ताज़ा खबर
 

बाख़बर : हर ‘देशप्रेमी’ को चाहिए एक ‘देशद्रोही’

हम तो ‘देशप्रमियों’ के कृतज्ञ हैं कि हमें उन्होंने एक से एक ‘देशद्रोही’ के दर्शन कराए! खालसा से फैकल्टी तक मार्च करने वाले ‘देशद्रोहियों’ की संख्या पंद्रह सौ तक पहुंच गई!
Author नई दिल्ली | March 5, 2017 02:51 am
रामजस कॉलेज के छात्र मंगलवार (28 फरवरी) को नॉर्थ कैम्पस में एबीवीपी के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए। ( Photo Source: PTI)

‘देशद्रोही’ न हों तो ‘देशप्रेमी’ भी न हों। हर ‘देशप्रेमी’ की जरूरत है एक ‘देशद्रोही’। सिर्फ ‘देशप्रेमी’ बना सकते हैं ‘देशद्रोही’! जो ‘देशप्रेमी’ से असहमत वह ‘देशद्रोही’! सात दिन के प्रसारण में हमें पंद्रह सौ देशप्रेमी दिखे! जब सात दिन में इतने बने, तो एक साल में कितने बनेंगे? चैनलों के सौजन्य से ‘कल्चर्स आॅफ प्रोटेस्ट’ का रायता रामजस से निकल कर देश भर के कैंपसों में फैल गया, लेकिन डीयू में जम के फैला। ‘देशद्रोहियों’ के मुकाबले ‘देशप्रेमी’ आ जुटे। चैनलों में जान पड़ गई! ‘देशद्रोही’ आकर्षक दिखने लगे!

दस-पंद्रह फुट चौड़े और सैकड़ों फुट लंबे तिरंगे को सिर पर तान कर डीयू की सड़कों पर ‘तिरंगा रैली’ निकालते हुए डीयू के ‘देशप्रेमियों’ ने ‘देशद्रोहियों’ के खिलाफ जम कर नारे लगाए: ‘आजादी लीग’ वाले ‘देशद्रोही’! खालिद ‘देशद्रोही’! कन्हैया ‘देशद्रोही’! जो इनका पक्ष ले, वह ‘देशद्रोही’! डीयू को जेएनयू नहीं बनने दिया जाएगा…! लेकिन अगले दिन सैकड़ों ‘देशद्रोही’ ‘सेव डीयू’ के नारे के साथ मैदान में थे। वे पूरे दिन खालसा कॉलेज से आर्ट्स फैकल्टी तक रैली निकालते रहे। ढपली बजाते, गाना गाते, नारे लगाते रहे: एबीवीपी बाहर जाओ! गुंडागर्दी मुर्दाबाद! आउट आउट एबीवीपी आउट! कन्हैया कुमार ने ‘स्पेशल अपीरियंस’ दिया। एक अंग्रेजी चैनल ने कन्हैया की खबर दी! मुआ ‘देशद्रोही’ कहीं का! हिम्मत तो देखो कि कहने लगा कि साल भर हो गया, अभी तक मुझे कायदे से ‘देशद्रोही’ भी नहीं बनाया! पुलिस ने चार्जशीट तक नहीं बनाई!

जनता जहां, नेता वहां! सो, ‘आजादी लीग’ का पक्ष लेने वाले ‘देशद्रोही’ नेता ज्यों ही कैंपस की ओर लपके त्योंही एक ‘देशभक्त’ अंग्रेजी एंकर द्वारा ‘कैंपस में राजनीति करने के अपराधी’ करार दिए गए! मंत्रीजी बोले तो एंकरों को राजनीति न दिखी, ‘देशद्रोहियों’ के हिमायती ज्यों ही आए, त्योंही राजनीति दिखने लगी! यह है: ‘एंकर न्याय’! फिर भी ‘देशद्रोहियों’ को ‘कीमती’ बनाने के लिए एंकरों का धन्यवाद! धिक्कार से जितनी ‘वैल्यू’ ‘देशद्रोहियों’ को मिलती दिखी, उतनी ‘देशपे्रमियों’ को मिलती नहीं दिखी!

बहरहाल, रामजस कांड के सात दिन बाद, एक दुर्लभ वीडियो ने दो चैनलों में दर्शन दिए। पहले टाइम्स नाउ ने दिखाया, फिर इंडिया टुडे ने! रामजस के कैंपस में ही ‘खींचे’ प्रतीत होते इस वीडियो में ढेर सारे ‘देशद्रोही’ डफली बजा-बजा कर तरह-तरह की आजादियां मांगते दिखते थे कि ‘बस्तर मांगे आजादी’, ‘कश्मीर मांगे आजादी’… ‘जामिया मांगे…’ इस वीडियो को दिखाते एंकर बार-बार कहते कि हम इस वीडियो की प्रामाणिकता की गारंटी नहीं लेते! जांच के बाद ही सच का पता लगेगा यारो! ये क्या बात हुई? प्रामाणिक नहीं, तो दिखाते क्यों हो? कहीं यह भी ‘फेक न्यूज’ का लोचा तो नहीं?

