June 29, 2017

ताज़ा खबर
 

रविवारी

बाल कहानी- चुन्नू और गन्नू

चुन्नू खरगोश की यह बात सुन गन्नू चूहा मन मसोस कर रहा जाता। कभी-कभी चुन्नू खरगोश उसे भूरिया-भूरिया कह कर भी चिढ़ाता।

बारिश में पहनावा

यों तो वर्षा-ऋतु को खुशगवार और सलोना मौसम कहा जाता है। सावन को तो साज-शृंगार का महीना भी माना जाता है। लेकिन बारिश की...

सेहत- संक्रामक रोगों का मौसम

बरसात में जहां मौसम सुहाना होता है, वहीं इसमें कुछ संक्रामक बीमारियां जैसे, डेंगू, मलेरिया, मियादी बुखार, जुकाम, फ्लू और निमोनिया फैलने का खतरा...

चिंता- लापरवाही के शिकार मरीज

प्रसव के लिए की गई सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने पीड़िता रुबीना के गर्भाशय में सुई छोड़ दी थी, जिसके चलते अब वह कभी...

मुद्दा- कैसे बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

2017 और 2018 में भारत में रोजगार सृजन की गतिविधियों की गति पकड़ने की संभावना नहीं है, क्योंकि इस दौरान धीरे-धीरे बेरोजगारी बढ़ेगी। आशंका

कविता- हमारी जिंदगी, पहले पहल

पद्मा सचदेव की कविताएं।

ललित प्रसंग- परदेस को उठे पांव

हमारे गांव के जवान बड़े-बड़े शहरों की छोटी-छोटी फैक्टरियों के मजदूर बन कर अपना मुंह छिपाने को बेबस हैं।

कहानी- मैं, रेजा और पच्चीस जून

यह उम्र ही ऐसी होती है। सब कुछ अच्छा लगता है। सुंदरता और शोख रंग तो खींचते ही हैं, पर जो हट कर है,...

चंद्रकांता: एक सदाबहार शाहकार

हर भाषा में कुछ न कुछ ऐसी रचनाएं होती हैं, जिनकी प्रासंगिकता बनी रहती है। जमाना बदलता रहता है किसी रंगमंच की तरह, लेकिन...

कहानी- गलती कहां हुई

एक दिन मिंकू ने तय किया कि अब से वह अपने भोजन की व्यवस्था खुद करेगा। गरमी के दिन थे। इन दिनों तरबूज खूब...

गरमी में गहरे रंगों का खुमार

गरमी में अगर आप गहरे रंगों से गुरेज करती हैं, तो इस बार ऐसा करने से रह सकता है आपका फैशन अधूरा, क्योंकि इस...

सेहत- आंखों की देखभाल

दिन में जब कभी सुविधा हो, आंखों का व्यायाम करें। यह बहुत आसान है और ऐसा करने से न सिर्फ आंखों की तरलता बनी...

आधी आबादी- कार्यबल में महिलाओं की कमीं

भारत में 2005 के बाद से श्रमशक्ति में महिलाओं की भागीदारी घटती जा रही है। यह वाकई विचारणीय है, क्योंकि महिलाओं की भागीदारी...

मुद्दा- पर्यटन और संस्कृति

चरैवेति चरैवेति’ यानी चलते रहो, चलते रहो! भारतीय संस्कृति का यह पुरातन सूत्र गति, प्रगति और विकास के माध्यम से हमारे राष्ट्रीय, सामाजिक, सामूहिक...

कविताएं- अधूरा प्रेम, यादें

रविवांत की कविताएं।

विमर्श- विक्षोभ और रचनाशीलता

पूंजीवादी युग के साहित्यकार तगड़े तंत्र की जकड़बंदी में विक्षुब्ध। परिवर्तनेच्छा, क्रोध और अवशता की त्रयी क्षोभ का निर्माण करती है। इस त्रयी को...

कहानी- कीमत

निरीह बकरे की तरह मिमिया-सा उठा सुधाकर लाल, ‘आप ही बताओ भाई नवल कि मैं क्या करूं? प्रबंधन ग्लोबल कंपनियों का उदाहरण देकर कहती...

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