May 27, 2017

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वक्त की नब्ज: हिंसा से सिर्फ हिंसा पैदा होगी

एक बार फिर हिंदुत्व के वीर जवानों ने एक बुजुर्ग मुसलमान की हत्या कर डाली पिछले सप्ताह।

Author May 7, 2017 03:28 am
उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ

एक बार फिर हिंदुत्व के वीर जवानों ने एक बुजुर्ग मुसलमान की हत्या कर डाली पिछले सप्ताह। इस बार इसलिए नहीं कि वह गायों की तस्करी कर रहा था, बल्कि इस शक पर कि गुलाम मोहम्मद ने अपने एक मुसलिम पड़ोसी की मदद की थी जब वह किसी पड़ोसी गांव की एक हिंदू महिला को भगा कर ले गया था। गुलाम मोहम्मद पचपन वर्ष का था। अकेले था अपने खेतों में जब भगवा पटके पहने कोई छह-सात युवकों ने उसे घेरा और जबरदस्ती मोटरसाइकल पर बिठा कर किसी वीरान जगह ले गए, और इतनी बुरी तरह मारा कि अस्पताल के रास्ते में उसकी मौत हो गई। मरने से पहले उसने अपने एक हिंदू दोस्त को फोन करके बताया कि उसके हत्यारों ने अपने आप को हिंदू युवा वहिनी का सदस्य कहा था। यह संस्था योगी आदित्यनाथ की सेना है। याद कीजिए कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने से पहले योगीजी ने कभी कहा था कि वे (मुसलमान) हमारी एक लड़की भगा कर ले जाएंगे तो हम उनकी सौ लड़कियां भगाएंगे। सो, गुलाम मुहम्मद शिकार बना लव जिहाद के पहरेदारों का, गोरक्षकों का नहीं।

मेरा मानना है कि बुजुर्गों, औरतों और बच्चों को मारना कायरता की हद है, सो मैंने गुलाम मुहम्मद की हत्या पर ट्वीट करके अफसोस जताया। नतीजा इस ट्वीट का यह हुआ कि गालियों का पहाड़ हिंदुत्ववादियों ने फोड़ा मुझ पर। उनको शिकायत थी कि मेरी ‘सेक्युलर’ आंखों को उन संघ कार्यकर्ताओं की लाशें कभी नहीं दिखतीं, जो केरल में मारे जाते हैं हर दूसरे दिन मार्क्सवादी हत्यारों के हाथों। इस बात को इतने सारे लोगों ने ट्वीट करके कहा कि मुझे साफ दिख गया कि ट्वीट करने वाले या तो संघ के कार्यकर्ता थे या किसी अन्य हिंदुत्ववादी संस्था के सदस्य। इनमें कई ऐसे भी थे, जिन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनकी नजर में गुलाम मोहम्मद के हत्यारे हीरो थे, इसलिए कि मुसलमान शासकों के ऐतिहासिक जुल्मों का बदला लेने का समय आ गया है।प्रधानमंत्री बहुत बार कह चुके हैं गर्व से कि भारत की सबसे बड़ी शक्ति हैं उसके नौजवान। दुनिया में कोई दूसरा देश नहीं है, जिसकी तकरीबन आधी आबादी की उम्र पच्चीस वर्ष से कम है। इस नौजवान शक्ति के बल पर नरेंद्र मोदी बनाना चाहते हैं एक नया भारत। बहुत सुनहरा सपना है यह और इस सपने को साकार करना भी मुश्किल नहीं है अगर इस नौजवान शक्ति को रचनात्मक चीजों में इस्तेमाल किया जाए। स्वच्छ भारत में उनका बहुत योगदान हो सकता है। ग्रामीण विकास कार्यों में वे बहुत मदद कर सकते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं में सुधार ला सकते हैं, इतना कि जैसे कभी अमेरिकी पीस कोर हुआ करता था। उस किस्म की संस्था बहुत काम आ सकती है देश में ‘सबका साथ, सबका विकास’ लाने के लिए।

