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न था, न है, न होगा

गजब की मिलीभगत लगी चैनलों की कि न चुनाव, न अभियान और रिजल्ट दे दिया नीतीश जी ने कि दो हजार उन्नीस में मोदी को कोई हरा नहीं सकता!
Author August 6, 2017 06:57 am
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (बाएं) और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार। ( फाइल फोटो)

हिंदी चैनलों पर बाल काटने वाले भूत का भूत सवार है। एबीपी का एंकर कई दिन से पूछता फिरता है: इस बाल काटने वाले भूत का क्या करें?जूम की आवाज करती भूत की साइबर कैंची एक ओर से दूसरी ओर निकल जाती है। एक लड़की की एक कटी चोटी मां के हाथ में है। एंकर कह रहा है लड़की रो रही है, लेकिन कैमरा तो ऐसा नहीं दिखाता!
कि ‘कट’ कि एक पचास-पचपन साल की बूढ़ी कैमरे की कैद में आ जाती है। कटे बालों वाला उसका सिर दिखता है। फिर चैनल केस टू केस बताता चलता है कि यहां वहां कहां-कहां भूत का डर व्यापा है। नीम की टहनी और हल्दी की थाप दवाजों पर लगाने लगे हैं लोग। भूत दिल्ली के कंगनहेडी तक आ पहुंचा है!बाल काटने वाला भूत रामसे ब्रदर्स की ‘वीराना’ और ‘भुतहा हवेली’ दोनों का हारर प्रसारित कर रहा है! बाल कटने की कहानी एक-सी है: अचानक सिर में जोर का दर्द होता है, उसके बाद बाल कट जाते हैं। नहीं जानते कि कौन काट जाता है? बाल काटने वाली के शक में एक औरत की हत्या कर दी गई है!ओझा ज्ञानी आ जुटे। एक कहता: यह पता लगाना मुश्किल है कि कौन काट रहा है? यानी इतना कहने के लिए आया हूं कि मेरे भरोसे मत रहना! ‘सत्य’ अक्सर इसी तरह उलझ कर पहेली का मजा देता है।

‘ब्लू व्हेल’ का खूनी खेल! खिलाड़ी को पचास दिन में गारंटी से आत्महत्या करनी होगी! मुंबई में चौदह साल का लड़का इस खेल ने मार दिया है। एनडीटीवी पूछता है: क्या है ये ‘ब्लू व्हेल’? एक विशेषज्ञ: ये ‘डार्क वेब’ की दुनिया है। हर आदमी इस तक नहीं पहुंच सकता। हत्यारा खेल है। आत्महत्या करने को मजबूर करता है। ब्लैकमेल करता है। दूसरा विशेषज्ञ: जो चाहे पहुंच सकता है। एंकर: इससे बचा कैसे जा सकता है। विशेषज्ञ : देश में काूनन नहीं जो बचाए! यह देश क्या क्या करे?
गुजरात में कांग्रेस के प्रति एमएलए का रेट दस करोड़ पर खुला है। छह का शिकार हो चुका है। बाकी के शिकारी के हाथ न लगें, इसके लिए कर्नाटक के एक रिसॉर्ट में रखे गए हैं। एक शिकारी चैनल कहता है- कांग्रेस ने उनको अगवा किया है। उनको चाहिए आजादी!
कि अचानक खबर बे्रक होती है कि कर्नाटक के जिस मंत्री ने एमएलए अपने रिसार्ट में रखा है उसके उनतालीस ठिकानों पर आइटी के छापे पड़ रहे हैं। पांच करोड़ और साढ़े चार करोड़ या छह करोड़ यानी साढ़े नौ करोड़ से ग्यारह करोड़ तक नगद मिला है। वृहस्पतिवार तक यह गहनों समेत बीस करोड़ हो गया था। कैश जहां एनफोर्समेंट वहां। एनफोर्समेंट विभाग एक्शन करेगा तो सीआरपीएफ आएगी ही! कैश की हिफाजत बड़ा डेंजूरियस है! गनीमत जानिए कि फौज न लगाई!
कांग्रेस रोए जा रही है: यह क्या हो रहा है, रिसॉर्ट में छापे? यह बदलाखोरी है।
जवाब आता है: ये छापे नहीं, सिर्फ तहकीकात है।

