April 28, 2017

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वक्त की नब्ज- नाहक पहरेदारी

इस्लाम इतने बुरे दिनों से गुजर रहा है जिहादी आतंकवाद के कारण कि मुसलमानों के लिए किसी गैर-इस्लामी देश का वीजा लेना भी तकरीबन असंभव होता जा रहा है। ऐसे दौर में सनातन धर्म का इस्लामीकरण बेवकूफी नहीं तो क्या है।

Author March 26, 2017 05:13 am
गोरखपुर से भाजपा सांसद और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ।

हम क्या खाते हैं, क्या पीते हैं, किससे मोहब्बत करते हैं इन चीजों से सरकार का कोई वास्ता नहीं होना चाहिए, लेकिन इन्हीं चीजों में दखल शुरू होती है जब धर्म-मजहब से जुड़े लोग ऊंचे राजनीतिक पदों पर बिठाए जाते हैं। सो, उत्तर प्रदेश में सत्ता संभालने के फौरन बाद योगी आदित्यनाथ ने अवैध बूचड़खाने बंद कराने की मुहिम चलाई।

शुरू में स्पष्ट कर दूं कि मैं हिंदुओं का दर्द समझती हूं। मुझे भी गुस्सा आता है जब देखती हूं कि मेरे सेक्युलर बंधु हिंदू शब्द का तभी इस्तेमाल करते हैं, जब हिंदू धर्म, संस्कृति या सभ्यता को नीचा दिखाना चाहते हैं। जो लोग आतंकवाद के साथ जिहाद शब्द नहीं जोड़ना चाहते हैं, जो लोग दोहराते फिरते हैं कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं है, वही लोग ‘भगवा आतंकवाद’ आसानी से पहचान लेते हैं। मुझे गुस्सा आता है कि भारतीय स्कूलों और विश्वविद्यालयों में पढ़ाई करने के बाद भी मुझे यूनान, मिस्र, रोम की प्राचीन सभ्यताओं के बारे में ज्यादा सिखाया गया था और भारत की प्राचीन संस्कृति के बारे में न के बराबर। बहुत बाद में, जब मेरी शिक्षा समाप्त हो चुकी थी, मैंने अल्लामा इकबाल का वह शेर पढ़ा, जो मेरी नजरों में भारत की सारी कहानी बयान करता है- ‘कुछ बात है जो हस्ती मिटती नहीं हमारी, सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-जमां हमारा। यूनान, मिस्र, रोमा सब मिट गए जहां से, अब भी मगर है बाकी नाम-ओ-निशान हमारा।’

वह ‘कुछ बात’ अब भी है भारत में, लेकिन इस बात को हम भारत के बच्चों से छिपा कर रखते हैं। स्कूलों में हम उन्हें नहीं सिखाते कि भारतीय होने का मतलब क्या है। उलटा हमारी शिक्षा प्रणाली इतनी अजीब है कि अपने बच्चों को हम सिखाते हैं कि भारत इतना बेकार देश है कि जितनी जल्दी हो सके यहां से भागने की तैयारी करो। इसके लिए बहुत जरूरी है अंग्रेजी सीखना, सो हर गांव में आज दिखते हैं ‘इंग्लिश मीडियम’ प्राइवेट स्कूल। अंग्रेजी सीखने में कोई हर्ज न होता, अगर साथ-साथ बच्चे को हम यह भी सिखा सकते कि उसके अपने देश की संस्कृति क्या है। ऐसा हम नहीं कर पाते हैं, सो अपने बच्चों को लद्धड़ बनाते जा रहे हैं। इन चीजों को देख कर अगर हिंदुत्ववादियों को गुस्सा आता, तो मैं उनके साथ होती। लेकिन इन चीजों में परिवर्तन लाने के बदले जब वे सनातन धर्म के इस्लामीकरण में लगे रहते हैं, तो मुझे सख्त तकलीफ होती है।

इस्लामीकरण करना चाहते हैं, मुझे संघ के कई वरिष्ठ नेताओं ने खुद बताया है और ये लोग यह भी बताते हैं कि ऐसा किए बिना हिंदू कभी मुसलमानों का मुकाबला कर नहीं पाएगा। इनकी बातों को सुन कर ऐसा लगता है मुझे कि उन्होंने दूर किसी पहाड़ी गुफा में पिछले कुछ दशक बिताए होंगे, वरना जरूर उनको दिखता कि इस्लाम इतने बुरे दिनों से गुजर रहा है जिहादी आतंकवाद के कारण कि मुसलमानों के लिए किसी गैर-इस्लामी देश का वीजा लेना भी तकरीबन असंभव होता जा रहा है। ऐसे दौर में सनातन धर्म का इस्लामीकरण बेवकूफी नहीं तो क्या है?ये सारी बातें मैं आज इसलिए कह रही हूं, क्योंकि पिछले हफ्ते मुझे ट्विटर पर हिंदुत्ववादियों ने ऐसी गालियां दीं कि क्या बताऊं। वह भी सिर्फ इसलिए कि मैंने योगी आदित्यनाथ के उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने पर एतराज जताया। एतराज है मुझे, क्योंकि मेरा मानना है कि साधु, संतों को ऊंचे राजनीतिक ओहदों से दूर रखा जाना चाहिए। जिन देशों में धर्म-मजहब के रहनुमाओं को ऊंचे राजनीतिक ओहदों पर बिठाया गया है, या मजहब से जुड़े राजनीतिक दलों को सत्ता मिली है, उन देशों में बर्बादी ही आई है, खैरियत नहीं। मिसालें अपने पड़ोस में अफगानिस्तान और पाकिस्तान की हैं और थोड़ी दूर जाना चाहें तो देखिए ईरान में क्या हुआ है और आइएसआइएस की खिलाफत में क्या हुआ, जब खिलाफत का निजाम कायम था।