डीयू के ‘देशप्रेमी’ कहते रहे कि डीयू को जेएनयू नहीं बनने देंगे और लेकिन इन कमबख्त ‘देशद्रोहियों’ की हिम्मत तो देखिए कि एक कॉलेज को जेएनयू बना ही डाला! एक चैनल पर सोली सोराबजी लाइन देने लगे कि नारे लगाना ‘देशद्रोह’ (सिडीशन) नहीं होता, सर जी! ‘देशपे्रमी’ जिसे ‘देशद्रोही’ कहें, उसे ‘देशद्रोही’ होना ही होता है! जो ऐसा नहीं मानते, वे भी ‘देशद्रोही’ कहलाते हैं! सावधान सोली जी! ‘देशद्रोही’ कहलाने वालों में अगला नंबर आपका हो सकता है!

हम तो ‘देशप्रमियों’ के कृतज्ञ हैं कि हमें उन्होंने एक से एक ‘देशद्रोही’ के दर्शन कराए! खालसा से फैकल्टी तक मार्च करने वाले ‘देशद्रोहियों’ की संख्या पंद्रह सौ तक पहुंच गई! मिरांडा, जामिया, जेएनयू, आंबेडकर यूनीवर्सिटी के लड़के-लड़कियां भी शामिल बताए गए! कई टीचर भी शामिल बताए जाते रहे! लेकिन अफसोस कि एक भी ‘देशप्रेमी’ एंकर ने नहीं पूछा: सर जी! कहीं क्लास तो बंक करके नहीं आए? ‘देशप्रेम’ और ‘देशद्रोह’ की चौबीस बाई सात की इस ‘घमासानी मूवी’ का आकर्षण शायद इतना जबर्दस्त था कि एलएसआर में बीए में पढ़ने वाली बीस साल की एक शहीद की बेटी गुरमेहर कौर भी अपने को कूदने से न रोक सकी! उसने बड़ी स्टाइल से मौन रह कर पहले अपने बनाए पोस्टरों का वीडियो दिया।

एक पोस्टर में वह कहती थी कि ‘उसके पिता को पाकिस्तान ने नहीं युद्ध ने मारा!’ ऐसे ‘देशद्रोही’ वाक्य को ‘सुन कर’ एक ‘देशपे्रमी’ मंत्रीजी ने (जिन्होंने माना कि उन्होंने वीडियो नहीं देखा) कह दिया कि ‘उसके दिमाग को किसी ने प्रदूषित किया है!’ गुरमेहर तो पहले से ही ‘ट्रोल्ड’ थी! इस फजीते से आहत होकर वह मीडिया से बोली कि मैं किसी की राजनीति में नहीं… कैंपस रचनात्मकता के लिए होते हैं… मुझे किसी राहुल ने रेप की धमकी दी है… लेकिन दर्शकों से यह भी कह गई कि ‘कल आइसा की रैली में आप शामिल हों’! उसके सलाहकार बोले कि वह डर गई है और घर चली गई है! लेकिन ‘देशपे्रमियों’ को तरस न आया। तीन पहलवानों, एक पूर्व क्रिकेटर और एक फिल्मी हीरो ने उससे ट्वीट कर पूछा कि उसके पिता को पाकिस्तान ने नहीं मारा तो किसने मारा? सिर्फ ‘युद्ध ने मारा’ कहना ‘गल्त’ है!

फैले रायते को कोई समेटना चाहे तो न ‘देशभक्त’ समेटने देंगे, न ‘देशद्रोही’ समेटने देंगे। ‘देशभक्त’ अब ‘सेव डीयू’ रैली करने वाले हैं। पंजाब यूनीवर्सिटी तक में रैली दिखने लगी है! ‘देशप्रेमियों’ और ‘देशद्रोहियों’ की यह कबड्डी लंबी चलनी है! कारण यह कि हर ‘देशप्रेमी’ को चाहिए एक ‘देशद्रोही’!

DU बचाओ कैंपेन से अलग हुई गुरमेहर कौर; कहा- "मुझे अकेला छोड़ दो"

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. S
    SriRam
    Mar 5, 2017 at 2:51 pm
    एक वाक्य और लिख देते जो पाहिले सिर्फ अंग्रेजों के भक्त थे उनकी औलाद आज देश भक्ति का ठेका ले रखा है
    (0)(0)
    Reply
    1. A
      abodh
      Mar 5, 2017 at 10:13 am
      सटीक चित्रण हैं सर ...शुक्र है की अभी भी आप जैसे लोग हैं जो सच लिखने ने हिम्मत रखते हैं
      (1)(0)
      Reply
      सबरंग