अप्रैल, 1929 को केंद्रीय असेंबली में बम फेंका था। कानपुर से छपने वाले गणेश शंकर विद्यार्थी के क्रांतिकारी अखबार ‘प्रताप’ में नौकरी करते वक्त वे दिल्ली में सांप्रदायिक दंगा कवर करने आए थे। दंगा दरियागंज में हुआ था। वे दिल्ली में सीताराम बाजार की एक धर्मशाला में रहे थे। अब आप लाख कोशिश करें पर आपको मालूम नहीं चल पाएगा कि वह धर्मशाला कौन सी थी, जहां पर भगत सिंह ठहरते थे। वे 1925 में प्रताप में नौकरी करने कानपुर गए थे। पीलखाना में प्रताप की प्रेस थी। वे उसके पास ही रहते थे। वे रामनारायण बाजार में भी रहे। वे नयागंज के नेशनल स्कूल में पढ़ाते भी थे। यानी कि उनका इन दोनों शहरों से खास तरह का संबंध रहा। पर, अफसोस कि इन दोनों शहरों में वे जिधर भी रहे या उन्होंने काम किया, बैठकों में शामिल हुए, उधर उनका कोई नामोनिशान तक नहीं है। उन्हें एकाध जगह पर बहुत मामूली तरीके से याद करने की कोशिश की गई है।

जिस स्कूल में भगत सिंह पढ़ाते थे, उसका नाम भी उनके नाम पर नहीं रखा गया। यह दुखद है कि कानपुर जैसे शहर ने उनको लेकर कितना ठंडा रुख अपनाया। ‘प्रताप’ में भगत सिंह ने सदैव निर्भीक और निष्पक्ष पत्रकारिता की। ‘प्रताप’ प्रेस के निकट तहखाने में ही एक पुस्तकालय भी बनाया गया, जिसमें सभी जब्तशुदा क्रांतिकारी साहित्य और पत्र-पत्रिकाएं उपलब्ध थीं। भगत सिंह यहां पर बैठ कर घंटों पढ़ते थे। असल में, प्रताप प्रेस की बनावट ही कुछ ऐसी थी कि जिसमें छिपकर रहा जा सकता था और फिर सघन बस्ती में तलाशी होने पर एक मकान से दूसरे मकान की छत पर आसानी से जाया जा सकता था। भगत सिंह ने तो ‘प्रताप’ अखबार में बलवंत सिंह के छद्म नाम से लगभग ढाई वर्ष तक कार्य किया। चंद्रशेखर आजाद से भगत सिंह की मुलाकात विद्यार्थीजी ने ही कानपुर में कराई थी।

अब ‘प्रताप’ की इमारत खंडहर में तबदील हो रही है, पर इमारत के बाहर एक स्मृति चिह्न तक नहीं लगा जिससे पता चल सके कि इसका भगत सिंह के साथ किस तरह का संबंध रहा है। तमाम सरकारों में कानपुर से चुने गए प्रतिनिधि मंत्री तक हुए, लेकिन उन लोगों ने भी कभी इस ओर ध्यान नहीं दिया। किसी को यह फिक्र नहीं कि भगत सिंह से जुड़ी जगहों के बाहर कम से कम एक स्मृति-चिह्न ही लगवा दिया जाए।

दिल्ली में आठ अप्रैल, 1929 को केंद्रीय असेंबली में भगत सिंह ने बम फेंका। पूरा हाल धुएं से भर गया। भगत सिंह चाहते तो भाग भी सकते थे पर उन्होंने पहले ही सोच रखा था कि उन्हें दंड स्वीकार है, चाहे वह फांसी ही क्यों न हो। आखिर उन्होंने भागने से मना कर दिया। उस समय वे खाकी कमीज और निकर पहने हुए थे। बम फटने के बाद उन्होंने ‘इंकलाब! जिंदाबाद! साम्राज्यवाद! मुदार्बाद! का नारा लगा रहे थे और अपने साथ लाए हुए पर्चे हवा में उछाल रहे थे। इसके कुछ ही देर बाद पुलिस आ गई और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उस स्थान ( संसद भवन) में उस घटना के 79 साल बाद उनकी प्रतिमा स्थापित की गई। हालांकि, उस प्रतिमा को लेकर भगत सिंह के परिवार को आपत्ति है। उनका कहना है कि संसद में लगी प्रतिमा में उन्हें पगड़ी पहने दिखाया गया है। जबकि वे यूरोपीय अंदाज की टोपी पहनते थे।

भगत सिंह ने दिल्ली में अपनी भारत नौजवान सभा के सभी सदस्यों के साथ का हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन में विलय किया और काफी विचार-विमर्श के बाद आम सहमति से एसोसिएशन को एक नया नाम दिया ‘हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन।’ ये अहम बैठक दिल्ली में फिरोजशाह कोटला मैदान के साथ वाले मैदान में हुई। इसमें चंद्रशेखर आजाद, बिजय कुमार सिन्हा,भगवती चरण वोहरा, शिव वर्मा जैसे क्रांतिकारों ने भाग लिया था। इस स्थान पर एक स्मृति चिह्न एक जमाने में लगा था, जो अब धूल खा रहा है। पहले तो इधर शहीद भगत सिंह बस टर्मिनल था। इस वजह से कुछ लोगों को मालूम चल जाता था कि इसका भगत सिंह से क्या संबंध रहा है। सच है कि आपको देश के हर शहर और कस्बे में अहम विरासतें धूल खाती मिल जाएंगी। तमाम बड़े क्रांतिकारियों, लेखकों, खिलाड़ियों और जीवन के अन्य क्षेत्रों में अहम योगदान देने वाली शख्सियतों से जुड़ी जगहें उनके जाने के बाद जर्जर होने लगती है। उन्हें न तो समाज देखता है और न प्रशासन। अमेरिका और यूरोप में खास इमारतों के बाहर स्मृति पटल लगा दिया जाता है, जिसमें उस इमारत के महत्त्व पर विस्तार से जानकारी दे दी जाती है। पर हमें इस लिहाज से बहुत कुछ सीखना है?१

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First Published on October 2, 2016 2:27 am

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