वर्तमान समस्या लेकिन यह है कि इसी नौजवान शक्ति का नफरत और हिंसा फैलाने में ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है। गोरक्षा और लव जिहाद के नाम पर इस युवा शक्ति का बल प्रदर्शन किया जा रहा है, जो इस देश के लिए अति-हानिकारक साबित होगा भविष्य में। और वह इसलिए कि आधुनिकता, विकास, डिजिटल जैसे शब्द एक दुनिया के हैं और लव जिहाद और गौरक्षा जैसे शब्द दूसरी दुनिया के। इन शब्दों का मेल किसी हाल में नहीं बैठता। इससे भी बड़ी समस्या है कि जिन नौजवानों को आज गोरक्षा और लव जिहाद जैसी मुहिमों में भर्ती किया गया है उनको यह भी सिखाया गया है कि मुसलमानों को भारत में अगर रहना है तो उनको पहले स्वीकार करना होगा कि भारत वास्तव में एक हिंदू राष्ट्र है। यह स्थिति पैदा हुई है दशकों के झूठे सेक्युलरिज्म के कारण। ऐसा सेक्युलरिज्म जिसमें वोट बटोरने के लिए सेक्युलर राजनेताओं ने मुसलमानों को हमेशा बेगुनाह और पीड़ित साबित करने की कोशिश की थी। 26/11 वाले हमले के बाद दिग्विजय सिंह ने ऐसी किताब का समर्थन किया था, जिसका शीर्षक था ‘26/11: आरएसएस की साजिÞश’। ऊपर से यह भी मालूम हुआ विकिलीक्स द्वारा उन्हीं दिनों कि राहुल गांधी ने किसी अमेरिकी राजदूत को कहा था भारत का हाल समझाते वक्त कि उनकी नजरों में हिंदुत्व आतंकवाद से ज्यादा खतरा है इस देश को जिहादी आतंकवाद से कम।

दुनिया जानती है कि अपने इस दौर में सबसे बड़ा खतरा विश्व शांति को अगर है तो जिहादी आतंकवाद से, लेकिन भारत के ‘सेक्युलर’ राजनेताओं ने कभी इस बात को स्वीकार नहीं किया है। सो, आज अगर नौजवान हिंदू समझते हैं कि अब बारी उनकी है अपनी शक्ति दिखाने की, तो आश्चर्य की बात नहीं। समस्या सिर्फ यह है कि हिंसा के जिस रास्ते पर चल पड़े हैं, उससे लाभ होगा भारत के दुश्मनों का। अगर इन हिंदुत्ववादी हत्यारों को जल्दी काबू में नहीं लाया गया, तो वह दिन दूर नहीं जब जो हिंसा हम कश्मीर घाटी के शहरों में देख रहे हैं आज, वैसी हिंसा देश भर में फैल जाए। नफरत और हिंसा से पैदा होती है सिर्फ नफरत और हिंसा। भारत के मुसलमान अभी महफूज हैं उन गरम वहाबी हवाओं से, जो सीरिया और इराक को तबाह कर चुकी हैं, लेकिन बेगुनाह, बुजुर्ग मुसलमानों की इसी तरह हत्याएं होती रहीं तो जिहादी भारत के हर शहर में पैदा होने लगेंगे। इंडोनेशिया के बाद सबसे ज्यादा मुसलिम आबादी भारत में है। सो, अगर अंतरराष्ट्रीय जिहादी आतंकवाद का असर यहां फैलने लगता है, उसको काबू में लाना तकरीबन असंभव हो जाएगा। सो प्रधानमंत्रीजी, वक्त आ गया है कि एक बार फिर आप स्पष्ट शब्दों में कहें कि आप इस तरह की हिंसा बिल्कुल पसंद नहीं करते हैं।

 

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First Published on May 7, 2017 3:28 am

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