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विकास की बुनियाद में भाषांतरण

इसमें संदेह नहीं कि विश्व की सभ्यताओं और संस्कृतियों के विकास और परस्पर आदान-प्रदान में अनुवाद की विशेष भूमिका रही है। विभिन्न सभ्यताओं और संस्कृतियों को जानने-समझने के लिए अनुवाद को माध्यम बनाए बिना काम नहीं चल सकता।
Author July 30, 2017 02:51 am

पूरनचंद टडन

भाषा के जन्म से ही अनुवाद की आवश्यकता पूरे विश्व में बनी हुई है। यह आधुनिक विश्व में न केवल प्रासंगिक विधा है, बल्कि अपरिहार्य भी। किसी भी देश और उसके समाज का विकास अनुवाद के बिना संभव नहीं है। आधुनिक युग संचार-क्रांति और सूचना प्रौद्योगिकी का है। इस संदर्भ में अनुवाद की प्रासंगिकता और उपादेयता असंदिग्ध है। भूमंडलीकरण की अवधारणा और ‘विश्व ग्राम’ की संकल्पना का आधार ‘संचार’ तथा ‘अनुवाद’ को माना जा रहा है। आज जिस प्रकार ज्ञान-विज्ञान का क्षितिज विस्तृत होता जा रहा है वैसे ही देश-विदेश के अनेक भाषाभाषी समुदायों का मिलाप भी संभव हो रहा है। ज्ञान-विज्ञान के विश्व-व्यापी प्रचार-प्रसार से मानव चेतना नए आयामों को छू रही है। विश्व बंधुत्व और पारस्परिक संवेदनाओं की अभिव्यक्ति को प्रस्तुत करने के लिए ‘अनुवाद’ उपयोगी सिद्ध हो रहा है। बहुसंचार और बहुराष्ट्रीयता के इस आंदोलन और अभियान ने भाषा को भी एक प्रौद्योगिकी बना दिया है। नतीजतन ‘अनुवाद’ इस प्रौद्योगिकी की ‘रीढ़ की हड्डी’ बन गया है।

इसमें संदेह नहीं कि विश्व की सभ्यताओं और संस्कृतियों के विकास और परस्पर आदान-प्रदान में अनुवाद की विशेष भूमिका रही है। विभिन्न सभ्यताओं और संस्कृतियों को जानने-समझने के लिए अनुवाद को माध्यम बनाए बिना काम नहीं चल सकता। दरअसल, अनुवाद एक सांस्कृतिक सेतु का काम करता है। एक ऐसा बहुआयामी, बहु-दिशागामी सेतु, जिसके ऊपर-नीचे, दाएं-बाएं से अनेक भाषाई मार्ग खुलते, प्रशस्त होते, निर्बाध आवागमन और आदान-प्रदान की दिशाएं उजागर करते हैं। भूमंडलीकरण के इस दौर में अनुवाद व्यापार, सांस्कृतिक अंतरराष्ट्रीय संबंध, विनियम और आयात-निर्यात की दृष्टि से बाजार पर अपना शिकंजा लगातार कस रहा है। प्राचीन काल में अनुवाद सर्जनात्मक साहित्य तक सीमित था, पर आज यह हमारे जीवन-व्यवहार की भी वस्तु है। विभिन्न राष्ट्रों की साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत का आदान-प्रदान अनुवाद द्वारा ही संभव है। आज भूमंडलीकरण के युग में साहित्यिक और साहित्येतर क्षेत्रों में होने वाले अनुवाद-कर्म ने अनुवाद क्रांति को जन्म दिया है। आज दुनिया एक गांव बन चुकी है। विश्वग्राम की परिकल्पना अब मीडिया-आंदोलन और संचार-क्रांति से साकार हो रही है। विभिन्न समाजों की अलग-अलग संस्कृतियों और साहित्य के माध्यम से व्यक्त होने वाली संस्कृति अनुवाद द्वारा एक भाषा से दूसरी भाषा में अब सहज ही अंतरित हो जाती है।

