January 17, 2017

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‘बाखबर’ कॉलम में सुधीश पचौरी का लेख: गोलाबारी जारी

चैनलों की खबरों से ज्यादा सुर्खियां बोलती हैं। सुर्खियां ही चर्चित होती हैं। पिछले पांच-छह दिन की दैनिक सुर्खियों के एक बार फिर दर्शन कीजिए ।

Author नई दिल्ली | October 9, 2016 05:06 am
फवाद खान

इन दिनों चैनलों की खबरों से ज्यादा सुर्खियां बोलती हैं। सुर्खियां ही चर्चित होती हैं। पिछले पांच-छह दिन की दैनिक सुर्खियों के एक बार फिर दर्शन कीजिए और समझिए कि एक ओर देशप्रेमी खड़े हंै, दूसरी ओर ‘जब स्ट्राइक की तो डरना क्या?’ की लाइन वाले खड़े हैं। पहला छक्का मनसे की सुर्खी ने मारा: या तो पाकिस्तानी कलाकार अड़तालीस घंटों में भारत छोड़ दें, वरना हम छुड़वा देंगे। सलमान उवाच: उनको वीसा दिया गया है, वे कलाकार हैं, आतंकवादी नहीं! अगला सीन: सलमान हाय हाय हाय हाय।  सुर्खी: श्याम बेनेगल पाक कलाकारों के पक्ष में! अभिजीत: ये कोई कलाकार हैं? इंपा: उड़ी हमले को कंडेम न करने वाले पाक कलाकारों को काम न दिया जाय।  चर्चा सार: ये हमारे देश में नाम और नामा कमाते हैं। पेरिस और पेशावर के आतंकी हमलों को कंडेम करते हैं, उड़ी के हमलों को नहीं करते! इनको यहां रहने का क्या हक? हम नहीं कहते कि पाकिस्तान के पीएम को कंडेम करें, सिर्फ आतंकी हमले को कंडेम करें और ये इतना भी नहीं कर सकते? कंडेम करें, नहीं तो फूटें। ये प्रो-पाक स्टार लॉबी और लिबरल लॉबी देश के साथ हैं कि पाकिस्तान के साथ हैं?

शनिवार की सुर्खी: अदनान सामी ने उड़ी में आतंकी हमले को कंडेम किया, तो पाक बोला, वो गद्दार है! एक रिपोर्टर: पाक कलाकार चाहें तो अपनी जनता पर दबाव बना सकते हैं। सुर्खी: सीताराम येचुरी अब भी संवाद चाहते हैं! भाजपा प्रवक्ता: हम संवाद के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन किससे संवाद करें? एक एंकर: यूएन ने भी संवाद के लिए कहा है। जबाव: हम यूएन से सहमत नहीं! कांग्रेस प्रवक्ता: माना कि देश में गुस्सा है, लेकिन चीयर लीडरों के कहने पर न चलें। जनता को बताएं। एक पत्रकार: सरकार ने सही कार्रवाई की, लेकिन इस बार उसे पब्लिक किया। पाक की अणुबम की धमकी की हवा निकाल दी। ठीक किया! एक कूटनीतिज्ञ: हमारे एक्शन के बाद भी आंतकी नेटवर्क खत्म नहीं होगा। आगे भी चौकस रहना है!  मनसे का सलमान को अल्टीमेटम: उसके खिलाफ प्रदर्शन। जिनको पाकिस्तानी कलाकार अच्छे लगते हैं वे पाकिस्तान चले जाएं। एक सीपीएम प्रवक्ता: युद्ध समस्या का हल नहीं। संघ प्रवक्ता: हमारी उदार हृदयता ही हमारी कमी है। ये वामंपथी तो अफजल तक का पक्ष लेते रहे हैं। एंकर: ये लोग भारत के पक्ष में क्यों नहीं बोलते। एक उदारवादी बंदा: एंकरजी आप ये सब टीआरपी के लिए कर रहे हैं। एंकर बहुतै नाराज!