खराबी तब शुरू होती है जब धार्मिक पुलिस का हस्तक्षेप होने लगता है उन चीजों में जो किसी समझदार इंसान के निजी मामले होने चाहिए। हम क्या खाते हैं, क्या पीते हैं, किससे मोहब्बत करते हैं इन चीजों से सरकार का कोई वास्ता नहीं होना चाहिए, लेकिन इन्हीं चीजों में दखल शुरू होती है जब धर्म-मजहब से जुड़े लोग ऊंचे राजनीतिक पदों पर बिठाए जाते हैं। सो, उत्तर प्रदेश में सत्ता संभालने के फौरन बाद योगी आदित्यनाथ ने अवैध बूचड़खाने बंद कराने की मुहिम चलाई। अवैध हों तो बंद होने भी चाहिए, लेकिन फौरन दिखने लगे ऐसे लोग, जिन्होंने मोहम्मद अखलाक की हत्या की थी इस शक पर कि उसके घर की फ्रिज में बीफ था। गोहत्या रोकने के नाम पर उन्होंने कई गोश्त की दुकानें जला डालीं हाथरस में पिछले हफ्ते।योगी आदित्यनाथ की दूसरी मुहिम चली है ऐंटी-रोमियो स्कॉड वाली, जिसके शुरू होते ही पुलिसवाले सड़क पर चलते लड़के-लड़कियां पकड़ने लगे। लड़कियों से ऐसे सवाल पूछे गए, जैसे सउदी अरब जैसे कट्टरपंथी इस्लामी देशों में पूछे जाते हैं। वहां जब कोई महिला अकेली होती है या किसी गैर-मर्द के साथ दिखती है, तो उसको गिरफ्तार किया जाता है। ऐसा उत्तर प्रदेश में अभी तक नहीं हो रहा है, लेकिन जिस तरह के सवाल लड़कियों से पूछे जा रहे थे, ऐसा लगा कि वह दिन दूर नहीं, जब लड़कियों की आजादी पर पाबंदी लग जाएगी।

क्या यह भारतीय सभ्यता है? हो सकता है कि आगे चल कर योगी आदित्यनाथ बहुत काबिल मुख्यमंत्री साबित हों। हो सकता है कि इन चीजों को छोड़ कर वे उत्तर प्रदेश में असली विकास और परिवर्तन लाकर दिखाएं। आखिर इतनी शानदार बहुमत अगर मतदाताओं ने दी है मोदी को, तो विकास और परिवर्तन के नाम पर, हिंदुत्व के नाम पर नहीं।खतरे की घंटी अगर मैंने अभी से बजानी शुरू कर दी है, तो सिर्फ इसलिए कि योगी अदित्यनाथ जिन चीजों को अभी तक प्राथमिकता दे रहे हैं, उनका वास्ता न विकास से है, न परिवर्तन से। उनका वास्ता है किसी चीज से तो उस पहरेदारी से, जो धार्मिक प्रचारक करते हैं।

 

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First Published on March 26, 2017 5:04 am