अनुवाद आज रोजी-रोटी की दिशा में अत्यंत कारगर सिद्ध हो रहा है। केंद्र और राज्य सरकार के कार्यालयों, बैंकों, अस्पतालों, रेलवे, एयर लाइंस, पर्यटन, संसद, विधानसभाओं, दूतावासों, पत्र-पत्रिकाओं, अकादमियों, प्रकाशन संस्थानों, सरकारी प्रेसों, रेडियो, दूरदर्शन, विज्ञापन एजेंसियों, अभिवादन-पत्र बनाने वाली संस्थाओं, शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थाओं, विज्ञान-तकनीक और प्रौद्योगिकी से संबद्ध कार्यालयों, अनुवाद ब्यूरो, भाषा संबंधी निदेशालयों और संस्थानों, विश्वविद्यालयों, स्कूलों, जन-संपर्क कार्यालयों, होटलों, प्रदर्शनियों, संग्रहालयों, पुस्तकालयों, नाट्य संस्थाआें, खेलों, बाजार, वित्त-वाणिज्य, बीमा क्षेत्र, कोश विज्ञान, पारिभाषिक शब्दावली बनाने वाली संस्थाओं आदि अनेक क्षेत्रों में अनुवाद की उपादेयता है। लाखों लोग इन क्षेत्रों में अनुवाद के माध्यम से कार्य करते हुए धनार्जन कर या रोजी-रोटी कमा रहे हैं। सिनेमा भी आज अनुवाद का बहुत बड़ा मंच बन गया है। टेलीविजन के अनेक चैनल आज अनुवाद के माध्यम से ही अपने कार्यक्रम चला रहे हैं। आज डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, जज, फैशन डिजाइनर, इंटीरियर डेकोरेटर, आर्किटैक्ट, मनोवैज्ञानिक, बिल्डर आदि भी अनुवाद के माध्यम से अपने व्यवसाय को व्यापक स्तर पर देश-विदेश में फैला-बढ़ा रहे हैं।

वास्तव में अनुवाद को ‘पूरे विश्व और विश्व बाजार की एक भाषा’ कहा जा सकता है। मानव को मानव के निकट लाने, संवाद स्थापित करने, मौन को तोड़ने की यह भाषा ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना को साकार करने का काम करती है। द्विभाषिकता और बहुभाषिकता के मध्य अनुवाद का यह सांस्कृतिक सेतु विलक्षण और क्रांतिकारी स्तर पर रचनात्मक कार्य करता है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परस्पर शांति स्थापित करने और मानव मात्र को समझने-समझाने का कार्य भी अनुवाद और अनुवादक ही करता है। देश-विदेश में व्यवसाय भी अब अनुवाद के माध्यम से विस्तार पाने लगा है। अब अनुवाद ‘दोयम दर्जे का कार्य’ नहीं है।

जनसामान्य, देश-विदेश के लिए, संप्रेषण, संवाद और संवेदना के धरातल का निर्माण करने वाली यह विधा आज पूरे विश्व में निश्चित ही विलक्षण और अतुलनीय बनती जा रही है। तुलनात्मक साहित्य, समाजशास्त्रीय अध्ययन, ऐतिहासिक-सांस्कृतिक कृतियों के जीर्णाेद्धार के लिए अनुवाद एक उपयोगी और आवश्यक विधा बन गया है। विश्व के समस्त विकसित देशों के मूल में अनुवाद की भूमिका रचनात्मक और सराहनीय रही है। इसलिए विकासशील देशों के लिए तो यह प्रेरणा का स्रोत भी है और लक्ष्य प्राप्ति का मूल मंत्र भी।
आज जब भाषा के प्रयोग-अनुप्रयोग के संबंध में जागृति आई है, अनुवाद ने ही हमारा मार्ग प्रशस्त किया है। सरकारी, गैर-सरकारी या संस्थागत स्तर पर देश-भर में अनुवाद के स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रम चलाए जाने लगे हैं। अनुवाद डिप्लोमा से रोजगार मिलने लगे हैं। अनुवाद में उपाधियों को प्रोत्साहित किया जाने लगा है। अनुवाद ‘शास्त्र’ भी है और इसी कारण अनुशासन की विधा भी है। अनुवाद कला, विज्ञान और शिल्प भी है। यही कारण है कि जिसे जो चाहिए, उसका मार्ग खोलने, उसे उपलब्ध कराने, उसकी मनोकामना पूर्ण करने का कार्य भी अनुवाद ही करता है। हमारे व्यक्तिगत जीवन के एक ऐसे कक्ष की तरह है अनुवाद, जिसमें अनेक दरवाजे, खिड़कियां और रोशनदान हैं और विश्व का चहुंमुखी या बहुमुखी ज्ञान, प्रकाश और स्वच्छ वायु बन कर उन दरवाजों, खिड़कियों और रोशनदानों से उस जीवन-कक्ष में प्रवेश करता रहता है। अनुवाद वास्तव में जीवन को पूर्णता देने वाली परिपूर्ण विधा है। किसी भी क्षेत्र में रहें, किसी भी कार्य से जुड़ें, नौकरी या व्यवसाय से जुड़ें पर अनुवाद आनंद भी प्रदान करता है और ज्ञान भी। जब जैसी मानसिकता हो, मन हो, रुचि हो तब वैसी ही पुस्तक, वैसे ही लेखक, वैसी ही विधा को आज अनुवाद के माध्यम से पढ़ सकते हैं।

