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वक्त की नब्ज: आरोप का बुलबुला

राहुल गांधी ने ऐसे वक्त पर प्रधानमंत्री की मदद की पिछले हफ्ते, जब उनको मदद की सख्त जरूरत थी।
Author December 18, 2016 01:51 am
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी। (File Photo: PTI)

राहुल गांधी ने ऐसे वक्त पर प्रधानमंत्री की मदद की पिछले हफ्ते, जब उनको मदद की सख्त जरूरत थी। करना तो चाहते थे नुकसान राहुलजी, लेकिन हुआ उलटा। नोटबंदी से जनता बहुत परेशान है इन दिनों, क्योंकि पैसों की किल्लत सबको तकलीफ दे रही है। बैंकों के सामने लंबी कतारें अब भी लगी हुई हैं और देहातों में तो हाल इतना बुरा है कि घंटों लाइन में लगने के बाद जब बारी आती है, तो मालूम पड़ता है कि बैंक के पैसे ही खत्म हो गए हैं। ऐसा नहीं है कि काले धन को हटाने की इस मुहिम को जनता का समर्थन नहीं है। जरूर है, लेकिन जिस नरेंद्र मोदी के बारे में हम सब सोचा करते थे कि प्रशासनिक जादूगर हैं, उस नरेंद्र मोदी ने साबित कर दिया है कि प्रशासनिक मामलों में वे जादू नहीं कर सकते हैं। कर सकते अगर तो लोगों को इतनी परेशानी न होती नए नोट हासिल करने के लिए, यानी व्यवस्था कहीं ज्यादा बेहतर होती। सो, व्यापक तौर पर आम जनता का गुस्सा दिखने लगा था।

ऐन इस समय जब ऐसा होने लगा, राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री पर इल्जाम लगाया निजी तौर पर भ्रष्ट होने का। पत्रकारों के सामने कांग्रेस के उपाध्यक्ष ने कहा कि उनके पास सबूत हैं इस भ्रष्टाचार के और इन सबूतों को वे पेश करना चाहते थे लोकसभा में, लेकिन उनको बोलने का मौका नहीं देना चाहते हैं मोदी। ‘इतना डरते हैं मुझसे प्रधानमंत्री कि बहस से भाग रहे हैं।’ ऐसे समय यह आरोप लगाने का मतलब एक ही हो सकता है कि मोदी ने नोटबंदी करवाई सिर्फ निजी लाभ लेने के लिए। बहुत गंभीर आरोप है यह और वास्तव में अगर राहुलजी के पास सबूत हैं, तो इनको लेकर राष्ट्रपति के पास जाएं, ताकि मोदी सरकार को बर्खास्त कर दिया जाए संविधान के तहत।

राहुलजी गए भी थे राष्ट्रपति भवन विपक्षी राजनेताओं का जत्था लेकर, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उन्होंने विषय ही बदल डाला। मालूम हुआ कि राष्ट्रपति से वे सिर्फ इस बात की शिकायत करने गए थे कि संसद में विपक्ष को अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया जा रहा है। शिकायत अजीब थी, क्योंकि हम सबने देखा है कि संसद को विपक्ष ने चलने नहीं दिया, बावजूद इसके कि चलने दिया जाता तो जनता की परेशानियों का जिक्र होता और मोदी सरकार को आड़े हाथों लेने का यह अच्छा मौका था। राहुलजी प्रधानमंत्री से भी मिलने गए राष्ट्रपति से मिलने के बाद, कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को साथ लेकर, लेकिन वहां भी उन्होंने विषय बदल डाला। प्रधानमंत्री से मिल कर उन्होंने बातें की किसानों का कर्ज माफ करने की, उनके तथाकथित निजी भ्रष्टाचार की नहीं।

राहुलजी राजनीति में अब काफी साल बिता चुके हैं, सो जानते हैं अच्छी तरह कि जब किसी प्रधानमंत्री पर इतना गंभीर आरोप लगता है और उसके सबूत भी होते हैं, तो प्रधानमंत्री का इस्तीफा देना लाजमी हो जाता है। सो, क्यों नहीं देश के सामने पेश कर रहे हैं वे सबूत, जो उनके पास हैं? नहीं हैं अगर और उनके आरोप झूठे साबित होते हैं, तो कांग्रेस पार्टी के लिए समय आ गया है कि वह तय करे कि राहुलजी देश के इस सबसे पुराने राजनीतिक दल का नेतृत्व करने के लायक हैं भी कि नहीं।माना कि कांग्रेस की समस्या यह है कि दशकों से वह राजनीतिक दल न रह कर एक निजी कंपनी बन कर रह गई है, जिसको एक ही परिवार चला सकता है, लेकिन क्या राहुलजी की जगह उनकी बहन प्रियंका नहीं ले सकती हैं? राहुलजी की माताजी ने हाल में एक दशक बाद अपना पहला इंटरव्यू दिया राजदीप सरदेसाई को। उसमें सोनियाजी ने अपने बेटे की तुलना इंदिरा गांधी से की, यह कह कर कि इंदिराजी भी जब राजनीति में आई थीं तो उनका मजाक उड़ाया जाता था, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता उनको गंूगी गुड़िया समझते थे। अपने बेटे का नाम लिए बिना उन्होंने इशारा किया कि एक दिन राहुल भी दिखाएंगे दुनिया को कि वे असली लीडर हैं।

हो सकता है कि मम्मीजी की यह भविष्यवाणी सही साबित हो किसी दिन, लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि राहुलजी के आरोप झूठे साबित होते हैं अगर तो उनकी बातों को गंभीरता से लेना मुश्किल हो जाएगा। एक बार पहले भी उन्होंने मायावती सरकार पर झूठा इल्जाम लगाया था कि भट््टा-पारसौल में सत्तर से ज्यादा किसान पुलिस की गोलियों से मारे गए, सिर्फ इसलिए कि वे हाइवे निर्माण के लिए अपनी जमीनें नहीं देना चाहते थे। राहुलजी ने भट््टा-पारसौल जाकर एक गड््ढा दिखाया, जिसमें उन्होंने कहा, मरने वालों की लाशें जलाई गई थीं। बाद में जब हम जैसे पत्रकार भट््टा-पारसौल पहुंचे, तहकीकात करने, तो पता लगा कि न कोई गड््ढा था और न ही सत्तर किसान मारे गए थे। राहुलजी का यह भी आरोप गलत साबित हुआ कि महिलाओं के साथ पुलिसवालों ने दुष्कर्म किया था। उत्तर प्रदेश में कुछ महीनों बाद जब विधानसभा चुनाव हुए तो कांग्रेस बुरी तरह हारी। राहुलजी ने अपने चुनाव प्रचार में इस घटना का जिक्र तक नहीं किया।

इस बार लेकिन उनका आरोप भुलाया नहीं जा सकता, क्योंकि निशाना प्रधानमंत्री पर साधा है। आरोप भी ऐसे हैं, जो अगर सही सिद्ध होते हैं तो सरकार का गिरना तय है। सो, राहुलजी मेहरबानी करके देशवासियों के सामने वे सबूत पेश करें, जो आपके पास हैं। ऐसा करना आपका फर्ज है, क्योंकि नरेंद्र मोदी ने वास्तव में नोटबंदी की तकलीफ दी है देश को सिर्फ अपने फायदे के लिए तो उनको प्रधानमंत्री बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। सबूत नहीं है अगर आपके पास तो राजनीति में रहने का आपको कोई अधिकार नहीं है।

 

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