  1. नौशाद
    Apr 2, 2017 at 9:04 am
    लेख बहुत अच्छा है, लेकीन लेखिका ने कुछ शब्दावली का प्रयोग किया है, वो आपत्तीजनक है. जैसे "सशातन धर्म का इस्लामीकरण (पहेला आदमी हजरत आदम मुस्लिम थे, इसलिये सनातन धर्म तो इस्लाम है. दुसरी बात ये की, इस्लाम का अर्थ शांती होता है. तो इस्लामीकरण का अर्थ शांतीकरण होगा." "जिहादी आतंकवाद (जिहाद सत्त्य के लिये किये संघर्ष को कहेते है. फिर आतंकवाद जिहादी कैसे हो गया? ", "आयसिस कि खिलाफत" (इराम की इंटलिजन्स ने साबित किया है की, आयसिस ये एक यहुदी संघटन है जिसे इस्लामी क्राउंतीकारीयोंको खतम करने के लिये इस्रायल ने बनाया है (संदर्भ: वेटरन टुडे) इन्ही शब्दावली से फॅसिस्ट तत्वों को अप्रत्यक्ष रूप से ताकत मिलती है. लेख को संतुलित बनाने के लिये इन शब्दावली का अक्सर प्रयोग किया जाता है, लेकिन इसके अलावा मुस्लिम समाज पर दुसरे सच्चे आरोप भी लगाये जा सकते है- जैसे ये सच्चे इस्लाम का हिंदी/अंग्रेजी मे प्रचार नही करते, दुसरो को कुरआन नही पढने देते. इन आरोपों मे काफी तथ्य है. संपादक महोदय भी इन शब्दावली को आइंदा कृपया संपादित करे.
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    1. अभिषेक
      Mar 28, 2017 at 8:39 am
      मैडम कभी योगी जी से मुलाक़ात करिये तब अपनी बुद्धिजीविता का प्रदर्शन करियेगा।।।।। माना आप बहुत पढ़ी लिखी है। लेकिन असली राजनीती। और धर्म से जुडी वातें जान्ने के लिए पहले मिटटी से जुड़िये।।।। समझी
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      1. S
        Sidheswar Misra
        Mar 26, 2017 at 9:46 am
        भारतीय पूँजीवाद के विकाश का रास्ता ही है संतो ,महात्मायो को उच्च पदों पर बढ़ाया जाय। जिस मिडिया के ारे जनता को गुमराह किया जा रहा .उसमे कई बुद्धजीवी की कमाई भी हो रही है। लेकिन कोई यह नहीं कह रहा की अमेरिका में भारतीय हिन्दू ही क्यों मरे जा रहे है। आप को भी परेशानी है पूँजीवाद के विनाश पर जिसने शोषण के अतरिक्त किया ही क्या है।
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        1. K
          Kiran Prakash Gupta
          Mar 26, 2017 at 9:37 am
          इतने साफ सुथरे ढंग से तवलीन जी ने जो बात रखी है वह सबके लिए विचारणीय है।इसी को राष्ट्रवादी सोच कहते है।बिना किसी को गाली दिए विचार का मुद्दा रखना पत्रो एवं पत्रिकाओ से दूर हो चुका है। आजकल वही पत्रकार पत्रकार जगत मे महत्व पा रहा है जो हिन्दू हिन्दुस्तानी को जितनी संभव हो गाली दे सके । इन टुच्चे लोगो के पास तर्क नही केवल गाली होती है और इस कारण एक विद्रोहात्मक सोच पैदा होती है जो समाज मे नकरातमक विचार पैदा करता है।विचार स्वतंत्रता के नाम पर देश तोड़ने की बात कहने वालो की तरफदारी करना ,एफ एम हुसैन के चित्रो का पक्ष लेना मोदी के काम की आलोचना करने की जगह उन्हें हिन्दू होने के लिए निम्न स्तर की गलि देना तसलीमा और तारिक फतह के विचारो को दबाना पत्रकारिता नही है एक वृति है। काश पत्रकार तवलीन जी जैसी पत्रकारिता करते तो समाज मे इतनी कटुता नही होती लेकिन ऐसा होगा तो टुच्चे की दुकान बंद हो जायगी।
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          1. P
            Pravin Jha
            Mar 26, 2017 at 9:19 am
            Wonderful article! Though I differ with you when you compared stan, Afganistan and Iraan's religious influence with UP. Keep in mind that whenever Hinduism/sanatan-dharm gets stronger or influences the governance, nation become stronger with sarv-dharm-sambhaw and sabka-vikas ideology. It is not the idea or political slogan but Hinduism's basic rule. Don't be afraid.... now country will progress in positive direction with development only without any biasedness (Tushtikaran). Jai Hind (or Jai Hindu).
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            1. N
              Naved Yar Khan
              Mar 26, 2017 at 7:54 am
              Ek judgement Momina Qureshi versus NCT of Delhi online maujood hay.I say parne ke pashchat Tavleen Singh sahiba ki baat sahee lagegI ki vartman may avaid bucharkhano ko bandh karanay ki jo karyawahi U.P. Prashan duara ho rahee hay woh ghair kanooni hay kattarwadi dharmik prernao se lipt hay bharat ke savindhan ke vipri uske sath chal jabkee aaj jo bhi Sarkar may hay woh bhariya savindhan ke karan power may hay. Tavleen sahiba aapnay Yeh likha hay ki Jehad Musalmano ki wajah se Musalmano ko visa milnay me dikkaray aa rahee hay mera aap se aagrah hay is racism ko aap condemn karay kyuke aisee hee soch yo ki thee jiske karan agar 50 yahuudiyon ka dosh that toh lakho masoom yahuudiyon ko mar diya a. Dhayan rahay mainay agar shaad pryog kiya hay. Indira hi ke qatl ke baad masoom Sikho par zulm aur Godhra kand ke pachchath masoom Musalmano pay zulm issi racist soch ka natija hay.Kya kissi Hindu ko achcha lagega ki Dara Singh ke Priest ko mainay kee wajah se Donald Trump bhedbhav
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              सबरंग