एक संघ प्रवक्ता: लेफ्ट बताए किससे बता करें? लेफ्ट ने हमेशा पीठ में छुरा घोंपा है। पहले बयालीस में घोंपा, फिर बासठ में घोंपा! अब तीसरी बार घोंपा है! दो अक्तूबर: शायद गांधी का असर रहा कि इस दिन कुछ सीन बदले-बदले से दिखे। एक अंगरेजी चैनल मुंबई में जुहू के तट पर अमिताभ बच्चन से पूरे दिन ग्रीनाथोन कराता रहा। दस धाार्मिक स्थलों की स्वच्छता की चिंता की! पंडित जसराज से रघुपति राजा राम गवाया। पांच सितारा स्वच्छता जिंदाबाद! टीवी में तो कूड़ा भी कलरफुल लगता है! दूसरे अंगरेजी चैनल ने भी पांच सितारा स्वच्छता अभियान प्रसारित किया, कुछ सम्मान दिए और रेखा भारद्वाज और हंसराज हंस से कुछ गाने गवाए। हंस के गानों पर कुछ युवा-युवती थिरकते दिखे! पांच सितारा स्वच्छता जिंदाबाद!  उसके बाद कुछ गरम सुर्खियां मैदान में थीं: भाजपा के योगी आदित्यनाथ अचानक पाक कलाकारों के पक्ष में बोलते नजर आए और आश्चर्य कि उनकी निंदा किसी ने न की! बाबा रामदेव ने पाक कलाकारों पर प्रतिबंध का समर्थन किया! दिग्विजय सिंह का कटाक्ष: सर्जिकल स्ट्राइक पर भाजपा छाती ठोंकने में बिजी है! गुलाम नबी आजाद ने संभाला: हम सरकार के साथ हैं।

हिंदी चैनलों की सुर्खियां अंगरेजी से ज्यादा गरम। वहां पाकिस्ताान कई बार बर्बाद किया जा चुका था। कई बार उसकी हवा निकल चुकी थी। वह बदहवास बताया जाता रहा। एक जगह वह डरा हुआ भी दिखा!
एक अंगरेजी एंकर पूछने लगा: क्या भारत चीनी बाधा को पार करेगा यानी चीन से पंगा लेगा। एक रणनीतिज्ञ बोला कि कई स्तरों पर एक्शन करना है। एंकर बोलता रहा कि अब नरमी से काम नहीं चलने वाला, कुछ कठोर कदम उठाने होंगे। चीन से ट्रेड बंद किया जाए, ऐसा कुछ करना होगा! एक विशेषज्ञ बोला: पाक से अलग निपटना होगा, चीन से अलग! यह रिटायर्ड विशेषज्ञ था।  तीन अक्तूबर को सुर्खियां फिर गरम रहीं। बीएसएफ कैंप पर हमले को बचाते हुए एक जवान के शहीद होने की बड़ी खबर छाई रही और एक गुस्सा प्रसारित होता रहा। बीएसएफ के जवानों के नारे, श्रद्धांजलियां, शहीद के परिजनों का दुख, उसके दोस्त का बयान आता रहा।

चार और पांच अक्तूबर। सुर्खियों में गरमी बढी: एक चैनल की सुर्खी रही: जो हमारे साथ नहीं, वो दुश्मन के साथ है। मोहन भागवत: जो हमसे टकराएगा, चूर-चूर हो जाएगा! नाना पाटेकर: सबसे पहले देश!
सुर्खियां जारी: हर चैनल पर अदनान सामी। अदनान ने उड़ी हमले को कंडेम किया। कहा: आतंकवादी हमारे दुश्मन हैं। पाक आतंकवाद को निर्यात करता है। परिवार मेरा पाकिस्तान में है, लेकिन अल्लाहताला पर मेरा पूरा भरोसा है। मुझे डर नहीं लगता! एक अंगरेजी चर्चा में एक रक्षा विशषज्ञ बोला: अब हमें सर्जिकल स्ट्राइक के फुटेज पब्लिक कर देने चाहिए! इसके बाद इसकी डिमांड बढ़ती नजर आई। दूसरे अंगरेजी चैनल की सिर्फ इतनी सुर्खी रिपीट होती रही: पाकिस्तान के छह किलोमीटर तक गोले दागे! सलीम खान ने बेटे की हिफाजत में व्यंग्य किया। सुर्खी बनी: कुछ एंकर अब खुद एक्टर बन गए हैं। केजरीवाल ने गुगली दी: पीएम ने इच्छाशक्ति दिखाई। उसको सलाम। लेकिन पाक के झूठे प्रचार को नंगा करें। श्रेय लिया है तो स्ट्राइक दिखाएं। गुगली कैच। सुर्खी बनी: भारत को नीचा मत दिखाओ। सेना पहले, राजनीति बाद में। भारत के साथ दगा! कांग्रेस के संजय निरुपम: जब तक छप्पन इंच की तरफ से प्रमाण नहीं मिलता, तब तक मांग करेंगे। भाजपा बैनर लगा कर श्रेय क्यों ले रही है?उसके बाद सुर्खियों की मार: सेना का साथ दो। राजनीति बंद करो। सेना झूठ नहीं बोलती। अंत में पीएम की मार्फत दो लाइनें रिपीट: छाती ठोकना बंद करें। सिर्फ अधिकृत ही सर्जिकल स्टाइक पर बोलेंगे!
लेकिन सुर्खियां जारी। गोलाबारी जारी!

 

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First Published on October 9, 2016 5:06 am

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