December 07, 2016

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सुधीश पचौरी का कॉलम बाखबर: समाजवाद बबुआ टीवी से आई

मोदीजी ने पुराने नोट रात के बारह बजे तक लेने लिए कहा था, लेकिन डर के मारे दुकानदारों ने नौ बजे से ही आदेश लागू कर दिया।

नए नोट जारी करने का प्रस्तावित डिजाइन।

माजवाद बबुआ चैनलन ते आई!
कालाधन बैंकन में जाई, इससे आतंकवाद मर जाई!
जिसके पास कछू नहिं भाई, वो देश की खातिर सब कुछ सह जाई!
जिसके घर कालाधन भाई, वो रातोंरात गोल्ड में लग जाई!
समाजवाद बबुआ मोदीजी लाई, जब-जब लाई झटके पे झटके दे जाई!
कड़कदार कुरते और कड़कदार जाकेट में कड़कदार बोली से प्यार से समझाई! तो ‘संशयात्मा विनस्यति’ हुइ जाई!
समाजवाद मोदीवाद बन जाई!!
हाय! चैनलों पर वह कैसा गजब ढाने वाला, जै-जैकार कराने वाला सीन था कि घोषणा के अनुसार मोदीजी आए। मोदीजी बोले। मोदीजी गए और सब कुछ बदल गया!

सबकी जेबों में हाथ गया और सबने जेबों को खाली होते पाया! नंबर एक का पैसा भी नंबर दो का नजर आया! अपनी ही कमाई का पैसा संदिग्ध हुआ! हाय!
पहले मोदीजी ने ब्रिक्स में भारत की गिरती साख का जिक्र किया, फिर आतंकवाद पर आए, फिर आतंकवाद और कालेधन के खतरनाक संबंध उजागर किए, फिर आतंकवाद से लड़ना कालेधन से लड़ना बताया, कालेधन से लड़ना भ्रष्टाचार और गरीबी से लड़ना बताया, इसके बाद शुद्धीकरण का मंत्र मारा, फिर आठ नवंबर की रात के बारह बजे वाला जोर का झटका दिया, फिर सहलाया कि देश की प्यारी जनता तुझे कुछ तकलीफ तो होगी, लेकिन आतंकवाद, कालेधन और भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए तू सब कुछ सह लेगी। कुछ दिन का कष्ट होगा, लेकिन भविष्य उज्जवल होगा! भारतमाता की जय बुलवाने से ऐन पहले का अंतिम वाक्य बोला: शुद्धीकरण शुचिता की दीवाली मनाएं!

चैनल बौरा उठे। एक चैनल उछला: ये गेम चेंजर है! दूसरे ने हाइप मारा: ये गे्रट गेम चेंजर है! बाकी बोले अद्भुत है! अदभुत है!! हुइहै कोउ न होनेहु नाहीं!
जो ‘नॉट चेंजर’ था वह चैनलों के लिए ‘गेम चेंजर’ था! खेल की बात खिलाड़ी जानें। जनता के पास गए, तो उल्लसित चैनलों को झटके लगने लगे। जनता परेशान दिखी। इंडिया टुडे पर राजदीप ने दिखाया: एक आदमी बोलता था: घर में शादी है। न कुछ खरीद सकते हैं, न कुछ कर सकते। क्या करें? मोदी ने बहुत खराब काम किया है। मुंबई की एक जनता बोली कि मैडम ने पांच सौ का नोट दिया, अब कोई ले नहीं रहा। उसे क्या मालूम कि मोदीजी ने पुराने नोट रात के बारह बजे तक लेने लिए कहा था, लेकिन डर के मारे दुकानदारों ने नौ बजे से ही आदेश लागू कर दिया।  एक भी चैनल ने नहीं दिखाया कि किस तरह गोल्ड में लग कर कितनी ब्लैकमनी रातोंरात वाइट बनी!