इस कैशलेस भारत में भी इतना कैश! जरूर गड़बड़ है! एक्शन तो चाही! एक शिकारी चैनल भरी बंदूक लिए थरूर का शिकार करने के लिए दिन भर बकबकाता रहता है कि हत्यार हत्यारा! इतने पर कांग्रेसी लोग सवाल करने के उसके जनतांत्रिक अधिकार का सम्मान नहीं करते। वे चमचे चैनलों को अंदर आने देते हैं और तोप चैनल को नहीं आने देते! तोप चैनल गेट के बाहर सड़क पर फैल जाता है कि लटियन वाले लुटिया समेत अंदर और हम चुटिया समेत बाहर! ये देखो हमारे बंदों के साथ धक्का-मुक्की, ये देखो ये देखो! तोप चैनल हो, तो अपने रोने का भी स्टैंडर्ड रखो।कामकाज के जोखिम को घाव की तरह न दिखाओ। तसल्ली के लिए वृहस्पतिवार की सुबह एनडीटीवी द्वारा दिखाए एक रूसी चैनल के रिपोर्टर को देख लो, जो बेचारा पीस टू कैमरा दे रहा था कि एक फौजी पीके आया और रिपोर्टर के गाल पर एक जड़ दिया रिपोर्टर जान बचा कर भागा! वह किसे कोसे?एक चैनल के लिए केरल इन दिनों ‘किलिंग फील्ड’ है। ऐसी मारामारी तो अरसे से चल रही है, लेकिन इस बार वह अचानक बिग खबर बनाते हुए आई। सीएम- विपक्ष मीटिंग! सब सहमत कि हत्याएं बंद हों, लेकिन कैसे? संघ का अपना पक्ष है, तो सीपीएम का अपना!

एक शाम देखा तोे पाया कि हर चैनल दो हजार उन्नीस का रिजल्ट दे रहा था। गजब की मिलीभगत लगी चैनलों की कि न चुनाव, न अभियान और रिजल्ट दे दिया नीतीश जी ने कि दो हजार उन्नीस में मोदी को कोई हरा नहीं सकता! कुछ कंजूसी-सी कर गए बेदाग बाबूजी! लगे हाथ दो हजार चौबीस का रिजल्ट भी निपटा दिए होते कि ‘मोदी को कोई हराने वाला न था, न है, न होगा’, तो कोई क्या कर लेता? हुइहै कोउ न होनेउ नाहीं!कलाम के स्मारक के उद्घाटन की साइत तो ठीक ही थी। वीणावादन करते पत्थर पर उत्कीर्णित गीता का पाठ करते कलाम जी की दिव्य मूर्ति मन को मोहने वाली थी, लेकिन लगता है कि कुछ विघ्न संतोषी तुष्ट न हुए। शायद इसी कारण कुछ संवेदनशील तमिल भावनाएं भड़क गर्इं। कुछ तमिल नेता नाराज हो उठे कि गीता ही क्यों, तमिल के ‘संगम साहित्य’ के सबसे बड़े कवि तिरक्कुरल की किताब क्यों नहीं रखी गई? कंपटीशन बढ़ा। कुछ कहे कि सिर्फ गीता क्यों, कुरान, बाइबिल क्यों नहीं? लीजिए सर्वधर्म समभाव की खातिर वे भी तुरंत रख दी गर्इं। इस पर एक तत्त्ववादी बोला: गीता के साथ कुरान, बाइबिल स्वीकार्य नहीं! समझे कलाम साहब! आपके बंदे आपको वीणा भी चैन से न बजाने देंगे!बहरहाल, तमिलनाडु की राजनीति को रोज हिलाने वाले चैनलों ने जबसे खबर फेंकनी शुरू की कि एआइडीएमके के दोनों गुट एक होकर एनडीए में शामिल होने को आतुर हैं, तब से अपना मन मगन हुआ जाता है। ईश्वर की लीला साक्षात हो रही है कि भ्रष्ट अचानक अ-भ्रष्ट हुआ जाता है। वे जया अम्मा के भ्रष्टाचार चर्चे, वे चिन्नम्मा के भ्रष्टाचार के चर्चे सब ‘फेक न्यूज’ लगते हैं।
कहा भी है:
‘इक नदिया इक नारि कहावत मैलोई नीर भरो
दोउ मिल जब एक बरन भए सुरसरि नाम परो!’

 

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  1. M
    mygos
    Aug 6, 2017 at 10:41 am
    Bakwaas.......Ulti-sidhi baten -todmadod ke likh diya kuchh jhut kuchh aadha sach. Time pass. Not fit for paper like Jansatta. Utter garbage.
    Reply
सबरंग