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रविवारी

कविता- नब्ज टटोलें बादल की

प्रभुदयाल श्रीवास्तव की कविताएं।

बाल कहानी- झूम उठे बादल

दार्जिलिंग उन दिनों एक शांत और खुशनुमा शहर हुआ करता था। चारों ओर कुदरत ने अपने दोनों हाथों से हरियाली बिखेर रखी थी। सभी...

पोशाक, जो दिखाए छरहरा

कपड़े पहनना भी एक कला है। अक्सर महिलाएं फैशन में नए चलन को देख कर कपड़े और जूते वगैरह खरीद तो लेती हैं, मगर...

दाना-पानी- पूरनपोली

पूरनपोली देश के विभिन्न हिस्सों में पसंद की जाती है और इसे अलग-अलग ढंग से बनाया जाता है। इसे मुख्य रूप से दो तरह...

सेहत- नेत्रशोथ यानी कंजंक्टिवाइटिस

कंजंक्टिवाइटिस को बोलचाल की भाषा में आंख आना कहते हैं। इसकी वजह से आंखें लाल, सूजन युक्त, चिपचिपी (कीचड़युक्त) होने के साथ-साथ उनमें बाल...

इकबाल का अंदाजे-बयां

1903-04 में ‘सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा’ सरीखा लोकप्रिय गीत देने वाला शायर 1930 में उसी ‘हिंदोस्तां’ के बीच एक नया मुसलिम...

कविताएं- चूहे

महेश आलोक का लिखी कविताएं।

कहानी- इंतजार

उस स्कूल में मेरी बिटिया की इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षा का केंद्र पड़ा, जहां भव्य भवन के पचास फिट दाएं या बाएं कोई और...

अवसर- हिंदी नवजागरण के दो अग्रदूत राहुल सांकृत्यायन और आचार्य शिवपूजन सहाय

भारतेंदु और महावीर प्रसाद द्विवेदी ने जिस हिंदी नवजागरण का सूत्रपात किया था, उसे राहुल जी और शिवपूजन जी ने हिंदी वांग्मय का स्वरूप...

अब कहां चले बहुरूपिया

हाट-बाजारों, मेलों, शहर-कस्बों की गलियों में भेष धरे घूमते बहुरूपिए सदियों से अपनी कला का प्रदर्शन करते आ रहे हैं। किसी देवी-देवता, किसी प्रसिद्ध...

कविता- खट-पट स्कूटर

जनसत्ता बाल कविता

बाल कहानी- छड़ी कबूतर

कबूतरों और अनुज के बीच यह लुका-छिपी इतनी बार हुई कि वह थक कर दूसरे कमरे में चला गया, तब तक ट्यूशन जाने...

क्रॉप पैंट्स- यह आराम का मामला है

फैशन बदलाव और प्रयोगों के बल पर जिंदा रहता है। हर फैशन डिजाइनर की कोशिश होती है कि वह पुराने तरीके के या पुराने...

स्वादिष्ट दाल वड़ा और नारियल की चटनी

दाल वड़ा बनाने के लिए चने की दाल उपयुक्त होती है। चना स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत गुणकारी दाल है।

सेल्फी, सुंदरता और सादगी का सवाल

यहां एक महत्त्वपूर्ण बात यह उभरती है कि स्त्री ने कभी अपनी देह को अपनी नजर से न देख कर पुरुष की नजर से...

कविताएं- वक्त आ गया, किरदार निभाते हुए

नरेंद्र मोहन की कविताएं।

विमर्श- अवरुद्ध सहृदयता

एक बार जिज्ञासा हुई कि निराला की तुलना में मुक्तिबोध क्या हैं, कहां हैं? यह 1966 की बात है।

कहानी- तहखाने

उस दिन तो जैसे उन्हें काठ ही मार गया था... ! कैसे निकले होंगे वे बोल, व्योमेश के मुख से? एक पिता के...

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