कट टू ‘मैनेजमेंट’: एक बड़बोला एंकर धमकाते हुए बोला: पहले की सरकारों ने इतनी हिम्मत क्यों नहीं दिखाई और अब दिखाई तो थैंक्यू क्यों नहीं कहते भाई? फिर सब चैनलों पर आरबीआइ गवर्नर सहित सचिव ने मोर्चा संभाला। नए नोट दिखाए कि पुरानों के बदले ये मिलेंगे। एक पर मंगलयान का चित्र छपा था! उसके बाद विरोध था: ममता, कांग्रेस, लेफ्ट, जनता दल का ‘किंतु परंतुवाद’ था कि इरादा ठीक, लेकिन टाइम और तरीका गलत! कांग्रेस के सुरजेवाला साफ-सुथरी कड़क हिंदी में कड़के कि त्योहारों का सीजन और ये कदम! बताइए, खर्च कैसे चलांएगे लोग? शादी-ब्याह का मौसम और अब दस हजार से ज्यादा नहीं निकाल सकते? कालाधन खत्म करें, यह ठीक, लेकिन इस तरह करना कहां तक ठीक? दो हजार का नोट चलाया, तो क्या कालेधन वालों के लिए?
तब आए वित्तमंत्रीजी और अंगरेजी चैनलों ने डीडी से लेकर दिखाया। वित्तमंत्रीजी ने इरादा साफ किया कि इससे कैश-लेस विनिमय बढ़ेगा। धन के मूवमेंट पर नजर रखी जा सकेगी। कुछ परेशानी होगी, लेकिन अंत में अच्छा ही अच्छा है। लोगों के जीने का तरीका बदलेगा! सब इसका स्वागत कर रहे हैं।
जोर का झटका जोरदार तरीके से बेचो तो खूब बिकता है। और, जब चैनल चरणों में पड़े हों तो कुछ भी बिक सकता है।

एक जोशीले राष्ट्रवादी एंकर द्वारा शाम को आयोजित डब्लूडब्लूएफनुमा कुश्ती में जब जेडीयू के पवन वर्मा ने शालीनता के साथ कुछ ‘किंतु परंतु’ किया तो एंकरजी ने सीटी बजा कर भाजपा के प्रवक्ता नलिन कोहली को मैदान में उतारा, लेकिन भाजपा के जोशीले एमआर वेंकटेश बीच में कूदे बिना न रह सके। शालीन नलिन ने टोका भी कि वेंकटेश प्लीज मुझे बोलने दो न! लेकिन वेंकटेश कहां हटने वाले! अंत में एंकर ने रोका कि ‘वेंकटेश पीछे हटो, पीछे हटो!’ तब नलिन बोल पाए! बहरहाल, पवन ने एक सवाल तो चिपका ही दिया कि इस बात की क्या गारंटी कि नए नोटों के जाली नोट नहीं बनेंगे? मजा यह कि इसका जवाब किसी ने नहीं दिया! मोदीजी की कहानी इस कदर गेम-चेंजर थी कि उनके आते ही ‘ट्रंपजी’ सीन से उतर गए, हिलेरी बिला गर्इं और देशभक्त चैनल देश की ओर लौटे। आठ नवंबर की रात मोदीजी की टीवी एेंट्री ऐसी ही ‘सीन चेंजर’ थी!

सीन चेंजर तो ऐसी थी कि वृहस्पतिवार के सीन और भी बदले-बदले नजर आए। एबीपी चैनल दिखाता रहा कि किस तरह बैंक में नोट बदलवाने के फार्म की फोटो कॉपी तक ब्लैक में दस रुपए में बिक रही थी। ब्लैकमनी ब्लैकमनी बना रही थी। लंबी लाइनें लगी थीं। एक चैनल का रिपोर्टर एक आदमी से पूछ रहा था कि आखिर क्या प्राब्लम है? तो प्राब्लम में आया आदमी कह रहा था कि पॉलिसी ठीक, लेकिन प्रॉब्लम है!  मोदीवाद बबुआ सबको इसी तरह चिढ़ाई! अरुण जेटली दुबारा आए और टाइम्स नाउ पर समझाते रहे कि दो-तीन सप्ताह की प्राब्लम है, आगे फायदा ही फायदा है। ईमानदारी की कीमत बढ़ेगी! इस कदम से जीवन में नैतिकता बढ़ेगी! राजनीति साफ होगी। टाइम्स नाउ की नाविका ने अरुणजी से सवाल किया कि अब बैंक में जमा करने वालों का रिकार्ड रखा जाएगा। क्या यह ‘पुलिस स्टेट’ नहीं बन रही है? अरुण जेटली बोले कि बड़ी रकम वालों को चिंता होनी चाहिए, छोटी वालों को नहीं! कुछ प्राब्लम होंगी, लेकिन आगे चल कर समांतर इकोनॉमी खत्म हो जाएगी।

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First Published on November 13, 2016 3:29 am

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