अनुवाद, वास्तव में जीवन के युद्ध को जीतने का मूल मंत्र है। आत्म विश्वास प्रदान करने वाला शुद्ध संकल्प है। अपने को अद्यतन और अधुनातन बनाने का वह स्वप्न है अनुवाद, जिसे आप निष्ठा और समर्पण से साकार कर सकते हैं। भाषा, साहित्य, व्यवसाय, मूल्य, आचार-विचार या कुछ भी सीखने-सिखाने और कमाने का जादू है अनुवाद। आने वाले समय में अनुवाद की प्रासंगिकता निरंतर बढ़ेगी और मानव जाति के उद्धार और कल्याण में इसकी भूमिका और रचनात्मक होगी।

अनुवाद ने बाजार की दृष्टि से आज अनेक व्यावसायिक, शैक्षिक, आध्यात्मिक, मनोरंजनपरक, भाषिक, वोकेशनल और ‘स्किल-डेवलपमैंट’ क्षेत्रों में अपनी गहरी पैठ बना ली है। विज्ञान, वाणिज्य और कला के साथ-साथ तकनीक और प्रौद्योगिकी से संबद्ध अनुशासनों की शैक्षिक सामग्री के विकास में अनुवाद आज रचनात्मक भूमिका निभा रहा है। विधि, मीडिया, कला, सेना, एयर लाइंस, प्रबंधन, अर्थशास्त्र, कंप्यूटर, प्रतियोगी परीक्षाओं आदि में भी अनुवाद एक आवश्यकता, सशक्त और अत्यंत उपयोगी माध्यम एवं साधन बन गया है।
फैशन की दुनिया, पाक-कला, घरेलू साज-सज्जा, स्वास्थ्य, योग, चिकित्सा आदि क्षेत्रों का विस्तार और विकास भी अब अनुवाद से ही प्रचुर मात्रा में हो रहा है। खेल जगत, ब्यूटी पार्लरों मुद्रण, ज्वैलरी डिजाइनिंग, तत्काल भाषांतरण, एनिमेशन फिल्म, सिनेमा, कैपशनिंग, फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, लेदर डिजाइनिंग, संवाद लेखन, मैकेनिकल क्षेत्र, वेब डिजाइनिंग, क्राफ्ट, रिटेलिंग आदि अनेक नए क्षेत्रों में जहां आज बाजार शिखर पर है, वहां अनुवाद की मदद ली जा रही है। चीन के उत्पाद भारत या अन्य देशों में चीनी भाषा में नहीं बिक रहे। हमें अनुवाद के माध्यम से उपलब्ध बाजार को समझने और उसका सार्थक दोहन और उपयोग करने की आवश्यकता है। हमें संकल्प, श्रम-साधना, लक्ष्य-निर्धारण तथा समयबद्ध योजना के अनुसार काम करने की आवश्यता है।

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